Buddha Circuit: पूर्वोत्तर भारत के 5 बड़े बौद्ध स्थल, जहां आज भी गूंजता है 'बुद्धं शरणम् गच्छामि' का त्रिशरण मंत्र

Famous Buddhist Circuit Northeast India: पूर्वोत्तर भारत में कई ऐसे बौद्ध स्थल हैं जहां जाने पर आपको न सिर्फ शांति और सुकून बल्कि आध्यात्मिक दिव्यता और पवित्रता का अनुभव होता है. पूर्वोत्तर राज्यों के जिन बौद्ध स्थलों की आध्यात्मिक विरासत को पुनजीर्वित करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट में ऐलान किया है, उससे जुड़े 5 प्रसिद्ध बौद्ध मठों के बारे में जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

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Budget 2026 For North East Buddha Circuit: पूर्वोत्तर के 5 प्रसिद्ध बौद्ध मठ
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Buddha Circuit Northeast: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 पेश करते प्रत्येक क्षेत्र में कोई न कोई तोहफा देने के साथ भविष्य में उसके विकास को ध्यान में रखा है. धर्म-अध्यात्म का क्षेत्र भी उनके बजट में अछूता नही रहा है. वित्त मंत्री ने अपने बजट में पूर्वोत्तर भारत (North-East) में बौद्ध सर्किट (Buddhist Circuits) के विकास को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की है. सिक्किम, मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे जिन राज्यों के बौद्ध स्थलों को इसका लाभ मिलेगा आइए उस क्षेत्र के 5 बड़े बौद्ध मठों के बारे में जानते हैं, जहां आज भी 'बुद्धं शरणम् गच्छामि' का त्रिशरण मंत्र हर समय गूंजता रहता है. 

1. रुमटेक मठ 

सिक्किम के गंगटोक शहर में मौजूद रूमटेक मठ (Rumtek Monastery) को पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े और पुराने बौद्ध स्थल के रूप में जाना जाता है. सिक्किम का यह चार-मंजिला मठ बेहद खूबसूरत है. प्रकृति की गोद में स्थित इसकी भव्य वास्तुकला, सुनहरे स्तूप और शांतिपूर्ण वातावरण बरबस लोगों को अपनी ओर खींच लाता है. रुमटेक मठ को 1960 में 16वें करमापा, रंगजंग रिगपे दोरजे ने बनवाया था. यह मठ धर्म चक्र के केंद्र के रूप में जाना जाता है. यहां पर कई दुर्लभ पेंटिंग, बौद्ध कलाकृतियां और भगवान बुद्ध की 1001 लघु स्वर्ण प्रतिमाएं हैं. 

2. फोदोंग मठ

फोदोंग मठ (Phodong Monastery) सिक्किम के प्रमुख बौद्ध स्थलों में से एक है जो कि गंगटोक शहर से तकरीबन 28 किमी दूरी पर ​स्थित है. मान्यता है कि इस प्राचीन मठ का निर्माण 18वीं शताब्दी में 9वें करमापा ने करवाया था. हालांकि माना यह भी जाता है कि इससे पहले भी यहां पर एक मठ स्थित था. यह मठ काग्यू सम्प्रदाय के साधुओं और लामाओं का घर माना जाता है. हरी-भरी पहाड़ियों के बीच शांत वादियों में इस मठ की खूबसूरती देखते ही बनती है.  मठ की दीवार पर खूबसूरत पेंटिंग बनी हुई है और इसके भीतर प्राचीन ​भित्ति चित्र भी रखे हुए हैं. यहां 10वें तिब्बती महीने में लूसांग पर्व मनाया जाता है. 

3. पेमायांग्त्से मठ

पेमायांग्त्से मठ सिक्किम के पुराने बौद्ध मठों में से एक है जो कि एक सुंदर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है. यहां से आपको हिमालय का सुंदर नजारा देखने को मिल जाएगा. इस मठ के भीतर जाने पर आपको तिब्बती वास्तुकला और बौद्ध धर्म के इतिहास तथा संस्कृति के दर्शन होंगे. इस मठ को  17वीं सदी में ल्हात्सुन चेनपो नाम के लामा ने विशेष रूप से भूटिया भिक्षुओं के लिए बनवाया था. इस मठ में तमाम संतों और रिनपो की मूर्तियों के साथ धार्मिक ग्रंथ रखे हुए हैं. 

4. तवांग मठ 

अरुणाचल प्रदेश में स्थित तवांग मठ (Tawang Monastery) एक ऐसा प्रसिद्ध बौद्ध स्थल है, जिसे देखने के लिए लोग दुनिया भर से पहुंचते हैं. इसे भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ माना जाता है. तकरीबन 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित तवांग मठ में लगभग 500 भिक्षु और लामा लोग रहते हैं. मान्यता है कि महायान बौद्ध धर्म के इस बौद्ध स्थल की स्थापना 17वीं सदी में मेरक लामा लोद्रे ग्यात्सो ने की थी. इस बौद्ध मठ का दूसरा नाम  'गादेन नामग्याल ल्हात्से' है, जिसका अर्थ 'साफ़ रात में स्वर्ग' है. इस तीन मंजिला मठ के केंद्र में ‘दुखांग' या मुख्य प्रार्थना हॉल बना है.

5. वेणुवन विहार बौद्धमठ

त्रिपुरा में वेणुबन विहार, उदयन बुद्ध विहार और मनु बकुल बुद्ध मंदिर प्रमुख बौद्ध स्थलों में गिने जाते हैं. यदि बात करें इसमें वेणुवन विहार बौद्धमठ (Venuvan Vihara Buddhist Monastery) की तो यह अगरतला शहर से तरकीबन 2 किमी की दूरी पर कुंजबन क्षेत्र में स्थित है. बौद्ध धर्म की आस्था से जुड़ा यह मठ सुंदर बगीचों और भगवान बुद्ध की धातु से बनी मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है. यहां जाने पर आपको भगवान बु​द्ध की खूबसूरत मेटल की मूर्तियां देखने को मिलेंगी. यह बौद्ध स्थल शांति, सुकून और आध्यात्मिकता का एक केंद्र है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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