Basant Panchami 2026: मां सरस्वती के मंदिर से लेकर प्रयागराज के संगम तक, जानें बसंत पंचमी से जुड़ी 10 बड़ी बातें

Saraswati Puja 10 Points: आज माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि पर माघ मेले का चौथा प्रमुख स्नान है. यह महापर्व शारदा, वीणावादिनी, हंसवाहिनी आदि तमाम नामों से पुकारी जाने वाली विद्या की देवी मां सरस्वती की साधना-आराधना के लिए समर्पित है. यदि आप स्नान, दान और पूजन के जरिए इसका पुण्यफल प्राप्त करने जा रहे हैं तो आपको उससे पहले बसंत पंचमी से जुड़ी 10 बड़ी बातों को जरूर जानना चाहिए. 

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Basant Panchami 2026: सरस्वती पूजा से जुड़ी 10 बड़ी बातें
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10 lines on Basant Panchami in Hindi: सनातन परंपरा में माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी को अत्यंत ही शुभ दिन माना गया है क्योंकि इसी दिन विद्या, बुद्धि, वाणी और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मोत्सव माना जाता है. जिस पावन पर्व को श्री पंचमी, मनदनोत्सव और वसंतोत्सव आदि के नाम से भी जाना जाता है, उससे जुड़ी क्या कुछ धार्मिक मान्यताएं हैं? मां सरस्वती के प्राकट्य धाम से लेकर उनके संगम स्थल तक कौन से रहस्य जुड़े हुए हैं? जिस बसंत पंचमी पर प्रकृति अपना अनुपम श्रृंगार करती है, आइए उस महापर्व से जुड़ी 10 बड़ी बातों को विस्तार से जानते हैं. 

बसंत पंचमी से जुड़ी 10 बड़ी बातें | 10 lines on Basant Panchami

1. हिंदू मान्यता के अनुसार मां सरस्वती का प्राकट्य बद्रीनाथ धाम से कुछ ही किमी दूर माणा गांव के पास प्रकाट्य हुआ था. आज भी मां सरस्वती के इस उद्गम स्थल पर भगवती सरस्वती का एक छोटा सा मंदिर है.

2. तीर्थों के राजा कहे जाने वाले प्रयागराज में मां गंगा, यमुना और सरस्वती के मिलने के बाद ही यह पावन क्षेत्र त्रिवेणी कहलाता है. जहां पर आपको मां गंगा और यमुना के प्रत्यक्ष दर्शन होते हैं लेकिन मां सरस्वती अदृश्य रूप से वहां बहती हैं.

3. हिंदू मान्यता के अनुसार तीन नदियों का संगम कहलाने वाले इस पावन स्थान पर सरस्वती का जल उस सरस्वती कूप से इंटरकनेक्टेड है, जो कि पास ही किले के भीतर स्थित है. 

4. बसंत पंचमी, जिसे श्री पंचमी भी कहते हैं, यह महापर्व न सिर्फ मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में बल्कि बसंतोत्सव और मदनोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है. माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी को जहां पूरे देश भर के सनातनी बसंत पंचमी पर्व के रूप में मनाते हैं, वहीं ब्रज मंडल में इसे माघ पंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है. 

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5. देश में माणा के अलावा कई जगह पर मां सरस्वती मंदिर हैं. जिनमें मां राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर में स्थित मां सरस्वती का मंदिर, मध्य प्रदेश के सतना का शारदा माता का मंदिर, उत्तर प्रदेश के वाराणसी का नील सरस्वती का मंदिर और केरल का कोयट्टम मंदिर आदि प्रसिद्ध है. 

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6. सनातन परंपरा में बसंत पंचमी का पर्व अक्षरारंभ यानि पढ़ाई प्रारंभ करने के लिए बेहद शुभ माना गया है. इस दिन बच्चों के कर्णवेध यानि कान छिदवाने की परंपरा रही है. 

7. बसंत पंचमी को श्री पंचमी भी कहते हैं. हिंदू धर्म में श्री धन की देवी माता लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है. हालांकि श्री का अर्थ संपन्न और शोभा भी माना जाता है. 

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8. हिंदू धर्म में वीणावादिनी मां सरस्वती को विद्या, वाणी के साथ कला और संगीत की देवी भी माना गया है. यही कारण है कि संगीत के साधक अपनी सफलता की कामना के लिए इस दिन मां सरस्वती की विशेष रूप से साधना-आराधना करते हैं. 

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9. बसंत पंचमी को हिंदू धर्म शास्त्र में अबूझ मुहूर्त माना गया है. यही कारण है कि इस दिन मुंडन, सगाई से लेकर विवाह संस्कार तक कई प्रकार के मांगलिक कार्य किए जाते हैं.

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10. बसंत पंचमी का महापर्व सिर्फ मां सरस्वती की पूजा या फिर जल तीर्थ पर स्नान-दान आदि के लिए ही नहीं जाना जाता है, बल्कि उस बसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है, जिसके आते ही प्रकृति का एक अलग ही मनमोहक रंग नजर आता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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