यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) ने सिविल सर्विस एग्जाम (CSE) 2026 का नोटिफिकेशन बुधवार को जारी कर दिया है. नोटिफिकेशन के अनुसार इस बार 933 पदों पर भर्ती की जानी है. इसके साथ ही कुछ नए नियमों का जिक्र भी नोटिफिकेशन में किया गया है. UPSC ने CSE के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. ऐसे में जो UPSC CSE एग्जाम देने जा रहे हैं, उन्हें इन नियमों के बारे में अच्छे से पता होना चाहिए. UPSC नोटिफिकेशन के अनुसार, जो कैंडिडेट पहले के एग्जाम के आधार पर इंडियन पुलिस सर्विस के लिए (IPS) के लिए चुना गया है या अपॉइंट किया गया है, वह CSE 2026 के रिजल्ट के आधार पर दोबारा IPS चुनने या अलॉट होने के लिए एलिजिबल नहीं होगा. वो IAS, IFS और IRS चुनने या अलॉट होने के लिए एलिजिबल होगा.
संबंधित अथॉरिटी से लेनी होगी अनुमति
IPS या किसी सेंट्रल सर्विस ग्रुप A में अलॉट हुए कैंडिडेट्स अगर CSE 2027 में दोबारा शामिल होना चाहते हैं, तो ऐसे कैंडिडेट्स को CSE 2027 में तभी शामिल होने दिया जाएगा, जब उन्हें संबंधित अथॉरिटी से “ट्रेनिंग में शामिल होने से एक बार की छूट” दी जाएगी.
इसके अलावा जो कैंडिडेट पहले से ही IAS या IFS ऑफिसर के तौर पर काम कर रहे हैं, वे दोबारा सिविल सर्विस एग्जाम देने के लिए एलिजिबल नहीं होंगे. हालांकि ये नियम पहले से ही लागू है. UPSC ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर कोई कैंडिडेट CSE-2026 प्रीलिमिनरी एग्जाम पूरा होने के बाद लेकिन मेन एग्जाम से पहले IAS या IFS में अपॉइंट हो जाता है, और उस सर्विस का मेंबर बना रहता है, तो प्रीलिमिनरी पास करने के बावजूद भी कैंडिडेट को CSE-2026 मेन एग्जाम में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
इतना ही नहीं अगर कोई कैंडिडेट Main Exam शुरू होने के बाद लेकिन रिजल्ट आने से पहले IAS या IFS में अपॉइंट हो जाता है, और उस सर्विस का मेंबर बना रहता है, तो ऐसे कैंडिडेट को CSE-2026 रिजल्ट के आधार पर किसी भी सर्विस या पोस्ट के लिए कंसीडर नहीं किया जाएगा.