संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रशासनिक सेवा 2025 के नतीजे शुक्रवार को जारी हुए हैं. इस बीच यूपीएससी रिजल्ट 2025 की 301वीं रैंक को लेकर विवाद खड़ा हो रहा है. दरअसल अलग-अलग राज्यों की दो महिलाओं ने इस रैंक पर दावा किया है. दोनों महिलाओ का नाम आकांक्षा सिंह है. ऐसे में इन दोनों आकांक्षा सिंह ने दावा किया है कि उन्होंने यूपीएससी एग्जाम में 301वीं रैंक हासिल की है. एक तरफ बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह है, जो प्रतिबंधित ‘रणवीर सेना' के संस्थापक ब्रह्मेश्वर सिंह की पोती हैं. आकांक्षा सिंह ने सबसे पहले दावा किया था कि उनकी रैंक 301 हैं. वहीं नतीजों के एक दिन बाद उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह नामक एक अन्य उम्मीदवार ने दावा किया है कि यह रैंक उनकी है.
शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए, ब्रह्मेश्वर सिंह की पोती आकांक्षा ने दावा किया कि उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक हासिल की है. उन्होंने कहा, “मुझे इस बार सफलता हासिल करने का पूरा भरोसा था. यह मेरे दादाजी का सपना था. उन्हें मुझ पर बहुत विश्वास था.” ब्रह्मेश्वर सिंह की 2012 में हत्या हो गई थी. आकांक्षा ने बताया कि तैयारी के दौरान वह रोजाना आठ से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं.
मेरी रैंक का गलत इस्तेमाल किया गया
इसी बीच, गाजीपुर की निवासी एक अन्य आकांक्षा सिंह ने फेसबुक पर फर्जी पहचान का आरोप लगाते हुए पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, “यह बात सामने आई है कि मेरी रैंक और पहचान का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है.” उन्होंने फेसबुक पोस्ट में दो दस्तावेज़ संलग्न किए, जिन्हें उन्होंने अपना असली पहचान पत्र और ई-समन बताया.
Ghazipur, UP | On appearing for UPSC CSE 2026, Dr Akanksha Singh says, "... I've completed my MBBS and Master's. I'm a gynaecologist. This was my second attempt. I secured a rank of 301 in the UPSC CSE 2025, and I've been feeling great ever since... I completed my MBBS from AIIMS Patna... I had no doubts about clearing the UPSC. I already know my rank and roll number. I had no doubts about this, and I'm relieved... The UPSC has already cleared it for us. That roll number is our identity; that's enough..."
एक वीडियो में गाजीपुर की आकांक्षा ने कहा, “मैं पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ हूं और फिलहाल पटना एम्स में काम रख रही हूं. मुझे पता चला है कि एक और लड़की 301वीं रैंक का दावा कर रही है. मेरे दादा जी का हाल ही में निधन हुआ है. ऐसे में हम लोग व्यस्त थे. इस बीच मेरे को पता चला कि मेरी रैंक का गलत इस्तेमाल हो रहा है.
गाजीपुर की आकांक्षा ने कहा, अगर दोनों प्रवेश पत्र पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन किया जाए तो मामला बिल्कुल साफ हो जाएगा. उसने दावा किया कि वह तीनों परीक्षाओं - प्रारंभिक, मुख्य और व्यक्तिगत साक्षात्कार - में एक भी अनुक्रमांक से उपस्थित हुई थी. उन्होंने आगे कहा, “मुझे इस बात का पूरा भरोसा है और मेरा नाम सूची में आया है.”
आखिर किसने हासिल की है रैंक 301
गाजीपुर की छात्रा की अपील के बाद, कई निजी चैनलों ने दोनों लड़कियों के प्रवेश पत्र पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन किया. क्यूआर कोड को स्कैन करके प्राप्त किए गए एडमिट कार्डों में, 301वीं रैंक से जुड़ा अनुक्रमांक कथित तौर पर गाजीपुर के उम्मीदवार के अनुक्रमांक से मेल खाता था, न कि आरा की लड़की के अनुक्रमांक से.
"सोमवार को UPSC के दफ्तर जाऊंगी"
इसी बीच मीडिया से बात करते हुए आरा की आकांक्षा सिंह ने कहा कि 856794 मेरा ही रोल नंबर है. मैंने इसी रोल नंबर के आधार पर परीक्षा दी है. अब इसके QR कोड में दूसरा रोल नंबर क्यों शो कर रहा है, इसकी जानकारी तो UPSC ही दे सकता है. मेरे पास इसकी जानकारी नहीं है. मैंने परीक्षा दी है, सभी फुटेज UPSC के पास है, वह जांच करा लें. मैंने अपने ई - समन लेटर के लिए UPSC को मेल भी किया है. लोग मेरे नाम को जानने लगे इसलिए दूसरी आकांक्षा ने मेरे रिजल्ट को अपना रिजल्ट बता दिया है. रविवार को दिल्ली जाऊंगी और सोमवार को UPSC के दफ्तर. उन्हें भरोसा है कि अंतिम रूप से परिणाम उनके पक्ष में आएगा.