उत्तर प्रदेश में परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों और 'पंडित' शब्द के इर्द-गिर्द छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अभी यूपी पुलिस उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में 'पंडित' शब्द को लेकर हुआ हंगामा शांत भी नहीं हुआ था कि अब बेसिक शिक्षा विभाग के एक पेपर ने नई चिंगारी सुलगा दी है. परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षा के दौरान कक्षा 7 के संस्कृत के पेपर में पूछे गए एक सवाल ने फिर से मामले को तूल दे दी है.
क्या है पूरा मामला?दरअसल, सोमवार से शुरू हुई परिषदीय विद्यालयों की एनुअल एग्जाम के तहत मंगलवार को कक्षा 7 की संस्कृत की परीक्षा थी. प्रश्न पत्र के पहले सवाल के पांचवें भाग में एक पहेली (प्रहेलिका) पूछी गई थी:
"वह कौन है जो बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है लेकिन पंडित नहीं है?"
विकल्प: बादल, पक्षी, वायु, पत्र.
हालांकि यह एक पारंपरिक संस्कृत पहेली का हिस्सा है, लेकिन जिस संदर्भ और समय में इसे पूछा गया, उसने विवाद खड़ा कर दिया. ब्राह्मण समाज और शिक्षक संघों का आरोप है कि यहां 'पंडित' शब्द का प्रयोग अपमानजनक तरीके से किया गया है.
जानबूझकर की गई गलती?
शिक्षक संघ का दावा है कि जिस 'प्रहेलिका' पाठ से यह प्रश्न पूछा गया, यह पहेली उस निर्धारित पाठ्यक्रम का हिस्सा ही नहीं है. आरोप लग रहे हैं कि पेपर सेटर ने जानबूझकर इस प्रश्न को शामिल किया ताकि एक विशेष वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा सके.
पहले भी हो चुका है हंगामा
आपको बता दें कि कुछ समय पहले यूपी पुलिस SI परीक्षा में 'अवसरवादी' शब्द के पर्यायवाची के रूप में 'पंडित' विकल्प दिया गया था. उस समय भी योगी सरकार के मंत्रियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था. अब दोबारा उसी शब्द पर विवाद होने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और पेपर सेटिंग प्रक्रिया सवालों के घेरे में है.