University Grant Commision यानी UGC के नए नियमों पर बवाल के बीच प्रदर्शन तेज हो रहे हैं. इसे देखते हुए यूजीसी के बाहर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं. कई छात्र और सवर्ण संगठनों ने 27 जनवरी को सुबह दस बजे से प्रदर्शन का ऐलान किया था, जिसे देखते हुए पुलिसबल और बाकी तमाम तरह की व्यवस्थाएं की जा रही हैं. वहीं इस मामले पर सरकार ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सही तथ्य छात्रों के सामने रखे जाएंगे. फिलहाल ये मामला देशभर में तेजी से फैल रहा है और तमाम संगठन यूजीसी से इस नए नियम को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.
UGC के नए नियम को लेकर प्रदर्शन
सामान्य वर्ग के छात्रों का आरोप है कि यूजीसी के ये नियम 'रिवर्स बायस' (उल्टा भेदभाव) पैदा कर सकते हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नियमों में झूठी शिकायतों के खिलाफ दंडात्मक प्रावधानों की कमी है, जिससे निर्दोष छात्रों या शिक्षकों को बिना साक्ष्य के टारगेट किया जा सकता है. आरोप है कि ये नियम केवल SC, ST और OBC छात्रों को सुरक्षा देते हैं, जबकि सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों के लिए भेदभाव के खिलाफ कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है.
सर्विलांस कल्चर बता रहे हैं लोग
विश्वविद्यालयों में 'इक्विटी स्क्वॉड' (Equity Squads) और निगरानी तंत्र की स्थापना को कुछ शिक्षाविद 'सर्विलांस कल्चर' के रूप में देख रहे हैं, जो शैक्षणिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती है. आरोप है कि ये नियम अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) का उल्लंघन करते हैं, क्योंकि इसमें सभी वर्गों का समान प्रतिनिधित्व नहीं है.
देशभर में प्रदर्शन का कॉल
यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन का कॉल दिया जा रहा है, तमाम हिंदू संगठन और छात्र संगठन सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं. सरकार से मांग की जा रही है कि वो यूजीसी के इस एकतरफा फरमान को तुरंत वापस ले. कुछ लोग इसे काला कानून तक कहने लगे हैं.
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