UGC NET Result: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को आदेश दिया है कि वह इतिहास (History) विषय के विवादित सवालों की जांच के लिए विशेषज्ञों (Experts) की एक कमेटी बनाए.आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
दरअसल, दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच हुई UGC NET की परीक्षा में इतिहास के पेपर को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है. छात्रों का आरोप है कि परीक्षा में पूछे गए 9 सवाल और 2 Translation पूरी तरह गलत थे. जब NTA ने 14 जनवरी को आंसर की (Answer Key) जारी की, तो छात्रों ने सबूतों के साथ आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन 4 फरवरी को आए फाइनल रिजल्ट में कोई सुधार नहीं किया गया.
इसी को लेकर कार्तिकेय कहोल नाम के एक छात्र ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. छात्र का कहना था कि वह सिर्फ 2 नंबरों से JRF (Junior Research Fellowship) से चूक गया, जबकि NTA के Options गलत थे.
कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कुछ सवालों के ऑप्शन्स इतने मिलते-जुलते थे कि छात्र भ्रमित हो गए. अदालत ने कार्तिकेय को 2 नंबर देने का आदेश दिया, जिससे अब वह JRF के लिए क्वालीफाई कर गया है. इसी के साथ कोर्ट ने NTA को सख्त निर्देश दिए हैं कि
- अगले 4 हफ्तों के भीतर एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई जाए.
- यह कमेटी छात्रों की शिकायतों को दोबारा सुने.
- अगले 4 हफ्तों के अंदर ही इस पर फैसला लिया जाए.
इस विवाद का असर सिर्फ एक छात्र पर नहीं, बल्कि उन 60,777 उम्मीदवारों पर पड़ सकता है, जिन्होंने इतिहास का पेपर दिया था. मिहिर बायन और अभिषेक यादव जैसे कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने सतीश चंद्र और उपिंदर सिंह जैसी नामी लेखकों की किताबों के रेफरेंस दिए, फिर भी NTA ने उनकी बात नहीं मानी.
छात्रों का यह भी आरोप है कि हर सवाल को चैलेंज करने के लिए 200 रुपये लिए जाते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स उन आपत्तियों को कैसे देखते हैं, इसमें कोई पारदर्शिता (Transparency) नहीं है.