संघर्ष और मेहनत लाई रंग, पोते ने दादा का सपना पूरा कर हासिल की असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी

बिहार के सूरज कुमार ने अपने दादा का सपना पूरा किया है. सूरज कुमार के दादा चाहते थे कि उनका पोता असिस्टेंट प्रोफेसर बने. सूरज ने दिन रात मेहनत की और दादा जी के सपने को पूरा करके दिखाया है. बीएसयूएससी ने हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती निकाली थी. सूरज कुमार का राजनीति विज्ञान विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर पोस्ट के लिए चयन हुआ है.

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सूरज ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, चाचा-चाची और गुरुजनों को दिया है.

Bihar Assistant Professor Recruitment Result 2026 : सपने तब और खास हो जाते हैं, जब वे सिर्फ अपने नहीं बल्कि परिवार की पीढ़ियों की उम्मीदों से जुड़े हों. ऐसा ही सपना बिहार के नवादा जिले के वारिसलीगंज के मकनपुर गांव निवासी राम रतन प्रसाद सिंह 'रत्नाकर' का था, जिसे उनके पोते सूरज कुमार ने साकार कर दिखाया है. बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (बीएसयूएससी) ने 211 नए डिग्री कॉलेज में कॉन्ट्रैक्ट बेस असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति का रिजल्ट जारी किया है. सूरज कुमार का राजनीति विज्ञान विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर पोस्ट के लिए चयन हुआ है. रिजल्ट के अनुसार राजनीति विज्ञान में कुल 422 उम्मीदवारों का चयन किया गया है. सामान्य (अनारक्षित) वर्ग में इस विषय का कटऑफ 79.2 अंक रहा, जो हिंदी (81.3) के बाद दूसरा सबसे अधिक कटऑफ है. 

सफर रहा शानदार

सूरज कुमार की प्रारंभिक शिक्षा विवेकानंद पब्लिक स्कूल, वारिसलीगंज से हुई है. इसके बाद उन्होंने इंटरमीडिएट की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय, इलाहाबाद से पूरी की. स्नातक की डिग्री दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज से प्राप्त की, जबकि स्नातकोत्तर की पढ़ाई इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से पूरी की. अपने शैक्षणिक जीवन में उन्होंने लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए हर बार पहले स्थान हासिल किया.

साहित्यकार दादा से मिली प्रेरणा

सूरज के पिता सुजीत कुमार, वारिसलीगंज के स्थानीय पत्रकार हैं, जबकि उनकी माता स्वर्णलता कुमारी गृहिणी हैं. उनके दादा स्व. राम रतन प्रसाद सिंह 'रत्नाकर' हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकार थे. पिछले वर्ष उनका निधन हो गया था.

सूरज बताते हैं कि उनके दादा हमेशा चाहते थे कि वह कॉलेज में प्रोफेसर बनें. वे लगातार उन्हें उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित करते थे. दादा के निधन के बाद भी उन्होंने उनके सपने को अपनी प्रेरणा बनाए रखा. अब सहायक प्राध्यापक बनने के बाद उन्हें यह संतोष है कि वे अपने दादा की अंतिम इच्छा को पूरा कर सके. सूरज ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, चाचा-चाची और गुरुजनों को दिया. उन्होंने कहा कि परिवार के सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उन्हें अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने की प्रेरणा दी, जिसके परिणामस्वरूप यह सफलता मिली.

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छोटा भाई सुप्रीम कोर्ट में कर रहा वकालत

सूरज के छोटे भाई चाणक्य ने चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू), पटना से विधि की पढ़ाई पूरी की है. वर्तमान में वह दिल्ली के एक प्रतिष्ठित लॉ फोरम से जुड़े हैं और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. परिवार के दोनों बेटों की उपलब्धि से परिजनों में खुशी का माहौल है.

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