छोटे गांव के दशरथ ने किया बड़ा कमाल, JEE Mains में 99.62 पर्सेंटाइल से जिले में टॉप

दशरथ के पिता रावताराम राजस्थान पुलिस में इंस्पेक्टर हैं. रिजल्ट आने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है. गांव के लोग बधाई देने पहुंच रहे हैं. उनके कोचिंग संस्थान में भी उन्हें पगड़ी पहनाकर, माला डालकर और मिठाई खिलाकर सम्मानित किया गया.

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EE Mains Session 1 की परीक्षा 21 जनवरी से 29 जनवरी तक कंप्यूटर बेस्ड मोड में आयोजित हुई थी.

JEE Mains Toppers 2026 : राजस्थान के बाड़मेर जिले के भुर्तिया गांव का नाम इस समय चर्चा में है. इसी गांव के रहने वाले दशरथ चौधरी ने JEE Mains Session 1 में 99.62 पर्सेंटाइल हासिल कर अपने जिले में टॉप किया है. छोटे से गांव में रहकर हासिल की गई यह उपलब्धि सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे गांव के लिए गर्व का क्षण बताया जा रहा है. दशरथ पिछले दो साल से ज्यादा समय से लगातार तैयारी कर रहे थे. उन्होंने पहले ही प्रयास में BE और BTech पेपर में यह स्कोर हासिल किया.

उनका कहना है कि यह सफलता नियमित मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य का परिणाम है. अब उनका पूरा ध्यान JEE Advanced पर है, जो IIT और अन्य प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले का अगला चरण है. उन्होंने भरोसा जताया कि वह Advanced भी पास करेंगे और इंजीनियर बनने का सपना पूरा करेंगे.

दशरथ के पिता रावताराम राजस्थान पुलिस में इंस्पेक्टर हैं. रिजल्ट आने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है. गांव के लोग बधाई देने पहुंच रहे हैं. उनके कोचिंग संस्थान में भी उन्हें पगड़ी पहनाकर, माला डालकर और मिठाई खिलाकर सम्मानित किया गया.

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12 छात्रों ने हासिल किया 100 पर्सेंटाइल 

JEE Mains Session 1 की परीक्षा 21 जनवरी से 29 जनवरी तक कंप्यूटर बेस्ड मोड में आयोजित हुई थी. हर दिन दो शिफ्ट में परीक्षा हुई. सुबह 9 से 12 और दोपहर 3 से 6 बजे तक पेपर आयोजित हुआ. BE और BTech की परीक्षा 21 से 28 जनवरी के बीच कराई गई. छात्रों और शिक्षकों ने पेपर का स्तर कुल मिलाकर मध्यम बताया, हालांकि अलग-अलग शिफ्ट में कुछ अंतर रहा. इस बार देशभर में 12 अभ्यर्थियों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किए. हाई स्कोर करने वाले छात्रों की सूची में दशरथ का नाम भी शामिल है.

पूरे गांव का नाम किया रोशन

छोटे से गांव में रहकर टॉप करने वाले दशरथ ने न केवल खुद के सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ा दिया है, बल्कि वह गांव के सैकड़ों बच्चों के लिए भी प्रेरणा बनकर उभरे हैं. संदेश साफ है कि छोटे गांवों, कस्बों और शहरों के बच्चे भी मेट्रो सिटीज के बच्चों से किसी तरह से कम नहीं हैं. दशरथ की सफलता यह संदेश भी देती है कि छोटे गांवों, कस्बों और साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चे भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकते हैं. संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन मेहनत और दिशा साफ हो तो रास्ता बन ही जाता है.

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