NEET PG 2025: नीट पीजी 2025 (NEET PG 2025) की काउंसलिंग का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है. केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBEMS) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कट-ऑफ घटाकर 'जीरो पर्सेंटाइल' करने से करीब 1 लाख नए उम्मीदवार काउंसलिंग के लिए एलिजिबल हो गए हैं. अब इस पूरे मामले पर 23 फरवरी को अगली सुनवाई होनी है.आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
क्या है नीट पीजी 2025 काउंसलिंग मामला
दरअसल, सरकार ने नीट पीजी 2025 के लिए क्वालीफाइंग कट-ऑफ को घटाकर जीरो पर्सेंटाइल कर दिया था. यानी जिन डॉक्टरों ने परीक्षा दी थी और जिनके नंबर बेहद कम या जीरो थे, वे भी अब पीजी सीटों के लिए काउंसलिंग में हिस्सा ले सकते हैं. सरकार के इस फैसले के खिलाफ कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उनका कहना है कि कट-ऑफ इतना कम करने से मेडिकल एजुकेशन लेवल और हेल्थ सिस्टम पर बुरा असर पड़ सकता है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच इस मामले को देख रही है. बोर्ड (NBEMS) ने अदालत में अपना हलफनामा जमा किया है. बोर्ड का कहना है कि कट-ऑफ कम करने का फैसला बिल्कुल सही है और इससे काउंसलिंग में उम्मीदवारों का दायरा बढ़ा है. बोर्ड ने साफ तौर पर कहा कि पहले के नियमों के हिसाब से 1,28,116 उम्मीदवार ही योग्य थे. लेकिन कट-ऑफ घटाने के बाद अब कुल 2,24,029 उम्मीदवार योग्य हो गए हैं. यानी सीधे-सीधे 95,913 नए डॉक्टर अब स्पेशलाइजेशन की सीटों के लिए लाइन में हैं.
दिल्ली हाई कोर्ट ने दी थी क्लीन चिटआपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट आने से पहले यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट भी गया था. वहां 'संचित सेठ बनाम NBEMS' मामले में कोर्ट ने 21 जनवरी 2026 को अपना फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट ने कहा था कि कट-ऑफ घटाने से पब्लिक हेल्थ को कोई खतरा नहीं है. कोर्ट का मानना था कि पीजी की सीटें खाली न रह जाएं, इसलिए यह कदम उठाना जरूरी था और इसमें कुछ भी गलत नहीं है. अब इसी फैसले को आधार बनाकर बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रख रहा है.
किस कैटेगरी में कितने बढ़े उम्मीदवार?
| कैटेगरी | कुल उम्मीदवार | पहले कितने पास थे | अब कितने पास हैं | कितने नए जुड़े |
| जनरल (General) | 1,07,990 | 59,996 | 1,01,914 | + 41,918 |
| ओबीसी (OBC) | 81,721 | 49,049 | 81,713 | + 32,664 |
| एससी (SC) | 28,100 | 14,390 | 28,100 | + 13,710 |
| एसटी (ST) | 12,303 | 4,681 | 12,302 | + 7,621 |
| कुल योग | 2,30,114 | 1,28,116 | 2,24,029 | + 95,913 |
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अगर जीरो नंबर या जीरो पर्सेंटाइल वाले डॉक्टर भी स्पेशलिस्ट बनेंगे, तो इससे इलाज की क्वालिटी गिर सकती है. उन्होंने इसे 'योग्यता के साथ समझौता' बताया है. जिसपर बोर्ड का कहना है कि सिर्फ काउंसलिंग के लिए योग्य होने का मतलब यह नहीं है कि सबको सीट मिल जाएगी. सीट तो मेरिट के आधार पर ही मिलेगी, लेकिन इससे सीटें खाली रहने की समस्या खत्म होगी.
अब आगे क्या होगा?एडवोकेट सत्यम सिंह राजपूत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से इस मामले को जल्द सुनने की अपील की थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अब 23 फरवरी 2026 की तारीख तय की है.