- नीट पेपर लीक मामले में जयपुर और हरियाणा के सिंडिकेट ने 10 से 15 लाख रुपये में पेपर बेचे थे
- सीबीआई ने देश के कई राज्यों में जांच शुरू कर दी है और जयपुर में चौबीस संदिग्धों से पूछताछ कर रही है
- गुरुग्राम के डॉक्टर से लेकर मांगीलाल और दिनेश बिवाल ने 25 से 30 लाख रुपए में नीट का लीक पेपर खरीदा था
नीट पेपर लीक की वजह से करीब 23 लाख बच्चे परेशान हैं. दिन रात एक करके एग्जाम दिया वो भी कुछ धांधलीबाजों की वजह से कैंसिल हो गया.इसकी वजह से वह टूट गए हैं. अब बच्चों को फिर से एग्जाम देना होगा. इस बीच सवाल यह है कि पेपर लीक का ये काला खेल आखिर शुरू कहां से हुआ और पेपर बिका कितने में और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं, इन पर क्या एक्शन लिया जा रहा है?
कितने में बेचा गया NEET का लीक पेपर?
नीट पेपर लीक मामले में 'मनी ट्रेल' का खुलासा हुआ है. जानकारी के मुताबिक, जांच में पता चला है कि जयपुर और हरियाणा के सिंडिकेट ने 10 से 15 लाख रुपये में पेपर बेचे थे, जिसके पुख्ता सबूत अब CBI के पास हैं. SOG ने इन पैसों के लेन-देन (Money Trail) के पुख्ता डिजिटल और दस्तावेजी सबूत CBI के साथ शेयर किए हैं.CBI ने देश के उन तमाम राज्यों में जांच शुरू कर दी है जहा भी NEET पेपर लीक के तार जुड़े पाए गए है. उन सभी राज्यों में सीबीआई की टीम जांच करने के लिए पहुंच गई है.
24 संदिग्धों से CBI कर रही पूछताछ
नीट पेपर लीक मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एक्शन शुरू कर दिया है. मंगलवार रात करीब 8 बजे CBI की एक विशेष टीम जयपुर के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) के मुख्यालय पहुंची और औपचारिक रूप से जांच की कमान अपने हाथ में ले ली. इस मामले में जयपुर में 24 संदिग्धों से CBI पूछताछ कर रही है. दरअसल SOG ने दो दर्जन से ज्यादा संदिग्धों को CBI को सौंपा है, जिनसे देर रात तक पूछताछ हुई.
25 से 30 लाख रुपए में खरीदा NEET का पेपर, 800 छात्रों को बेचा
गुरुग्राम के एक डॉक्टर से जमवारामगढ़ के रहने वाले मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल ने 25 से 30 लाख रुपए में NEET का पेपर खरीदा था. इसके बाद दिनेश बिवाल ने पेपर सीकर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे अपने बेटे को दिया. दावा किया जा रहा है कि 29 अप्रैल को यही पेपर कई अन्य छात्रों और अभिभावकों तक भी पहुंचाया गया था. देहरादून से गिरफ्तार किए गए आरोपी राकेश कुमार मंडवारिया पर आरोप लगा है कि उसने करीब 800 छात्रों तक नीट का ये लीक पेपर पहुंचाया था.
पेपर लीक मामले में 150 लोग संदिग्ध
NEET पेपर लीक जांच में 20 संदिग्धों पर जांच एजेंसियों की नजर है. इन संदिग्धों की तरफ जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है. इन संदिग्धों से जांच एजेंसियों ने पूछताछ भी शुरू कर दी है. नीट पेपर लीक मामले में 150 लोगों को संदिग्ध माना गया है.
400 से ज्यादा सवालों के बीच छिपाए गए असली सवाल
जांच में पता चला है कि माफिया ने असली पेपर को सीधे बेचने के बजाय 'गेस पेपर' का नाम दिया था. इस गेस पेपर में 400 से ज्यादा सवाल थे, लेकिन उनके भीतर 3 मई के एग्जाम के बायोलॉजी के सभी 90 और केमिस्ट्री के 45 असली सवाल छिपे थे. सिंडिकेट ने छात्रों से कहा था कि सिर्फ इन सवालों को रटने से उनका काम पक्का बन जाएगा.
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कैसे फूटा पेपर लीका भांडा?
SOG के मुताबिक, सिंडिकेट शुरू में इस बात को गुप्त रखना चाहता था, लेकिन ज्यादा पैसा कमाने के लालच उसे ले डूबा. ज्यादा पैसे के लालच में जयपुर के संदिग्धों ने इसे नेटवर्क के बाहर भी बेचना शुरू कर दिया. इसी लापरवाही की वजह से पेपर लीक की खबर लीक हो गई.
कब हुआ NEET का एग्जाम, कैसे हुआ कैंसिल?
मेडिकल कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट (स्नातक)-2026 3 मई को आयोजित की गई थी. मंगलवार को पेपर लीक के आरोपों के बीच एग्जाम रद्द कर दिया गया. सरकार ने सीबीआई को अनियमितताओं की जांच का निर्देश दिया है.
इस बीच, पुलिस अधिकारी का कहना है कि कथित पेपर लीक का कनेक्शन मध्य महाराष्ट्र के लातूर से भी हो सकता है, जहां एग्जाम में शामिल हुए एक छात्र के अभिभावक ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में कहा गया था कि लातूर के एक निजी कोचिंग संस्थान ने कथित तौर पर नीट (यूजी)-2026 के आयोजन से पहले अपने छात्रों के लिए एक मॉक टेस्ट आयोजित किया था. चौंकाने वाली बात यह है कि मॉक टेस्ट के 42 प्रश्न कथित तौर पर वास्तविक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से हूबहू मेल खाते थे.