NEET-JEE Preparation after 10th Result: राजस्थान-बिहार जैसे स्टेट के बोर्ड्स रिजल्ट्स अब आने शुरू हो गए हैं. जल्द ही यूपी, CBSE और ICSE के रिजल्ट भी जारी कर दिए जाएंगे. रिजल्ट की खुशी के बीच एक बड़ा सवाल हर स्टूडेंट और उनके पेरेंट के सामने है कि अब आगे क्या. अगर आपका सपना डॉक्टर या इंजीनियर बनने का है, तो यहीं से असली दौड़ शुरू हो जाती है. NEET और JEE जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यह 'ट्रांजिशन पीरियड' माना जाता है. अक्सर छात्र जोश में आकर शुरुआत तो कर देते हैं, लेकिन सही गाइडेंस और प्लानिंग की कमी उन्हें कुछ ही महीनों में थका देती है.
इन एग्जाम्स को क्रैक करने के लिए सिर्फ ज्यादा पढ़ना काफी नहीं, बल्कि सही स्ट्रैटजी, कंसिस्टेंसी और स्मार्ट स्टडी जरूरी है. तो अगर आप या आपके बच्चे 10वीं के बाद NEET-JEE की तैयारी शुरू करने जा रहे हैं, तो जानिए वो 10 जरूरी टिप्स, जो बेहद काम आ सकते हैं.
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सबसे पहले खुद से पूछें कि आप डॉक्टर या इंजीनियर क्यों बनना चाहते हैं. क्या यह आपका सपना है या सिर्फ पड़ोसी या रिश्तेदारों के देखा-देखी लिया गया फैसला. जब मकसद अपना होता है, तो पढ़ाई बोझ नहीं लगती है.
यह सबसे जरूरी बात है, क्योंकि इस पर आपका पूरा करियर टिका होता है. 10वीं की साइंस एक छोटी झील जैसी है, तो 11वीं का सिलेबस एक बड़ा समंदर होता है. अचानक से पढ़ाई का लेवल बढ़ेगा, इसलिए घबराएं नहीं. खुद को सेटल होने के लिए 1-2 महीने का समय दें.
3. NCERT को प्रोयरिटी देंएक्सपर्ट्स के अनुसार, चाहे आप कितनी भी भारी-भरकम किताबें खरीद लें, लेकिन NEET और JEE का रास्ता NCERT की गलियों से ही होकर गुजरता है. हर लाइन, हर डायग्राम और हर टेबल को ऐसे समझें कि सोते हुए भी कोई पूछे तो आप बता सकें.
कोचिंग के सिर्फ नाम पर नहीं, उसके टीचर्स और 'डाउट सॉल्विंग सिस्टम' पर जाएं. अगर आपको घर से दूर जाने में दिक्कत है, तो आज के दौर में बेहतरीन ऑनलाइन ऑप्शन भी मौजूद हैं. अपनी और अपने बच्चे की सुविधा देखें. भीड़ को देखकर कोई फैसला न लें.
5. टाइम-टेबल नहीं, डेली टारगेट बनाएंएक्सपर्ट्स कहते हैं कि अक्सर छात्र 10-10 घंटे का टाइम-टेबल बनाते हैं, जो दो दिन भी नहीं टिकता. इसकी जगह 'डेली टारगेट्स' तय करें. जैसे, 'आज मुझे फिजिक्स के 20 सवाल हल करने हैं.' टारगेट पूरा होने की खुशी आपको अगले दिन के लिए मोटिवेट करेगी.
नीट वालों को लगता है कि बायो ले ली तो मैथ्स से पीछा छूट गया, लेकिन फिजिक्स बिना मैथ्स के नहीं चलेगी. शुरुआत के दिनों में बेसिक कैलकुलेशन, ग्राफ और फॉर्मूलों पर मेहनत करें. नींव मजबूत होगी तो बिल्डिंग शानदार बनेगी.
7. खुद के नोट्स बनाने की हैबिट
क्लास में जो पढ़ाया जाए, उसे अपने शब्दों में लिखें. दूसरों के नोट्स से पढ़ना दूसरे का चश्मा लगाने जैसा है, सब धुंधला दिखेगा. खुद के बनाए शॉर्ट नोट्स एग्जाम के आखिरी दिनों में आपके सबसे बड़े दोस्त साबित होंगे.
8. सोशल मीडिया से थोड़ा ब्रेकअप
इंस्टाग्राम रील्स और फेसबुक वीडियोज आपका सेलेक्शन नहीं कराएंगे. तैयारी के इन दो सालों में फोन का इस्तेमाल सिर्फ पढ़ाई के लिए करें. नोटिफिकेशन बंद रखें, वरना एक रील देखने के चक्कर में एक घंटा कब निकल जाएगा, पता भी नहीं चलेगा.
9. पेरेंट्स सपोर्ट सिस्टम बनें, प्रेशर देने वाले नहीं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों के डॉक्टर-इंजीनियर बनने में पेरेंट्स का रोल भी बेहद अहम होता है. बच्चे पर नंबरों का बेवजह दबाव न डालें. यह समय उनके लिए भी कठिन है. उनसे बात करें, उनकी थकान समझें और उन्हें भरोसा दिलाएं कि आप उनके साथ हैं. आपका छोटा-सा मोटिवेशन उनका हौसला दोगुना कर सकता है.
10. सेहत सबसे पहले
नींद पूरी लें और घर का खाना खाएं. अगर शरीर साथ नहीं देगा, तो दिमाग भी जवाब दे जाएगा. दिन में कम से कम 7 घंटे की नींद और थोड़ा टहलना या योग जरूर रखें, ताकि स्ट्रेस हावी न हो.