'मुझे पीटा और कहा- इसके अंदर से सारी क्रांति निकालो', छात्रसंघ बहाली के लिए अनशन के बीच जामिया ने बनाई कमेटी
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 12 अक्टूबर से स्टूडेंट यूनियन बहाली के लिए हंगर स्ट्राइक चल रही है. छात्र जासिम ख़ां ने प्रॉक्टर टीम पर लात मारने और घसीटने का आरोप लगाया. प्रशासन ने कई छात्रों के ख़िलाफ़ एक्शन भी लिया है.
"हमारे पेट, सर और पैरों पर लातें मारीं गईं. प्रॉक्टर की टीम ने हम भूखे-प्यासे प्रदर्शनकारी छात्रों को घसीटा, मैनहैंडलिंग की. 17 अक्टूबर की सुबह जामिया प्रशासन ने हमारे साथ बर्बरता की. उस वक़्त मैं बेहोश था. यह सब सिक्योरिटी एडवाइज़र की सलाह पर हो रहा था. सिक्योरिटी एडवाइज़र ने मुझे गाली देते हुए गार्ड से कहा कि इसके अंदर से सारी क्रांति निकालो और बाहर फेंक कर आओ." ये कहना है जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इंटरनेशनल स्टडीज़ डिपार्टमेंट में पीजी के छात्र मोहम्मद जासिम ख़ां का. वे अपने चार अन्य साथियों को लेकर स्टूडेंट यूनियन की बहाली की मांग करते हुए कैंपस में हंगर स्ट्राइक पर बैठे हैं.

17 अक्टूबर की सुबह प्रदर्शनकारी छात्रों को घसीटकर बाहर निकालते सिक्योरिटी गार्ड्स
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हंगर स्ट्राइक पर बैठे छात्र जासिम अली ख़ां
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ओखला में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के छात्र 12 अक्टूबर से स्टूडेंट यूनियन की बहाली की मांग करते हुए हंगर स्ट्राइक पर बैठे हैं. इनमें इंटरनेशनल स्टडीज़ के पीजी के छात्र मोहम्मद जासिम ख़ां और फैकल्टी ऑफ़ लॉ में बीए एलएलबी छात्र एबिन बासिल पिछले सात दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. वहीं, सोशल वर्क में एमए छात्र रेहान हैदर, भूगोल विभाग में बीए छात्र रेहान ख़ान और जेंडर स्टडीज़ में एमए फर्स्ट ईयर के छात्र फ़ैज़ान अली ख़ान पिछले चार दिनों से हंगर स्ट्राइक पर हैं.

जामिया के छात्र 'गुलिस्तान-ए-ग़ालिब' गार्डेन में प्रदर्शन कर रहे हैं.
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने एबिन बासिल पर एक साल का कैंपस बैन, जासिम ख़ां और रेहान हैदर पर 6 महीने का कैंपस बैन लगा दिया है. वहीं, प्रदर्शनकारी छात्र रेहान ख़ान को नोटिस थमाया जा चुका है.
'20 साल से तानाशाही रवैया...'
साल 2006 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के स्टूडेंट यूनियन को भंग कर दिया गया था. प्रदर्शनकारी छात्र रेहान ख़ान कहते हैं, "पिछले 20 साल से स्टूडेंट्स पर जामिया प्रशासन का तानाशाही रवैया जारी है. हर तरह के प्रोटेस्ट को दबाने की कोशिश की जाती है. प्रशासन चाहता है कि कैंपस में किसी भी तरह का प्रोटेस्ट न हो, यही वजह है कि वो स्टूडेंट यूनियन को बहाल नहीं करना चाहते. जब तक जामिया प्रशासन हमें हमारा हक़ नहीं दे देता, हम अपनी हंगर स्ट्राइक जारी रखेंगे."

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हंगर स्ट्राइक कर रहे छात्रों की क्या मांगें हैं?
- जामिया मिल्लिया इस्लामिया का छात्र संघ (JMISU) बहाल किया जाए.
- चीफ प्रॉक्टर असद मलिक का इस्तीफ़ा हो.
- छात्रों पर जो भी एक्शन हुए हैं, उन्हें रद्द किया जाए.

यूनिवर्सिटी के गेट नंबर 7 और 10 के आस-पास सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.
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17 अक्टूबर की सुबह क्या हुआ?
शनिवार, 17 अक्टूबर की सुबह तड़के कैंपस में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सुरक्षाकर्मियों ने कथित तौर पर मारपीट की. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया, जिसके बाद कैंपस में तनाव बढ़ गया. जिस दिन यह घटना हुई, यह छात्रों की भूख हड़ताल का पांचवा दिन था. उन्हें कथित तौर पर घसीटकर कैंपस के गेट नंबर 7 के पास स्थित 'गुलिस्तान-ए-ग़ालिब' गार्डेन से बाहर किया गया.
जामिया छात्रों के मुताबिक़, सुबह क़रीब 5:30 बजे चीफ़ प्रॉक्टर और सिक्योरिटी एडवाइज़र के साथ क़रीब 60 सुरक्षा गार्ड प्रोटेस्ट साइट पर पहुंचे. उन्होंने छात्रों के बिस्तर और तिरपाल को बिखेरा और प्रदर्शनकारी छात्रों को जबरन वहां से हटा दिया गया.

छात्रों को कैंपस से निकालते वक़्त भारी सुरक्षा तैनात थी.
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छात्र रेहान ख़ान कहते हैं कि एक छात्र को पांच गार्ड पकड़कर कैंपस के बाहर फेंक रहे थे और बाहर पुलिस की गाड़ी लगी थी, जिसमें लोगों को डिटेन किया जा रहा था. उनका मक़सद था कि प्रोटेस्ट साइट को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया जाए.
रेहान हैदर कहते हैं कि पहले हमारी एक ही मांग थी कि छात्रसंघ बहाल किया जाए. 17 अक्टूबर की बर्बरता के बाद हमारी मांग बढ़ गई है.
'छात्रों को लोकतांत्रिक अधिकार से नहीं रोका जाना चाहिए...'
हंगर स्ट्राइक कर रहे छात्र एबिन बासिल NDTV.in के साथ बातचीत में कहते हैं, "हमारी मांग बहुत साफ़ है कि स्टूडेंट यूनियन को बहाल किया जाए और यूनिवर्सिटी में चुनाव करवाया जाए. यह बहुत ही बेसिक डिमांड है, जो हमारा डेमोक्रेटिक अधिकार है. जो छात्र हिंदुस्तान का भविष्य हैं, उन्हें डेमोक्रेटिक प्रैक्टिस से नहीं रोका जाना चाहिए."
एबिन आगे कहते हैं कि यह ऐसी यूनिवर्सिटी है, जिसकी स्थापना असहयोग आंदोलन और ख़िलाफत मूवमेंट के वक़्त हुई थी. इसको खड़ा करने में महात्मा गांधी, मौलाना मोहम्मद अली जौहर, हाकिम अजमल ख़ान सहित कई बड़े लोगों का योगदान है. आज इस कैंपस की यह हालत है कि छात्र अपनी डेमोक्रेटिक प्रैक्टिस नहीं पा रहे हैं, शांतिपूर्ण प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं.

रविवार शाम चार बजे प्रदर्शनकारी छात्रों ने गेट नंबर 7 के पास प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मीडिया के सामने अपनी बात रखी.
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छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने रविवार को 'सुरक्षा चिंताओं' का हवाला देते हुए डॉ. ज़ाकिर हुसैन लाइब्रेरी और ओल्ड लाइब्रेरी को बंद कर दिया.
विश्वविद्यालय के लाइब्रेरियन द्वारा 17 अक्टूबर की तारीख़ के साइन के साथ जारी किए गए एक नोटिस में कहा गया, “सूचित किया जाता है कि यूनिवर्सिटी कैंपस में सुरक्षा संबंधी चिंताओं की वजह से डॉ. ज़ाकिर हुसैन लाइब्रेरी और ओल्ड लाइब्रेरी रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को बंद रहेंगी.”

लाइब्रेरी बंद किए जाने से जुड़ा नोटिस.
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छात्र जासिम ख़ां कहते हैं, "बिना किसी वजह के लाइब्रेरी बंद कर दी गई, सैकड़ों स्टूडेंट्स को परेशानी हुई. अगर हमारे पास छात्रसंघ होगा, तो हमें इस तरह की दिक़्क़तों का सामना नहीं करना पड़ेगा. हमारे पास रिप्रेजेंटेशन होगा. हम यूनिवर्सिटी प्रशासन के मनमाने फैसलों के ख़िलाफ़ लड़ पाएंगे."
'2022 से देख रही हूं प्रशासन का रवैया...'
फैकल्टी ऑफ़ इंजीनियरिंग की पीएचडी स्कॉलर और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की पूर्व सेक्रेटरी सनम हुसैन कहती हैं, "जामिया प्रशासन का बुरा रवैया छात्रों के प्रति कोई नया नहीं है. मैं साल 2022 से देख रही हूं. एडमिन में न जाने किस बात की डर है. जैसे ही कोई छात्र अपनी आवाज़ उठाता है, उस पर एक्शन हो जाता है. लेकिन जामिया के छात्र इतने दिलेर हैं कि वे झुकते नहीं हैं."
वे आगे कहती हैं कि छात्रसंघ को बहाल किया जाना चाहिए. दिल्ली के ज़्यादातर विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ है, जामिया में क्यों नहीं है?

प्रोटेस्ट के चलते जामिया के गेट के आस-पास सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है.
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जामिया में भी दिखा 'जंतर-मंतर' का असर...
जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रोटेस्ट के वक़्त खाना बांटने के बाद मशहूर हुए मोहम्मद जुनैद भी जामिया छात्रों का समर्थन करने कैंपस आए. इस दौरान उन्होंने NDTV.in के साथ बातचीत की. मोहम्मद जुनैद कहते हैं, "जामिया छात्रों की हंगर स्ट्राइक कोई नाजायज़ मांग के लिए नहीं है. इनकी मांग बिल्कुल दुरुस्त है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया देश की सेंट्रल यूनिवर्सिटी है. केंद्रीय विश्वविद्यालयों में चुनाव होते हैं, लेकिन यहां पर चुनाव नहीं होते हैं. यहां पर पिछले दो दशक से तानाशाही रवैया चल रहा है और छात्रसंघ चुनाव नहीं हो रहा है."

जामिया छात्रों के समर्थन में कैंपस पहुंचे मोहम्मद जुनैद
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- मोहम्मद जुनैद
जामिया का इतिहास पता करिए: NSUI चीफ़ विनोद जाखड़
जामिया छात्रों के प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ भी 18 अक्टूबर की शाम कैंपस पहुंचे. इस दौरान उन्होंने हंगर स्ट्राइक करने वाले छात्रों का हौंसला बढ़ाने के लिए उर्दू शायर शहीर मछलीशहरी के शेर के साथ अपनी स्पीच की शुरुआत की.
"फ़ानूस बन के जिस की हिफ़ाज़त हवा करे
वो शम्अ' क्या बुझे जिसे रौशन ख़ुदा करे"

NSUI के चीफ विनोद जाखड़ ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में नारेबाजी की.
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प्रदर्शनकारी छात्रों को संबोधित करते हुए विनोद जाखड़ ने यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफ़ेसर मज़हर आसिफ़ पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "आप क्या समझते हो कि छात्र कमज़ोर हैं? जामिया का इतिहास पता करिए, जब-जब इस देश में आंदोलन हुए हैं, अग्रिम पंक्ति खड़े होकर जामिया ने लड़ा है. जामिया से हमेशा तिरंगा पकड़कर मोहब्बत का पैग़ाम दिया गया है. ये वो ताक़त है, जो आवाज़ दे रही है कि हमें नेतृत्व करने का अधिकार है."
स्वतंत्रता सेनानी अशफ़ाक़उल्लाह ख़ान से, हंगर स्ट्राइक पर बैठे छात्रों की तुलना करते हुए विनोद जाखड़ ने आगे कहा, "जामिया में पैदा होने वाला नेतृत्व विधानसभा और देश की संसद में जाकर ग़रीबों, मज़लूमों, महिलाओं और छात्रों की आवाज़ बनेगा. उन अल्पसंख्यकों की आवाज़ बनेगा, जिनकी धर्म के नाम पर मॉब लिंचिंग होती है."

प्रदर्शनकारी छात्र जगह-जगह मांगों से जुड़े पोस्टर चिपकाए हैं.
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जामिया प्रशासन का क्या कहना है?
जामिया की चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर प्रो. सायमा सईद से जब हमने इस पूरे मामले पर कॉल के जरिए बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने सीधे तौर पर जवाब देने से मना कर दिया.
जामिया मिल्लिया इस्लामिया एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़ी एक महिला अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर NDTV.in के साथ बातचीत में कहा, "किसी भी समस्या का हल बातचीत से ही निकलता है. यहां भी डायलॉग ही सॉल्यूशन है, स्थिति ख़राब करने से कुछ नहीं होगा. गेट के आस-पास से जिस तरह के विज़ुअल्स आए हैं, वो ठीक नहीं हैं."
उन्होंने आगे कहा कि कैंपस में सिर्फ धरना देने से मांग पूरी नहीं होगी. प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स जब हमारे पास अपनी मांग पेपर पर लिखकर आएंगे, मेमोरेंडम देंगे, उसके बाद कमेटी बनाई जाएगी और हल निकाला जाएगा.

तिरपाल के नीचे बैठे प्रदर्शनकारी छात्र
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हाई-लेवल कमेटी का गठन
देर रात जामिया के चीफ पब्लिक रिलेशन ऑफिसर की तरफ से सोशल मीडिया के जरिए प्रेस रिलीज जारी गई. इसमें कहा गया, "जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने छात्रों की शिकायतों के समाधान और कैंपस में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है."
जारी किए गए दस्तावेज़ में कहा गया, "JMI के सीनियर अधिकारियों- कुलपति प्रो. मजहर आसिफ, कुलसचिव प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी, फैकल्टीज के डीन, स्टूडेंट वेलफेयर डीन, चीफ प्रॉक्टर, हॉस्टल प्रोवोस्ट और अन्य अधिकारियों की एक मीटिंग हुई. इसमें उन छात्रों की मांगों पर चर्चा की गई, जो हंगर स्ट्राइक पर बैठे हैं और प्रोटेस्ट कर रहे हैं."
Office of the Chief Public Relations Officer, Jamia Millia Islamia Important Press Release JMI Constitutes a High-Level Committee to Address Students' Grievances and Restore Normalcy on Campus October 18, 2026 A meeting of senior university functionaries - JMI Vice Chancellor, Prof. Mazhar Asif, Registrar JMI, Prof. Md. Mahtab Alam Rizvi, Deans of Faculties, Dean Students' Welfare, Chief Proctor, Provosts of hostels, and other officials of Jamia Millia Islamia (JMI), was held today to deliberate on the demands raised by students who have been sitting on a hunger strike and staging protests. Following detailed deliberations during this meeting; the University has constituted a high-level, 7-member committee to engage in dialogue with the protesting students, examine their demands, and take necessary steps towards restoring peace and ensuring a return to normalcy on the campus. Chief Public Relations Officer, JMI
— Jamia Millia Islamia (NAAC A++ Grade Central Univ) (@jmiu_official) October 18, 2026
प्रशासन की तरफ से आगे कहा गया कि विश्वविद्यालय ने 7 सदस्यों वाली एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करेगी, उनकी मांगों की जांच करेगी और कैंपस में शांति बहाल करने, सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए जरूरी कदम उठाएगी.
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