कैलिफोर्निया के 14 साल के भारतीय मूल के अमेरिकी छात्र श्रेय पारिख ने 90 सेकंड में 35 में से 32 शब्दों की सही स्पेलिंग बताकर ‘स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी' प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया है. NDTV ने अमेरिका में रहने वाले श्रेय पारिख और उनके परिवार से Exclusive बात की. इस दौरान श्रेय पारिख ने बताया कि कैसे उन्होंने दिन रात मेहनत की और स्पेलिंग पर फोकस किया. NDTV को दिए खास इंटरव्यू में श्रेय पारिख ने अपनी तैयारी के बारे में बताते हुए कहा, "तैयारी के लिए, मैं ज़्यादातर टाइपिंग प्रोग्राम का इस्तेमाल करता था ताकि मैं ज़्यादा से ज़्यादा शब्दों को असरदार तरीके से सीख सकूं. और इससे सच में मुझे ‘B' के लिए बहुत मदद मिली, क्योंकि जब ‘स्पेल-ऑफ़' (spell off) की बारी आई जो कि एक तेज़ रफ़्तार वाला राउंड था, तो यह मेरे लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित हुआ. क्योंकि मैं पहले से ही इसकी काफ़ी प्रैक्टिस कर चुका था. इसलिए, जब मैंने यह ‘स्पेल-ऑफ़' राउंड किया, तो यह मेरे लिए बिल्कुल वैसी ही एक प्रैक्टिस जैसा ही था.”
कौन है रोल मॉडल?
अपने रोल मॉडल्स के सवाल पर श्रेय ने अपने परिवार और एक पुराने चैंपियन का नाम लिया. उन्होंने कहा, मैं कहूंगा कि मेरे रोल मॉडल्स शायद मेरा परिवार ही है, क्योंकि वे सभी बहुत मेहनत करते हैं. जब उनसे इस खास क्षेत्र से जुड़ी कोई प्रेरणा के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने आगे कहा “तो, मेरे रोल मॉडल्स में से एक 2019 के चैंपियन सोहम सुखंकर हैं, क्योंकि उन्होंने ही मुझे सच में सिखाया कि पढ़ाई को लेकर समझदारी कैसे दिखानी है और अपनी खुद की लिस्ट कैसे बनानी है.
श्रेय पारिख के माता-पिता ने भी अपने बेटे की इस जीत पर खुशी जताते हुए कहा कि उनको उम्मीद थी कि उनका बेटा ये खिताब जीत सकता है. बता दें ये पहला मौका नहीं था जब श्रेय ने इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था. साल 2022 स्क्रिप्स स्पेलिंग बी प्रतियोगिता में पारिख 89वें स्थान पर आए थे. साल 2024 में तीसरे स्थान पर रहे थे. वहीं वह 2025 में वो अपने स्कूल में एक क्वालिफाइंग राउंड में ही हार गए थे. लेकिन श्रेय ने हार नहीं मानी और एक बार फिर इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपने लक्ष्य को हासिल किया.
‘स्क्रिप्स नेशनल स्पेलिंग बी' प्रतियोगिता के बारे में जानें-
- ‘स्पेलिंग बी' प्रतियोगिता की शुरुआत सबसे पहले साल 1925 में हुई थी.
- प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले उम्मीदवारों की उम्र 15 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए.
- आठवीं कक्षा तक के छात्र ही इसमें हिस्सा ले सकते हैं.
- बालू नटराजन 1985 में यह प्रतियोगिता जीतने वाले पहले भारतीय मूल के छात्र बने थे.
- पिछले चार दशकों में भारतीय मूल के छात्रों का ही इस प्रतियोगिता में दबदबा देखने को मिला है.
- इस साल भी अंतिम मुकाबले में पहुंचे नौ उम्मीदवारों में से 5 भारतीय मूल के छात्र ही थे.
- 12 साल के छात्र ईशान गुप्ता इस साल की प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर आए हैं.
"हमारे ग्रैंडसन ने काफी मेहनत की"
श्रेय पारिख के दादा-दादी ने भी NDTV से Exclusive बात की. अपने पोते की जीत की खुशी में दादा प्रवीण मेहता ने कहा, "बहुत ही अच्छा लग रहा है कि हमारा ग्रैंडसन इस लेवल पर पहुंच गया है. उसने बहुत मेहनत की थी. उसके पेरेंट्स ने उसको बहुत सपोर्ट किया. इसकी वजह से वो ये कर सका है. वो 2 साल पहले थर्ड रैंकिंग में आया था, तब हम लोगों ने उसको बोला था अपनी ओर हॉबीज पर फोकस करो, लेकिन उसने कहा कि मैं जबतक फर्स्ट नंबर नहीं आऊंगा, तब तक मेरे को सैटिस्फैक्शन नहीं होगा. हमने उसका साथ दिया. वो अपने आपको ऊपर लेकर जाना चाहता था. हमने उसकी मदद की. उसके माता-पिता ने काफी मेहनत की. हम खुश होते हैं ये सब देखकर, उसने सबसे बड़ा इनाम हासिल किया".
श्रेय पारिख की दादी किशोरी मेहता ने कहा, "वो बचपन से ही काफी तेज बच्चा था. वो अच्छे से पढ़ाई करता. उसको ये करना था. उसने ये हासिल करके दिखाया. हम उसका ये कॉम्पिटिशन देखने के लिए खासतौर अमेरिका आए थे. हम ये महसूस करना चाहते थे".
"हार्ट रेट बढ़ जाता था"
श्रेय पारिख के दादा ने आगे कहा, उस टाइम हम लोग तो हॉल में बैठे हुए थे. वो स्पेलिंग बोलने आता था, तो हम लोगों का हार्ट रेट बढ़ जाता था. मगर जब भी वो सही आंसर देता तो हमको शांति मिलती थी. फिर दूसरा राउंड होता था, उसका नंबर आता था, फिर वापस टेंशन हो जाती थी, तो ऐसे ही करते-करते फाइनल में वो जीत गया. फाइनल में तो जो भी कैंडिडेट थे वो सब अच्छे थे.
इनाम में मिली अच्छी खासी राशि
श्रेय को इनाम के तौर पर 50,000 डॉलर ( करीब 47 लाख रुपये), एक पदक और ‘स्क्रिप्स कप' मेडल दिया गया है. इसके अलावा ‘मेरियम-वेबस्टर' की ओर से 2,500 डॉलर (करीब 2 लाख रुपये), ‘डेल्टा एयरलाइंस' का 1,000 डॉलर का यात्रा क्रेडिट और ‘एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका' की ओर से 400 डॉलर मूल्य की किताबें दी गई हैं.
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