हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित उत्तराखंड पब्लिक स्कूल की मान्यता रद्द कर दी थी. मान्यता रद्द होने के बाद इस स्कूल के बच्चों को अब स्कूल की ओर से एक ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) दिया जाएगा. जिसकी मदद से बच्चे अन्य स्कूल में दाखिला ले सकेंगे. हालांकि इस बीच एक बड़ा सवाल ये उठता है कि जिन स्कूलों की मान्यता रद्द की जाती है क्या वो दोबारा से मान्यता प्राप्त कर सकते हैं? स्कूल मान्यता रद्द होने के बाद क्या अपना बोर्ड बदल सकता है या फिर ओरिजिनल बोर्ड से ही नए एफिलिएशन के लिए अप्लाई कर सकता है?
अगर स्कूल ओरिजिनल बोर्ड के साथ रहना चाहता है, तो वह पेनल्टी पीरियड खत्म होने के बाद ही एफिलिएशन के लिए अप्लाई कर सकता है. बशर्ते वह बोर्ड के सारे नियमों का सख्ती से पालन करें. ये प्रोसेस काफी लंबे और समय लेने वाला होता है. बड़े बोर्ड, जैसे कि CBSE अगर एक बार किसी स्कूल की मान्यता रद्द करते हैं, तो सबसे पहले वेटिंग पीरियड लगाते हैं. यानी एक ऐसी अवधि तय करते हैं जिसके बाद ही स्कूल दोबारा मान्यता पाने के लिए आवेदन कर सकते हैं. री-एफिलिएशन हासिल करने में कम से कम दो से चार सालों तक समय लग जाता है.
री-एफिलिएशन हासिल करने के लिए स्कूल को यह साबित करना होता है कि उसने पिछले सभी वायलेशन को ठीक कर लिया है. बोर्ड की और से स्कूल की जांच की जाती है. अगर सब सही पाया जाता है, तो ही दोबारा बोर्ड स्कूल को मान्यता प्रदान करता है.
नए बोर्ड में जाने का प्रोसेस
अगर स्कूल मान्यता रद्द होने के बाद किसी दूसरे बोर्ड में जाने का फैसला करता है, तो इसकी भी एक प्रक्रिया होती है. जिसका पालन करना होता है.
स्टेट गवर्नमेंट से मान्यता प्राप्त करने के लिए स्कूल को सबसे पहले राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट के तहत स्टेट एजुकेशन डिपार्टमेंट से एक नया मान्यता सर्टिफिकेट लेना होता है. इसके बाद आवेदन करना होता है.
ICSE जैसे नेशनल बोर्ड में शामिल होने के लिए, स्कूल को आमतौर पर स्टेट गवर्नमेंट से एक नया NOC हासिल करना होता है. स्कूल को फिर नए बोर्ड के सभी नियमों को पूरा करना होता है- जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, जमीन और स्टाफिंग इत्यादि. इसके बाद बोर्ड के लिए फिजिकल इंस्पेक्शन की जाती है और सब सही पाए जाने पर ही मान्यता दी जाती है.