IAS सोनल गोयल का दर्द बना मिशन, पिता को कैंसर से खोने के बाद दे रहीं संदेश-नशा नहीं, सपने चुनो

IAS सोनल गोयल ने पिता को कैंसर से खोने के बाद कैंसर जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को अपना मिशन बना लिया है. माउंट किलिमंजारो अभियान के दौरान उन्होंने युवाओं को ‘नशा नहीं, सपने चुनो’ का संदेश दिया और जागरूकता, फिटनेस तथा सकारात्मक जीवन मूल्यों को अपनाने की अपील की.

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आईएएस सोनल गोयल के प‍िता का अक्टूबर 2023 में न‍िधन हो गया था.
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  • IAS सोनल गोयल ने अपने पिता के कैंसर से निधन के बाद कैंसर जागरूकता और रोकथाम को लेकर सामाजिक अभियान शुरू किया
  • उन्होंने मई 2026 में एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक के दौरान पहली बार कैंसर जागरूकता का संदेश फैलाना शुरू किया था
  • माउंट किलिमंजारो पर कठिन यात्रा के दौरान सुरक्षा कारणों से रूट बदला गया

नई दिल्ली. कैंसर ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की चर्चित IAS अधिकारी सोनल गोयल से उनके पिता को छीन लिया, लेकिन पिता की बीमारी से जूझने की हिम्मत और जीवन के प्रति उनका नजरिया आज भी सोनल को प्रेरित करता है. यही वजह है कि उन्होंने अपने निजी दर्द को एक सामाजिक अभियान में बदल दिया है. IAS सोनल गोयल ने अपने माउंट किलिमंजारो अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि मई 2026 में एवरेस्ट बेस कैंप ट्रेक के दौरान उन्होंने पहली बार कैंसर जागरूकता का संदेश अपने साथ लेकर जाना शुरू किया था. इसके बाद किलिमंजारो अभियान में भी वह उसी संदेश को आगे बढ़ाती रहीं. 

आईएएस सोनल गोयल के प‍िता का अक्टूबर 2023 में न‍िधन हो गया था.
Photo Credit: अल्टर्ड बाय NDTV

कैंसर के खिलाफ जागरूकता सबसे बड़ी ताकत

सोनल ने लिखा कि अक्टूबर 2023 में अपने पिता को कैंसर से खोने के बाद उन्होंने लोगों के बीच कैंसर की रोकथाम, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया है. उनका मानना है कि बीमारी के खिलाफ सबसे बड़ी ताकत जागरूकता और समय रहते किया गया उपचार है.

पोस्ट में उन्होंने युवाओं के लिए "नशा नहीं, सपने चुनो" का एक खास संदेश भी दिया. उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और स्वास्थ्य, फिटनेस, लक्ष्य तथा सपनों को अपनाने की अपील की. सोनल के मुताबिक देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है और उन्हें केवल अवसर ही नहीं, बल्कि सही रास्ता चुनने की समझ और इच्छाशक्ति भी मिलनी चाहिए. 

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किलिमंजारो की कठिन राह पर भी नहीं भूलीं मिशन

तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो की यह यात्रा सोनल गोयल के लिए केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं थी. उन्होंने अपनी पूरी यात्रा को जिंदगी के सबक और सामाजिक संदेश से जोड़ा. यात्रा की शुरुआत लेमोशो रूट से हुई. शुरुआती दिनों में टीम घने वर्षावनों और पहाड़ी रास्तों से होकर आगे बढ़ी. लेकिन तीसरे दिन शिरा क्षेत्र के पास जंगल में आग दिखाई देने के बाद अभियान को बीच में रोकना पड़ा. सुरक्षा कारणों से टीम को वापस लौटने का निर्णय लेना पड़ा और लंबा ट्रेक कर नीचे आना पड़ा.   

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बाद में बदले हुए रूट से अभियान दोबारा शुरू हुआ. सोनल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि कई बार जिंदगी में योजनाएं बदल जाती हैं, लेकिन लक्ष्य नहीं बदलता. उनके मुताबिक कभी-कभी पीछे हटना हार नहीं, बल्कि हालात को समझने और सही समय का इंतजार करने का नाम है. यात्रा के दौरान उन्होंने ऊंचाई, थकान और कठिन चढ़ाइयों का सामना किया. बरांको वॉल जैसी चुनौतीपूर्ण चट्टानों से लेकर लावा टॉवर तक के सफर में उन्होंने बार-बार एक ही बात लिखी, "एक-एक कदम बढ़ाते रहो."   

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गांधी जयंती पर पहुंचीं 18,829 फीट की ऊंचाई तक

कई दिनों की कठिन ट्रेकिंग के बाद अंतिम चढ़ाई रात में शुरू हुई. घंटों तक अंधेरे और कड़ाके की ठंड में चलने के बाद सोनल गोयल 5,739 मीटर (18,829 फीट) ऊंचाई पर स्थित स्टेला प्वाइंट तक पहुंचीं. उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक बताया. उनके अनुसार यह यात्रा केवल किसी पर्वत की ऊंचाई तक पहुंचने की नहीं थी, बल्कि खुद की सीमाओं को चुनौती देने और उनसे आगे निकलने का अनुभव थी.  

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'हर पहाड़ अब एक संदेश लेकर जाता है'

सोनल गोयल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अब उनके लिए हर पर्वत सिर्फ एक चोटी नहीं, बल्कि एक अवसर है, जिसके जरिए वह कैंसर जागरूकता और स्वस्थ जीवन का संदेश ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा सकती हैं. उन्होंने लिखा कि यह प्रयास उनके पिता की स्मृति, देश के युवाओं और एक स्वस्थ भारत के लिए है.

पोस्ट के अंत में उन्होंने लोगों से अपील की, "जागरूक रहिए, सक्रिय रहिए, स्वस्थ रहिए. जीवन चुनिए, अपने सपनों को चुनिए." इस पूरे अभियान में किलिमंजारो की चोटी से भी बड़ी बात शायद यही रही कि एक बेटी ने अपने पिता की याद को निजी स्मृति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज के लिए प्रेरणा और जागरूकता के संदेश में बदल दिया. 

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कौन हैं IAS सोनल गोयल?

हरियाणा के पानीपत की रहने वाली सोनल गोयल भारतीय प्रशासनिक सेवा की 2008 बैच की IAS अधिकारी हैं. उन्होंने डीएवी पब्लिक स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स  से उच्च शिक्षा हासिल की. सोनल कंपनी सेक्रेटरी, एलएलएम और पब्लिक पॉलिसी में मास्टर डिग्रीधारक हैं. नीति आयोग ने उन्हें 'टॉप 25 वूमेन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया' में शामिल किया था, जबकि ट्विटर इंडिया ने उन्हें 'वेब वंडर वुमन' के रूप में सम्मानित किया था. सोनल गोयल ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2007 में ऑल इंडिया स्तर पर 13वीं रैंक हासिल की थी. वह त्रिपुरा भवन में रेजिडेंट कमिश्नर के तौर पर भी सेवाएं दे चुकी हैं. साल 2016 में हरियाणा कैडर में आने के बाद वह गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन सिटी बस लिमिटेड की CEO भी रह चुकी हैं.   

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IAS Sonal Goel
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