सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने अपने सभी एफिलिएटेड स्कूलों को पीरियड्स से जुड़ी हाइजीन मैनेजमेंट (MHM) पर नई गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले के बाद CBSE ने ये आदेश स्कूलों कि दिया है. यह निर्देश शिक्षा मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के 20 जनवरी, 2026 के फैसले के बाद आया है, जिसमें पीरियड्स से जुड़ी हेल्थ को संविधान के आर्टिकल 21 के तहत सम्मान के अधिकार का एक जरूरी हिस्सा माना गया है.
कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि लड़कियों के शिक्षा और समान अवसरों के अधिकार को पक्का करने के लिए पीरियड्स से जुड़ी सही हाइजीन तक पहुंच जरूरी है. अपने निर्देशों में, सुप्रीम कोर्ट ने सभी को याद दिलाया है सही सुविधाओं की कमी कई स्टूडेंट्स के लिए अटेंडेंस में रुकावट बन सकती है. स्कूलों में बच्चों की हिस्सेदारी न पर बुरा असर डाल सकती है.
स्कूलों में बनाएं MHM कॉर्नर
सर्कुलर में, CBSE ने देश भर के स्कूलों से कई जरूरी कदम उठाने को कहा है. इनमें लड़कियों के लिए सुरक्षित और साफ-सुथरे अलग टॉयलेट और कपड़े धोने की सुविधा देना, बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता पक्का करना और कैंपस में खास MHM कॉर्नर बनाना शामिल है. स्कूलों को सैनिटरी कचरे के डिस्पोज़ल के लिए सही सिस्टम अपनाने का भी निर्देश भी दिया गया है. इसके अलावा, स्कूलों को NCERT और SCERT की गाइडलाइंस के मुताबिक, पीरियड्स की सेहत और प्यूबर्टी पर अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने होंगे.
स्कूलों पर रखी जाएगी नजर
CBSE की और से जारी की गई हाइजीन मैनेजमेंट (MHM) गाइडलाइंस को हल स्कूल को फॉलो करना होगा. हर स्कूल पर नजर रखी जाएगी, डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर्स से समय-समय पर इंस्पेक्शन करेंगे. स्कूलों को 31 मार्च और 30 अप्रैल, 2026 तक एक ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए मंथली कम्प्लायंस रिपोर्ट भी जमा करनी होगी.