कितनी पढ़ी-लिखी हैं राज्यसभा की पहली ओपनली LGBTQ+ सांसद Dr. Menaka Guruswamy

डॉ. मेनका गुरुस्वामी की शानदार एजुकेशन प्रोफाइल पर एक नजर. जानें कैसे एक भारतीय छात्रा ने ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसे संस्थानों से पढ़ाई कर देश का नाम रोशन किया.

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बता दें कि मेनका गुरुस्वामी समलैंगिकता को अपराध की कैटेगरी से बाहर कराने वाले फैसले में मेनका का काफी अहम रोल था.

Dr. Menaka Guruswamy Education : किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे उसकी शिक्षा की सबसे बड़ी भूमिका होती है, और जब बात डॉ. मेनका गुरुस्वामी (Dr. Menaka Guruswamy) की हो, तो उनकी डिग्रियां उनकी काबिलीयत की गवाही खुद देती हैं. राज्यसभा की पहली ओपनली LGBTQ+ सांसद बनने से पहले, मेनका ने दुनिया के उन संस्थानों से शिक्षा हासिल की, जहां पहुंचना करोड़ों युवाओं का सपना होता है. आइए एक नजर उनकी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन पर डालते हैं.

स्कूली शिक्षा 

मेनका गुरुस्वामी ने हैदराबाद पब्लिक स्कूल से अपनी प्राइमरी एजुकेशन पूरी की. इसके बाद वह दिल्ली आ गईं और सरदार पटेल विद्यालय से अपनी हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की. 

नेशनल लॉ स्कूल (NLSIU) से करियर का आगाज

कानून की दुनिया में कदम रखने के लिए उन्होंने भारत के सबसे बेहतरीन लॉ कॉलेज, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बैंगलोर को चुना. साल 1997 में उन्होंने यहां से B.A.LL.B. (Hons) की डिग्री हासिल की. यहीं से उनके एक शानदार वकील बनने की शुरुआत हुई.

ऑक्सफोर्ड में 'रोड्स स्कॉलर' और हार्वर्ड का सफर

मेनका की प्रतिभा का लोहा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब माना गया जब उन्हें दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित रोड्स स्कॉलरशिप (Rhodes Scholarship) के लिए चुना गया.

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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी

साल 2000 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड से बैचलर ऑफ सिविल लॉ (BCL) की पढ़ाई पूरी की.

हार्वर्ड लॉ स्कूल

इसके तुरंत बाद 2001 में, उन्हें गैमोन फेलोशिप मिली, जिसकी मदद से उन्होंने हार्वर्ड से अपनी मास्टर ऑफ लॉ (LL.M.) की डिग्री ली.

रिसर्च और डॉक्टरेट 

मेनका केवल वकालत तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने कानून की गहराई को समझने के लिए रिसर्च भी की. साल 2015 में उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अपनी डॉक्टरेट पूरी की. उनकी पीएचडी का विषय भारत, पाकिस्तान और नेपाल में 'संवैधानिक शासन' (Constitutionalism) पर बेस़्ड था.

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बता दें कि मेनका गुरुस्वामी समलैंगिकता को अपराध की कैटेगरी से बाहर कराने वाले फैसले में मेनका का काफी अहम रोल था. 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को रद्द कर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था. इसके लिए अरुंधति काटजू  और मेनका गुरुस्वामी ने मिलकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी. 

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