निजी स्कूलों को स्कूल-स्तरीय फीस विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) गठित करने संबंधी दिल्ली सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने के मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट आज एक आदेश जारी करने वाला है. इस मामले में शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई थी. इस सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि वो इस मामले में एक आदेश 28 फरवरी को पारित करेगा. मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की.
पीठ ने कई स्कूल संघों की ओर से दायर याचिकाओं पर दलीलें सुनीं. याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार की और से एक फरवरी को जारी अधिसूचना पर रोक लगाई जाए. उक्त अधिसूचना में स्कूलों को 10 दिनों के भीतर एसएलएफआरसी का गठन करने के लिए कहा गया है. मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “अंतरिम राहत प्रदान करने के अनुरोध पर पक्षकारों के अधिवक्ताओं को सुना. आदेश सुरक्षित रखा जाता है. कल सुनाया जाएगा.”
सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने कोर्ट में दलीलें रखें थी. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजू ने दलील दी कि अधिनियम में दी गई 'तिथियां' ना तो 'अपरिवर्तनीय' हैं और न ही इसकी 'बुनियादी संरचना' का हिस्सा हैं, इसलिए इन समय-सीमाओं में मामूली फेरबदल मान्य होगा. उन्होंने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य स्कूलों के मुनाफाखोरी को रोकना है और अधिसूचना इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए लाई गई है. स्कूलों को इससे कोई क्षति नहीं होगी.
याचिकाकर्ताओं में दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी और एक्शन कमेटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स शामिल हैं.
क्या है पूरा मामला
एक फरवरी को, दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम के क्रियान्वयन को 'सुचारू' बनाने के लिए एक राजपत्र अधिसूचना जारी की थी. दिल्ली सरकार ने यह अधिसूचना हाई कोर्ट द्वारा उसके नए फीस निर्धारण कानून को लेकर सवाल उठाने के बाद जारी की थी.
अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक स्कूल को आदेश जारी होने के 10 दिनों के भीतर एक विद्यालय-स्तरीय फीस विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) गठित करने का निर्देश दिया गया था.