Private school fee : दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर चल रहे विवाद पर मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई हुई. एक तरफ दिल्ली सरकार है जो स्कूलों की फीस को कंट्रोल करने के लिए 'स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी' (SLFRC) बनाने पर अड़ी है, तो दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूल इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं 1 अप्रैल से क्या स्कूलों का फीस वसूलना अवैध है.
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सुनवाई के दौरान प्राइवेट स्कूलों की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अखिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि दिल्ली सरकार को ऐसा लगता है कि सारे स्कूल सिर्फ मुनाफाखोरी (Profiteering) कर रहे हैं. स्कूलों का सबसे बड़ा डर यह है कि अगर 1 अप्रैल तक फीस का कोई ढांचा तय नहीं हुआ, तो उनके द्वारा ली जाने वाली फीस को बिना मंजूरी वाली मान लिया जाएगा.
स्कूलों ने दलील दी कि कानून यह कहता है कि आप 'तय फीस' से ज्यादा नहीं वसूल सकते, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप फीस ही नहीं लेंगे. सरकार के रुख से ऐसा लग रहा है जैसे अगर उनकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो स्कूल 'जीरो फीस' पर आ जाएंगे, जो कि प्रैक्टिकल नहीं है.
अदालत में स्कूलों ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार सभी स्कूलों को एक ही नजरिए से देख रही है. स्कूलों ने SLFRC के गठन से जुड़ी अधिसूचना (Notification) पर रोक लगाने की मांग की है.
समिति नहीं बनी तो होगा नुकसानवहीं, दिल्ली सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि अगर इन समितियों (SLFRC) के गठन पर रोक लगाई गई, तो इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं. सरकार का कहना है कि ये समितियां स्कूलों को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि नए सत्र से पहले फीस तय करने की एक पारदर्शी प्रक्रिया बनाने के लिए हैं.