उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में हमने स्कूली शिक्षा पर 80 हजार रुपये करोड़ से अधिक की राशि खर्च की है. मुख्यमंत्री ने वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम में 'स्कूल चलो अभियान' का उद्घाटन के दौरान ये बात कही. सीएम ने कहा,UP में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर 19% से घटकर 3% हुई हो गई है. यह हर बच्चे को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के हमारे लगातार प्रयासों की सफलता को दर्शाता." शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के निवेश पर बात करते हुए आदित्यनाथ ने कहा, "राज्य सरकार स्कूली शिक्षा पर 80,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करती है, जिससे बेहतर बुनियादी ढांचा और बेहतर पहुंच सुनिश्चित होती है."
सीएम योगी ने कहा हर ब्लॉक में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय खोले गए हैं. इन स्कूलों को 12वीं कक्षा तक की मंज़ूरी दे दी गई है. इससे यह पक्का होगा कि कमज़ोर तबके की लड़कियां बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि 3 से 6 साल के बच्चों के लिए हर आंगनवाड़ी केंद्र में 'बाल वाटिका' कक्षाएं शुरू की जा रही हैं.
चित्रकूट के जिलाधिकारी का उदाहरण दिया
इस दौरान सीएम ने चित्रकूट के जिलाधिकारी का उदाहरण भी दिया, जिन्होंने अपनी ही बेटी का दाखिला बाल वाटिका में करवाया है. आदित्यनाथ ने कहा, "यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि जिला अधिकारी खुद उदाहरण पेश करके नेतृत्व कर रहे हैं. जिलाधिकारी का अपने ही बच्चे को सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाना एक बहुत मजबूत संदेश देता है. उन्होंने शिक्षकों से भी ऐसा ही करने की अपील करते हुए कहा, "शिक्षकों को अपने बच्चों का दाखिला उन्हीं स्कूलों में करवाना चाहिए जहां वे पढ़ाते हैं. इससे जवाबदेही बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा."
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे आस-पास के गांवों में जाएं, घर-घर जाकर दरवाज़े खटखटाएं. ये पता लगाएं कि बच्चे स्कूल क्यों नहीं आ रहे हैं. अभिभावकों से बातचीत करें और यह सुनिश्चित करें कि हर बच्चा वापस कक्षा में लौटे."
पहले की सरकार में स्कूल जर्जर हालत में थे
2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कई सरकारी स्कूल जर्जर हालत में थे और बंद होने की कगार पर थे. 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कई सरकारी स्कूल जर्जर हालत में थे और बंद होने की कगार पर थे. जब हम सत्ता में आए, तो हमने सभी जिलों में खराब बुनियादी ढांचा और स्कूल छोड़ने वालों की ऊंची दरें देखीं. ऑपरेशन कायाकल्प और निपुण भारत जैसी पहलों ने शिक्षा के माहौल को बदलने में अहम भूमिका निभाई है. इन कार्यक्रमों ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया है और बच्चों में सीखने की जिज्ञासा जगाई है, जिससे उपस्थिति बढ़ी है