CBSE Marking Scheme : सीबीएसई (CBSE) के नतीजे आते ही कहीं खुशियों का माहौल होता है, तो कहीं कुछ छात्र उदास हो जाते हैं. कई बार ऐसा होता है कि आपको लगता है कि पेपर तो बहुत अच्छा गया था, लेकिन नंबर कम आए हैं. ऐसे में छात्र और पेरेंट्स के मन में सबसे बड़ा सवाल होता है रीवेरीफिकेशन (Verification) कराएं या रीवैल्युएशन (Revaluation)?
अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनमें जमीन-आसमान का फर्क है. अगर आपने सही ऑप्शन नहीं चुना, तो आपकी मेहनत और पैसे दोनों बर्बाद हो सकते हैं. तो चलिए जानते हैं इन दोनों में क्या होता है अंतर
1. मार्क्स वेरिफिकेशन - Verification of Marks
जब आप इसके लिए अप्लाई करते हैं, तो बोर्ड केवल तीन चीजें चेक करता है-
क्या सभी नंबरों को जोड़ने (Totaling) में कोई गलती तो नहीं हुई?
क्या आंसर शीट का कोई सवाल बिना चेक किए तो नहीं छूट गया?
क्या अंदर दिए गए नंबरों को बाहर मेन मार्कशीट पर सही से चढ़ाया गया है?
नोट - इसमें आपका उत्तर दोबारा नहीं पढ़ा जाता, बस कैलकुलेशन चेक की जाती है.
2. आंसर शीट की फोटोकॉपी - Photocopy of Answer Sheet
वेरीफिकेशन के बाद अगला स्टेप आता है अपनी आंसर शीट की फोटोकॉपी मांगना. यह बहुत जरूरी स्टेप है. जब आपके पास अपनी ओरिजिनल कॉपी आ जाती है, तो आप खुद देख सकते हैं कि टीचर ने कहां नंबर काटे हैं और कहां कम दिए हैं. इसे देखने के बाद ही आप तय कर पाते हैं कि आगे बढ़ना है या नहीं.
3. रीवैल्युएशन - Revaluation
यह सबसे आखिरी और बड़ा कदम है. इसमें आप किसी खास सवाल (Question) को दोबारा चेक करने की चुनौती देते हैं. अगर आपको लगता है कि आपने उत्तर सही लिखा है लेकिन टीचर ने कम नंबर दिए हैं, तो यहां उसकी दोबारा जांच होती है.
इसमें नंबर बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं. इसलिए पूरी तरह श्योर होने पर ही यह कदम उठाएं.
क्या कब क्या चुनें?
अगर आपको लगता है कि टोटल करने में गलती हुई है, तो वेरीफिकेशन का रास्ता चुनें. लेकिन अगर आपको लगता है कि आपके जवाब और बेहतर नंबरों के हकदार थे, तो फोटोकॉपी देखने के बाद रीवैल्युएशन के लिए जाएं.
CBSE Revaluation vs Verification: कैसे करें अप्लाई?
आपको बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय समय के अंदर और तय फीस भरकर आवेदन करना होता है. तारीख निकलने के बाद कोई मौका नहीं मिलता, इसलिए शेड्यूल पर नजर रखें.