फ्रेशर पार्टी के दौरान हुई थी छात्र की मौत, अब सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया 20 लाख रुपये मुआवजे का आदेश

छात्र राजा पासवान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में संस्थान के उन दावों को गलत पाया गया था. जिसमें कहा गया था कि राजा पासवान शराब के नशे में था. दरअसल संस्थान ने दावा किया था कि छात्र की हालत शराब के सेवन के कारण बिगड़ी थी.

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सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 23, मार्च 2026 को होगी.

14 नवंबर, 2024 को रांची स्थित शैक्षणिक संस्थान बीआईटी मेसरा (BIT Mesra) में एक फ्रेशर पार्टी रखी गई थी. इस पार्टी में कई सारे छात्र शामिल हुए थे. लेकिन कुछ ही पल में ये पार्टी मातम में बदल गई. दरअसल पार्टी में शामिल हुए  छात्र राजा पासवान की मौत हो गई थी. ये मामला पहले झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा और फिर सुप्रीम कोर्ट. हाल में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजा पासवान के माता-पिता को 20 लाख रुपये का मुआवजा देनेवाले झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है. साथ ही बीआईटी मेसरा को इस आदेश के पालन के लिए दो सप्ताह का समय दिया है. आखिर क्या है ये पूरा मामला आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

बीआईटी मेसरा में पालिटेक्निक कॉलेज में फ्रेशर पार्टी हुई थी. इस बीच कुछ छात्रों के बीच विवाद हो गया था. आरोपी छात्रों ने राजा पासवान की पिटाई कर दी. इस घटना में राजा गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसे बाद में रिम्स में भर्ती कराया गया. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी. राजा पासवान के पिता चंदन पासवान ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई. ये मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया.

"मेरे बेटे को लाठी, डंडे से मारा गया"

राजा पासवान के पिता चंदन पासवान के अनुसार उनके बेटे को लाठी, डंडे और बेल्ट से मारा गया था.  शरीर पर लाठी, डंडे और बेल्ट से मारने के निशान थे. अगले दिन रिम्स में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. लेकिन कॉलेज ने इस मामले को कुछ अलग तरह से पेश करने की कोशिश की. 

राजा पासवान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में संस्थान के उन दावों को गलत पाया गया जिसमें कहा गया था कि राजा पासवान शराब के नशे में था. दरअसल संस्थान ने दावा किया था कि  छात्र की हालत शराब के सेवन के कारण बिगड़ी थी, रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे. 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान संस्थान के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि यदि कुछ समय दिया जाए तो बीआईटी मेसरा हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए मुआवजा राशि का भुगतान कर देगा. कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए भुगतान के लिए दो सप्ताह का समय दिया. इस मामले की अगली सुनवाई 23, मार्च 2026 के लिए तय की है.

झारखंड हाईकोर्ट ने संस्थान को दोषी पाया था

झारखंड हाईकोर्ट ने 12 अगस्त, 2025 को अपने फैसले में संस्थान को लापरवाही और संस्थागत खामियों का दोषी पाया था. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि छात्र की मौत के पीछे संस्थान की गंभीर चूक थी. अदालत ने पाया था कि घायल छात्र को समय पर इलाज मुहैया कराने में देरी की गई थी. पुलिस को सूचना देने में कोताही बरती गई. कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद लचर पाई गई. यहां तक कि परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे. अदालत ने 'टॉर्टियस लायबिलिटी' के सिद्धांत के तहत संस्थान को जिम्मेदार ठहराते हुए अंतरिम मुआवजे का आदेश दिया था. झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस संजय प्रसाद ने राज्य के शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा के लिए डीजीपी को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बनाने का निर्देश दिया था. लेकिन इसके खिलाफ संस्थान ने शीर्ष कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी थी.

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