- बिहार बोर्ड ने दसवीं और इंटरमीडिएट दोनों परीक्षा के रिजल्ट महज 28 दिनों में घोषित कर नया रिकॉर्ड स्थापित किया
- बोर्ड ने लगभग 89.67 लाख कॉपियों और ओएमआर शीट की जांच अत्यंत कम समय में पूरी की है
- प्रत्येक विद्यार्थी की कॉपी पर फोटो, नाम, बारकोड और लिथोकॉड के साथ प्री-प्रिंटेड फॉर्मेट का उपयोग किया गया था
बिहार बोर्ड ने देश में 10वीं बोर्ड का रिजल्ट जारी कर इतिहास रच दिया है. छात्र-छात्राओं के जश्न के बीच बिहार बोर्ड की भी तारीफ हो रही है. बोर्ड की तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने इसे जारी करने के लिए महज 28 दिन ही लिए. इस स्पीड के पीछे बिहार बोर्ड की वो तकनीक है जिसके बारे में हम आपको बताएंगे.
बिहार बोर्ड के नाम एक और कीर्तिमान
बिहार बोर्ड ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया कि मूल्यांकन शुरू होने के मात्र 28 दिनों के भीतर रिजल्ट घोषित कर दिया गया. पिछले वर्ष यह कार्य 29 दिनों में पूरा हुआ था. बोर्ड ने लगभग 89.67 लाख कॉपियों और इतनी ही ओ.एम.आर. शीट की जांच रिकॉर्ड समय में पूरी की है. देश के अन्य शिक्षा बोर्डों की तुलना में बिहार बोर्ड ने मार्च महीने में ही इंटर और मैट्रिक दोनों के परिणाम जारी कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है.
इस तकनीक से आई रिजल्ट में तेजी
➔बिहार बोर्ड ने बताया कि प्रत्येक विद्यार्थी के फोटो एवं नाम से हर विषय में बारकोड एवं लिथोकॉड के साथ अलग-अलग कॉपी एवं अलग-अलग ओ०एम०आर० शीट छपवाई गई थी. इस प्रकार सभी विद्यार्थियों के फोटो एवं नाम के साथ Pre-printed कॉपी थी.
➔कई प्रकार के नए कम्प्यूटराईज्ड प्रपत्र (Computerised Formats) अपने स्तर से तैयार किए गए और उन कई कम्प्यूटराईज्ड प्रपत्रों की स्कैनिंग कराकर डेटा तैयार किया गया, जिसके चलते रिजल्ट प्रोसेसिंग काफी तेज गति से हो सका. Pre-Printed कॉपी (बारकोड एवं लिथोकोड के साथ) का डिजाइन एवं इन नए कम्प्यूटराईज्ड प्रपत्रों का डिजाइन समिति के अध्यक्ष आनन्द किशोर ने खुद तैयार किया था.
➔राज्य के सभी मूल्यांकन केन्द्रों पर 14-14 कम्प्यूटरों की व्यवस्था की गई और बारकोडेड कॉपियों के अंकों की एंट्री मूल्यांकन केन्द्रों से सीधे कम्प्यूटर के माध्यम से की गई, जिसके कारण रिजल्ट प्रोसेसिंग त्वरित गति से हो पाया.
➔बारकोडिंग केन्द्रों पर कम्प्यूटर की व्यवस्था करते हुए कम्प्यूटर के माध्यम से सभी उत्तरपुस्तिकाओं के बैग की कम्प्यूटराईज्ड इन्ट्री कराई गई. इसके लिए बिहार बोर्ड की आई०टी० टीम ने खुद अपने स्तर से सॉफ्टवेयर विकसित किया था.
➔इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा, 2026 की भांति ही मैट्रिक वार्षिक परीक्षा, 2026 के प्रत्येक विद्यार्थी को UNIQUE ID जारी किया गया था अर्थात् भविष्य में जब भी वह विद्यार्थी समिति की ओर से आयोजित परीक्षा में सम्मिलित हुआ तब यही UNIQUE ID उस विद्यार्थी की पहचान रही.
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