चांदी ढाई लाख के पार! चांदी 3 लाख क्रॉस! चांदी 4 लाख के पार! हमने-आपने 20-22 दिन के भीतर ये तमाम सुर्खियां पढ़ीं. चांदी की कीमतों ऐसा उछाल हमने बरसों ने नहीं देखा था. चांदी की किल्लत, जियो पॉलिटिकल टेंशन, सेफ हेवेन की मांग... ऐसे तमाम फैक्टर्स थे, जिन्होंने चांदी की तेजी वाले गुब्बारे में हवा भरने का काम किया और फिर ये गुब्बारा फूट गया (Silver Prices Crash Reasons). एक्सपर्ट्स बोले- ये तो होना ही था. 4 दिन पहले जो चांदी MCX पर 4 लाख के पार चली गई थी और 4.20 लाख का ऑल टाइम हाई बनाया था, वही चांदी 4 दिन बाद आज सोमवार, 2 फरवरी तक गिर कर 2.33 लाख रुपये/किलो के भाव पर चला आया. सोमवार करीब 2 बजे का ये भाव 24 दिसंबर के भाव के करीब है. यानी चांदी इस साल की शुरुआत में जहां से चढ़ी थी, घूमकर वहीं लुढ़क आई है.
महज 4 दिन में चांदी ने 1,87,000 रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई है. यानी 4 दिन पहले दांव लगाने वाले निवेशकों का पैसा, बस आधे से थोड़ा ज्यादा रह गया है. चांदी में इस तेज गिरावट को देश-दुनिया के एक्सपर्ट किस नजर से देख रहे हैं, चांदी के गोता लगाने के पीछे क्या वजहें हैं, चांदी में अभी पैसे लगाएं या नहीं, आगे चांदी की चाल कैसी रहेगी... ऐसे तमाम सवाल लोगों के मन में हैं. यहां हम 4 ग्लोबल एक्सपर्ट्स की टिप्पणियों में इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे.
क्यों आई 'अंधेरी रात'? 4 प्वाइंट
- ट्रंप का दांव 'The Warsh Factor': अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को फेड (Fed) चेयरमैन बनाए जाने की खबर ने 'आग में घी' का काम किया. वॉर्श को महंगाई के खिलाफ सख्त माना जाता है. इससे डॉलर मजबूत हुआ और सोना-चांदी (जो डॉलर में खरीदे जाते हैं) कमजोर हो गए.
- मुनाफावसूली: बीते कुछ दिनों से चांदी और सोना, दोनों लगातार ऑल टाइम हाई बना रहे थे, जिसके बाद ऊंचे भाव पर भारी मुनाफावसूली देखने को मिली. यानी निवेशकों ने खूब सोना-चांदी बेचा और मोटा मुनाफा कमाया. चांदी में ताजा गिरावट के पीछे ये भी एक बड़ी वजह है.
- सट्टेबाजी की अति और चीन का बबल: जनवरी में निवेशक अंधाधुंध तरीके से सोने-चांदी में पैसा लगा रहे थे. 'कॉल ऑप्शंस' (तेजी के सौदे) की इतनी ज्यादा खरीद हुई कि मार्केट का संतुलन बिगड़ गया. चीन के सट्टेबाजों ने कीमतों को जरूरत से ज्यादा ऊपर चढ़ा दिया था. अब जब बाजार गिरा, तो सबसे ज्यादा बिकवाली भी वहीं से आ रही है.
- जियो पॉलिटिकल टेंशन: तनाव में कमी: ईरान-अमेरिका और अन्य वैश्विक तनावों के कारण लोग सुरक्षा के लिए सोना खरीद रहे थे, लेकिन अब माहौल थोड़ा शांत होने के संकेतों ने सोने की डिमांड कम कर दी.
अब 4 एक्सपर्ट्स के हवाले से समझिए चांदी की चाल.
1). हेजिंग ने बढ़ाई तेजी और फिर मंदी: गोल्डमैन सैक्स
दिग्गज ब्रोकरेज हाउस गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा, 'बाजार में कॉल ऑप्शंस की रिकॉर्ड खरीद ने कीमतों को ऊपर की ओर धकेला था. जब कीमतें बढ़ती हैं, तो ऑप्शंस बेचने वाले घाटे से बचने के लिए और ज्यादा खरीदारी करते हैं, जिससे दाम और बढ़ जाते हैं. लेकिन अब यही प्रक्रिया उल्टी दिशा में काम कर रही है, जिससे गिरावट और तेज हो गई है.'
2). अभी ये गिरावट थमी नहीं: रॉबर्ट गॉटलिब
दिग्गज मार्केट एक्सपर्ट और JPMorgan के एक्स ट्रेडर 'रॉबर्ट गॉटलिब' का मानना है कि बाजार में अभी और हलचल बाकी है. उन्होंने कहा, 'ये गिरावट अभी खत्म नहीं हुई है. हमें यह देखना होगा कि कीमतों को सपोर्ट (सहारा) कहां मिलता है. हकीकत ये है कि बाजार में सट्टेबाजों और खरीदारों की इतनी ज्यादा भीड़ इकट्ठा हो गई थी कि गिरावट आना तय था. अब जोखिम लेने की क्षमता कम होने से मार्केट में नकदी की कमी भी देखी जा सकती है.'
3). चीन में लूनर न्यू ईयर का असर: जीजी वू
चीन के बाजार की भूमिका पर बात करते हुए जिनरुई फ्यूचर्स के एनालिस्ट जीजी वू ने बताया कि बाजार में भारी उतार-चढ़ाव और चीन में आने वाले 'लूनर न्यू ईयर' को देखते हुए ट्रेडर्स अब अपने सौदे कम करेंगे और रिस्क लेने से बचेंगे. उन्होंने कहा, 'हालांकि, कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट से चीन में आम ग्राहकों की मांग बढ़ेगी, क्योंकि त्यौहारों के सीजन में लोग सस्ता सोना खरीदना पसंद करते हैं.'
4). डर से खत्म होगी चांदी की किल्लत: वांग यानकिंग
चाइना फ्यूचर्स के एनालिस्ट ने चांदी की सप्लाई और सट्टेबाजी पर वांग यानकिंग ने बात रखी. वे बोले- 'चांदी में जो 'हॉट मनी' (सट्टेबाजी का पैसा) लगा था, उसने बाजार में आर्टिफिशियल शॉर्टेज की स्थिति पैदा कर दी थी. अब जब एकतरफा तेजी का भरोसा टूट गया है, तो बाजार में चांदी की उपलब्धता बढ़ेगी. एक बार जब सट्टेबाजी कम होगी, तो चांदी की किल्लत भी दूर होने लगेगी.'
इंटरनेशनल मार्केट में भी गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो सोमवार की शुरुआती ट्रेडिंग में स्पॉट गोल्ड करीब 4 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिली. हालांकि, पहले 12 प्रतिशत तक गिरने के बाद चांदी 80 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर टिकने में सफल रही. इससे पहले सत्र में चांदी ने पिछले 10 वर्षों की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट दर्ज की थी, जिससे बाजार में हलचल तेज हो गई.
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