Budget 2026: भारत में लंबे समय तक रेलवे बजट को अलग से पेश करने की परंपरा रही. हर साल यह बजट अलग से संसद में पेश होता था. लेकिन 2017 से यह परंपरा खत्म हो गई और रेलवे बजट तब से आम बजट के साथ ही पेश किया जाता है. इसका मकसद बजट प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना है.
रेलवे बजट का आम बजट में मर्जर
रेलवे बजट को यूनियन बजट के साथ मिलाने का फैसला विशेषज्ञों की सलाह के बाद लिया गया. NITI आयोग के सदस्य बीबेक देब्रोय (Bibek Debroy) ने सुझाव दिया कि रेलवे बजट को अलग रखना अब जरूरी नहीं है. इसके बाद तब के रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु ने इस विषय को उठाया और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 के लिए पहला ज्वाइंट बजट पेश किया.
बदलाव के फायदे
संयुक्त बजट के बाद से रेलवे, सड़क और जलमार्ग जैसे सभी परिवहन क्षेत्रों की योजना और समन्वय बेहतर हो गया है. रेलवे मंत्रालय अब अपने रोजमर्रा के काम खुद संभालता है, लेकिन बजट में अलग से अनुमान और मांग रखता है.
इस बदलाव से रेलवे को सरकार को डिविडेंड देने की जरूरत नहीं रहती और पुराने कैपिटल खर्चों को भी खत्म कर दिया गया है. अब वित्त मंत्रालय संसद के लिए सिर्फ एक ही अधिसूचना तैयार करता है, जिससे सारे नियम-कानून संबंधी काम आसान हो गए हैं.
आसान भाषा में कहें तो, रेलवे बजट का आम बजट में शामिल होना ना केवल प्रोसेस को आसान बनाता है बल्कि पूरे वित्त और योजनाओं को एक साथ देखने और बेहतर तरीके से योजना बनाने में मदद करता है.














