पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी जंग के बीच सोने-चांदी की कीमतों में उथल-पुथल जारी है. गोल्ड-सिल्वर में गिरावट (Gold Silver Prices Crash) का दौर बीते हफ्ते की तरह इस हफ्ते भी जारी है. बीते हफ्ते जहां सोने की कीमतों में 10 फीसदी तो चांदी की कीमतों में करीब 14 फीसदी की गिरावट देखी गई. इस हफ्ते भी वही हाल है. सोमवार को MCX पर एक समय तो सोना 1.30 लाख रुपये/10 ग्राम से नीचे चला आया था, जबकि चांदी 2 लाख रुपये/किलो से नीचे फिसल आई थी. आमतौर पर यह माना जाता है कि जब दुनिया में युद्ध चल रहे होते हैं या जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ता है, तो सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने-चांदी की कीमतें आसमान छूने लगती हैं. फिर इस समय क्या हो रहा है?
मौजूदा समय में चल रहे अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच इसके बिल्कुल उलट क्यों हो रहा है? मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बावजूद सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में 'ऐतिहासिक गिरावट' क्यों हुई?
गोल्ड-सिल्वर की गिरावट समझने के लिए NDTV इंडिया ने जाने-माने मार्केट एक्सपर्ट और KCC ग्रुप के फाउंडर CA डॉ शरद कोहली से बात की. उन्होंने इस इस अजीबोगरीब स्थिति के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं.
कच्चे तेल और डॉलर का 'डबल अटैक'
शरद कोहली बताते हैं कि युद्ध के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $70 से बढ़कर $113 प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं. यानी जंग से पहले जिसे एक बैरल क्रूड ऑयल के 70 डॉलर देने होते थे, उसे 113 डॉलर देने पड़े हैं. तेल महंगा होने से 'डॉलर इंडेक्स' मजबूत होकर 100 के करीब पहुंच गया है. जबकि सोना जब 5200-5400 के करीब था तो डॉलर इंडेक्स 96 पर था. जब डॉलर इंडेक्स बढ़ता है, तो वैश्विक निवेशक (Global Investors) सोने से पैसा निकालकर डॉलर आधारित निवेश में लगाने लगते हैं. यानी कि डॉलर बेस्ड निवेश बढ़ गया है, सोने में निवेश कम हो गया है. यही वजह है कि 'सेफ हेवन' माना जाने वाला सोना इस समय दबाव में है.
ईटीएफ (ETF) की बिकवाली
बाजार में गिरावट का दूसरा बड़ा कारण बड़े फंड हाउस और ईटीएफ (Exchange Traded Funds) द्वारा की जा रही बिकवाली है. ईटीएफ के जरिए बड़े फंड हाउस, सोने में भारी निवेश करते हैं, लेकिन बाजार में अनिश्चितता देख वे अपना माल (सोना) बेचना शुरू कर देते हैं. जब ईटीएफ बड़े पैमाने पर सोना बेचते हैं, तो बाजार में सोने की सप्लाई (Supply) अचानक बढ़ जाती है और जैसा कि सप्लाई और डिमांड का कनेक्शन है, सप्लाई बढ़ने से डिमांड कम और डिमांड कम होने से कीमतों पर दबाव पड़ता है. ये एक तरह से चेन रिएक्शन है, जब बड़े फंड हाउस द्वारा की जाने वाली इस बिकवाली को देखकर छोटे निवेशक भी डर के मारे सोना बेचने लगते हैं, जिससे गिरावट और गहरी हो जाती है.
कमोडिटी मार्केट में सट्टेबाजी
कमोडिटी मार्केट (MCX और COMEX) में 'फॉरवर्ड सेलिंग' या सट्टेबाजी के कॉन्ट्रैक्ट्स बढ़ गए हैं. लोग इस समय सोने को खरीदने के बजाय बेचने (Sell) पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. दरअसल, जब सट्टेबाजों को लगता है कि भविष्य में सोने के दाम और गिरेंगे, तो वे 'शॉर्ट सेलिंग' (Short Selling) शुरू कर देते हैं, यानी बिना पास में सोना हुए भी उसे ऊंचे दाम पर बेच देते हैं. सट्टेबाज ऊंची कीमत पर सोना बेचने का सौदा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि जब दाम और गिरेंगे, तब वे उसे सस्ते में खरीदकर अपना मुनाफा (Margin) कमा लेंगे. युद्ध के माहौल में वे पैनिक सिचुएशन का फायदा उठाते हैं. जब कमोडिटी मार्केट (MCX/COMEX) में भारी मात्रा में 'बेचने के कॉन्ट्रैक्ट्स' बढ़ जाते हैं, तो बाजार में कृत्रिम मंदी का माहौल बन जाता है और कीमतें नीचे आने लगती हैं.
बाजार का मिजाज: अब आगे क्या?
आसान भाषा में समझें तो जब तक कच्चे तेल की कीमतें शांत नहीं होंगी, तब तक सोने पर दबाव बना रहेगा. भले ही सीमा पर तनाव चरम पर हो, लेकिन तेल की महंगाई ने सोने की चमक को फीका कर दिया है. सोमवार को बाजार खुलते ही कीमती धातुओं में जो उतार-चढ़ाव दिखा, उसने निवेशकों को सचेत कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति स्पष्ट नहीं होती और क्रूड ऑयल के दाम स्थिर नहीं होते, तब तक सोने-चांदी में स्थिरता आना मुश्किल है. फिलहाल डॉलर की मजबूती सोने के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.
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