दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की 56वीं वार्षिक बैठक के पहले दिन भारत के लिए बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है. WEF के अध्यक्ष बोर्गे ब्रेंडे ने दावोस में NDTV से खास बातचीत में कहा कि भारत इस साल बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहेगा. उन्होंने अनुमान जताया कि दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि (Global Growth) में अकेले भारत की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक हो सकती है.
मोदी-ट्रंप ट्रेड एग्रीमेंट की उम्मीद
ब्रेंडे ने भारत की विकास दर पर खुशी जताते हुए एक बड़ा सुझाव भी दिया. उन्होंने कहा, 'भारत की ग्रोथ शानदार है, लेकिन अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक व्यापार समझौते (Trade Agreement) पर हस्ताक्षर करते हैं, तो यह सोने पर सुहागा होगा. यह न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए मददगार साबित होगा.' उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार ने जिस तेजी और मजबूती से आर्थिक सुधारों को लागू किया है, उसी वजह से वह भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर इतने 'बुलिश' (आशावादी) हैं.
AI: वरदान या अभिशाप?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चर्चा करते हुए WEF चीफ ने इसे एक 'आधे भरे गिलास' की तरह बताया. उन्होंने कहा कि नई तकनीक विकास का नया इंजन बनेगी. उदाहरण के तौर पर, चिकित्सा अनुसंधान में जो काम 25 साल में होता था, वह अब 5 साल में संभव है. हालांकि, उन्होंने AI के गलत इस्तेमाल और 'ऑटोनॉमस वेपन्स' को लेकर चेतावनी भी दी.
वैश्विक तनाव और शांति की चुनौती
दावोस की इस बैठक पर वैश्विक तनाव की छाया भी साफ देखी जा सकती है. ब्रेंडे ने बताया कि जहां यूक्रेन युद्ध को चार साल होने को हैं, वहीं गाजा का पुनर्निर्माण, ईरान संकट और अब 'ग्रीनलैंड' जैसे नए भू-राजनीतिक मुद्दे चर्चा में हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति ट्रंप और यूरोपीय नेता एक साथ बैठकर इन समस्याओं का समाधान निकालेंगे. उन्होंने कहा, 'हम एक निष्पक्ष संस्था हैं और हमारा मंच बातचीत के लिए खुला है.'
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