मीडिया की दुनिया से एक बहुत ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है. दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अखबारों में शुमार 'द वॉशिंगटन पोस्ट' (The Washington Post) ने अपने स्टाफ में अब तक की सबसे बड़ी कटौती का ऐलान किया है. कंपनी ने एक झटके में अपने कुल कर्मचारियों में से करीब 33% (एक-तिहाई) स्टाफ को नौकरी से निकाल दिया है.इस छंटनी के फैसले से अखबार की ग्लोबल न्यूजरूम और इंटरनेशनल कवरेज को सबसे बड़ा झटका लगा है.
ईशान थरूर भी छंटनी के शिकार, इंटरनेशनल टीम पर सबसे ज्यादा असर
इस छंटनी में सीनियर फॉरेन कॉलमनिस्ट इशान थरूर भी शामिल हैं. इशान थरूर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं और 2017 से वॉशिंगटन पोस्ट में लोकप्रिय WorldView कॉलम लिख रहे थे,जिसे लाखों लोग पढ़ते थे.
इन बड़े पदों पर भी गिरी गाज, भारत से लेकर चीन तक असर
वॉशिंगटन पोस्ट की यह छंटनी इतनी बड़ी है कि इसने अखबार की इंटरनेशनल रिपोर्टिंग की कमर तोड़ दी है. रिपोर्ट के अनुसार, अखबार ने अपने न्यू दिल्ली ब्यूरो चीफ (Pranshu Verma), एशिया एडिटर (Anna Fifield), सिडनी, काहिरा और सिडनी के ब्यूरो चीफ समेत पूरे मिडिल ईस्ट की रिपोर्टिंग टीम को निकाल दिया है. इसके अलावा चीन, ईरान और तुर्की में तैनात रिपोर्टर की भी छुट्टी कर दी गई है. एक्सपर्ट का कहना है कि जब दुनिया में तनाव बढ़ रहा है, ऐसे समय में एक बड़े अखबार का ग्लोबल कवरेज कम करना काफी चिंताजनक है.
स्पोर्ट्स और बुक्स सेक्शन भी बंद,पॉडकास्ट भी खत्म
सूत्रों के मुताबिक, छंटनी का असर सिर्फ इंटरनेशनल डेस्क तक सीमित नहीं है.है. वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने स्पोर्ट्स सेक्शन (Sports) को लगभग पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया है. इसके साथ ही बुक्स सेक्शन (Books) भी बंद कर दिया गया है और अखबार का लोकप्रिय डेली पॉडकास्ट "Post Reports" भी अब सुनाई नहीं देगा.मेट्रो डेस्क और बिजनेस टीम में भी भारी कटौती हुई है. कर्मचारियों को एक इंटरनल मेमो भेजकर कहा गया कि वे आज घर पर ही रहें और उन्हें ईमेल के जरिए उनकी छंटनी की सूचना दी जाएगी.
क्यों लिया गया इतना कड़ा फैसला?
वॉशिंगटन पोस्ट अखबार के मालिक और दिग्गज बिजनेसमैन जेफ बेजोस (Jeff Bezos) पिछले कुछ समय से मैनेजमेंट पर मुनाफे (Profitability) में लौटने का दबाव बना रहे थे. अखबार के एग्जीक्यूटिव एडिटर मैट मरे ने कहा कि कंपनी के भविष्य को सुरक्षित रखने और स्टैबिलिटी लाने के लिए यह रीकंस्ट्रक्शन जरूरी था.
हालांकि, पूर्व एडिटर-इन-चीफ मार्टी बैरन ने इसे अखबार के इतिहास का सबसे 'काला दिन' करार दिया है. उन्होंने कहा कि टॉप मैनेमेंट के गलत फैसलों की वजह से लाखों सब्सक्राइबर्स ने अखबार का साथ छोड़ दिया, जिसका खामियाजा अब कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है.
वॉशिंगटन पोस्ट के संकट की 3 सबसे बड़ी वजहें
आइए समझते हैं कि आखिर इतने बड़े अखबार की हालत इतनी खराब क्यों हुई....
1. पैसों की भारी तंगी और ऑडिएंस की बेरुखी
वॉशिंगटन पोस्ट के लिए पिछला साल किसी बुरे सपने जैसा रहा. 2024 में इसे करीब ₹840 करोड़ ($100 मिलियन) का भारी नुकसान हुआ. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि साल 2020 के मुकाबले अब इसके आधे ऑडिएंस गायब हो चुके हैं. डिजिटल युग में लोग अब खबरें पढ़ने के लिए पुराने तरीकों को छोड़ रहे हैं.
2. इस फैसले से फूटा सब्सक्राइबर्स का गुस्सा
जब अमेरिका में चुनाव का माहौल था, तब अखबार के मालिक जेफ बेजोस ने एक बड़ा फैसला लिया. उन्होंने अखबार को कमला हैरिस का समर्थन करने से रोक दिया. यह बात ऑडिएंस को इतनी चुभी कि करीब 2.5 लाख लोगों ने गुस्से में अपना सब्सक्रिप्शन ही कैंसिल कर दिया. इससे अखबार को न सिर्फ पैसे का घाटा हुआ, बल्कि उसकी साख पर भी आंच आई.
3. AI के जमाने में पुराना स्ट्रक्चर
मैनेजमेंट का मानना है कि अखबार अभी भी 'पुराने जमाने' के आधार पर चल रहा है, जब लोग सुबह अखबार आने का इंतजार करते थे. आज दुनिया बदल चुकी है; अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI ) और कम खर्च वाले डिजिटल कंटेंट का बोलबाला है. अखबार का मौजूदा स्ट्रक्चर बहुत महंगा है और वह आज के हाई-टेक दौर के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा है.
1877 में स्थापित The Washington Post, जिसने वॉटरगेट जैसे घोटालों का पर्दाफाश किया, अब खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है.वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक जेफ बेजोस ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.














