Tata Trust Row: रतन टाटा के करीबी रहे मेहली मिस्‍त्री की आपत्ति के बाद वेणु श्रीनिवासन का इस्तीफा! वजह कुछ और बताई

Resignation from Tata Trust: मिस्त्री का कहना था कि वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह न तो पारसी हैं और न ही मुंबई के स्थाई निवासी, इसलिए उनकी नियुक्ति शुरू से ही अमान्य है.

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Tata Trust Row: मेहली मिस्‍त्री की आपत्ति की स्थिति में वेणु श्रीनिवासन ने बाई हीराबाई टाटा मेमोरिय‍ल ट्रस्‍ट से इस्‍तीफा दे दिया है

Venu Sriniwasan Resign from Tata's Alied Trust: दिग्गज औद्योगिक घराने टाटा से जुड़े एक ट्रस्ट में 'बवाल' के बीच दिग्‍गज उद्योगपति और TVS मोटर्स के चेयरमैन एमिरेट्स वेणु श्रीनिवासन ने इस्‍तीफा दे दिया है. PTI ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है. रतन टाटा के करीबी रहे पूर्व ट्रस्‍टी मेहली मिस्‍त्री की आपत्ति के दो दिन बाद श्रीनिवासन के इस्‍तीफे की खबर सामने आई है. हालांकि श्रीनिवासन ने इस आपत्ति या शिकायत को कारण नहीं बताया है. TVS मोटर्स के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन ने, टाटा ट्रस्ट की छतरी के नीचे चल रहे एक एलाइड ट्रस्ट 'बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन' (BHJTNCI) के दो डिप्‍टी चेयरमैन सदस्‍यों में से एक थे. 

श्रीनिवासन ने इस्‍तीफे के पीछे बताई ये वजह 

सूत्रों के मुताबिक, हालांकि उन्होंने इसके पीछे अपनी अन्य व्यावसायिक प्रतिबद्धताओं का हवाला दिया है, लेकिन यह कदम टाटा ट्रस्ट्स के पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री की ओर से उठाई गई चुनौती के बाद आया है. मेहली मिस्त्री, जो एम पल्लोनजी ग्रुप के प्रमोटर हैं और रतन टाटा के करीबी रहे हैं, ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज कराई है. इस शिकायत में उन्होंने BHJTNCI के बोर्ड में वेणु श्रीनिवासन और पूर्व IAS अधिकारी विजय सिंह की नियुक्ति को चुनौती दी थी. मिस्त्री का दावा है कि ये दोनों ट्रस्टी उस 103 साल पुरानी ट्रस्ट डीड (1923) में निर्धारित योग्यता मापदंडों को पूरा नहीं करते हैं.

विवाद की जड़ में पारसी विरासत और पुरानी शर्तें

मिस्त्री की मुख्य दलील ट्रस्ट डीड की धारा 6 और 18 पर टिकी है. इन धाराओं के अनुसार, BHJTNCI का ट्रस्टी बनने के लिए दो अनिवार्य शर्तें हैं- पारसी जोरोस्ट्रियन धर्म का अनुयायी होना और मुंबई में स्थायी निवासी होना. मिस्त्री का कहना था कि वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह न तो पारसी हैं और न ही मुंबई के स्थाई निवासी, इसलिए उनकी नियुक्ति शुरू से ही अमान्य है. उन्होंने यहां तक कहा कि कानूनन ऐसे ट्रस्टियों को 'डीम्ड डेड' (मृत मान लिया गया) समझा जाना चाहिए.

मिस्त्री ने इस मामले को और गंभीर बनाते हुए आरोप लगाया है कि इन पदों पर बने रहना भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2024 और महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के समान है. उन्होंने चैरिटी कमिश्नर से सभी ट्रस्टियों से हलफनामा मांगे जाने की मांग की है, जिसमें वे अपने धर्म और निवास की पुष्टि करें.

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क्या है बाई हीराबाई ट्रस्ट और मौजूदा स्‍ट्रक्‍चर?

सरल भाषा में समझें तो 'टाटा ट्रस्ट्स' एक छतरी (Umbrella) की तरह है, जिसके नीचे कई ट्रस्ट काम करते हैं. बाई हीराबाई ट्रस्ट (BHJTNCI) इसी छतरी के नीचे आने वाला एक सहयोगी ट्रस्ट है, जो 1923 से नवसारी (गुजरात) में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पारसी समुदाय की सेवा कर रहा है. वर्तमान में इसके बोर्ड में नोएल टाटा (अध्यक्ष), वेणु श्रीनिवासन (उपाध्यक्ष), विजय सिंह (उपाध्यक्ष), जिमी एन. टाटा, दारियस खंबाटा और जहांगीर एच.सी. जहांगीर शामिल हैं.

बता दें कि पिछले साल टाटा ट्रस्ट्स में आंतरिक कलह के बाद यह मामला सरकार तक पहुंच गया था. तब टाटा ग्रुप के शीर्ष नेतृत्व ने गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की थी. सरकार ने ट्रस्टों को सलाह दी थी कि वे अपने मतभेद सार्वजनिक न करें और मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाएं.

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मेहली मिस्त्री ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य अपनी बहाली नहीं, बल्कि रतन टाटा की विरासत, ट्रस्ट के संस्थापक की वसीयत और पारसी समुदाय के हितों की रक्षा करना है. नवंबर 2025 में मिस्त्री ने खुद बड़े गरिमापूर्ण तरीके से टाटा ट्रस्ट के पदों से इस्तीफा दे दिया था, ताकि कोई विवाद न बढ़े.  

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