चीनी के संकट पर सरकार का बड़ा फैसला, 10 लाख टन रॉ-शुगर के आयात पर पूरा टैक्‍स माफ

देश में चीनी की डिमांड और सप्‍लाई में अंतर के चलते पैदा हुए संकट के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने विदेशों से चीनी के आयात को टैक्‍स-फ्री कर दिया है. पूरी डिटेल अंदर पढ़ें.

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चीनी संकट पर सरकार का बड़ा फैसला
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देश में मौजूदा चीनी संकट को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. केंद्र ने 10 लाख टन रॉ-शुगर के ड्यूटी-फ्री इम्‍पोर्ट को मंजूरी दी है. यानी कि विदेशों से चीनी के आयात पर कोई शुल्‍क नहीं लगेगा. गुरुवार को DGFT यानी विदेश व्यापार महानिदेशालय ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है. घरेलू बाजार में चीनी का स्‍टॉक बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के टैरिफ-फ्री आयात की अनुमति दी है. 

सरकार का ये फैसला ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई और कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है. ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट से मिलों और रिफाइनरियों को कच्चा माल मिलेगा, जबकि घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी पहुंचने से त्योहारों से पहले कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है. 

DGFT ने नोटिफिकेशन में बताया है‍ कि टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत रॉ-शुगर का आयात किया जा सकेगा और ये सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी. नोटिफिकेशन के मुताबिक, कच्ची चीनी का आयात सामान्य तौर पर 'फ्री' रहेगा. हालांकि आयात, 10 लाख मीट्रिक टन की शुल्क-मुक्त सीमा और तय शर्तों के अधीन होगा.  

घरेलू बाजार में बेचनी होगी रिफाइंड चीनी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयात किए गए रॉ-शुगर से तैयार की गई रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य होगा. यानी इस योजना के तहत आयात की गई चीनी को दोबारा निर्यात नहीं किया जा सकेगा.

साफ है कि सरकार ये नहीं होने देना चाहती कि ड्यूट-फ्री शुगर इंपोर्ट कर व्‍यापारी उसे फ्रेश बनाकर फिर से विदेशों में बेच दें. सरकार चाहती है कि पूरी चीनी, घरेलू बाजार में ही उपलब्‍ध हो. इसके अलावा एक शर्त ये भी है कि आयात के समय जिस GST से छूट ली जाए, उसे इस व्यवस्था के तहत किए जाने वाले रूपांतरण में चुकाना होगा. सरकार ने यह भी कहा है कि इस प्रक्रिया पर कुछ अन्य शर्तें भी लागू रहेंगी. 

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इन कंपनियों को भी मौका

सरकार ने उन कंपनियों को भी एक बार का विकल्प दिया है, जिन्हें SION E-52 के तहत Advance Authorisation जारी किया जा चुका है. ये कंपनियां अब इस योजना के तहत वास्तव में आयात की गई कच्ची चीनी की मात्रा को Advance Authorisation Scheme से TRQ Scheme में बदल सकती हैं. इसमें उस कच्ची चीनी से पहले से तैयार की जा चुकी और आगे तैयार होने वाली रिफाइंड चीनी भी शामिल होगी. इस फैसले का असर रॉ शुगर के आयात की गति, उपलब्ध कोटे और बाजार में रिफाइंड चीनी की आपूर्ति पर निर्भर करेगा. 

बता दें कि भारत ने अब तक जितनी भी चीनी आयात की है, उसमें सबसे ज्‍यादा आयात ब्राजील से किया है. साल 2024 के आंकड़े के मुताबिक, भारत 1.66 बिलियन डॉलर के आयात के साथ दुनिया का 5वां सबसे बड़ा रॉ शुगर आयातक बन गया. इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी 1.64 बिलियन डॉलर के साथ ब्राजील की रही. इसी अवधि में, ब्राजील, फ्रांस और जर्मनी भारत के लिए कच्चे चीनी आयात के सबसे तेजी से बढ़ते स्रोत बनकर उभरे.  

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