Stock Market Today : अमेरिकी टैरिफ डेडलाइन को लेकर सहमा शेयर बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

Stock Market Updates July 7, 2025: शेयर बाजार के निवेशक 9 जुलाई की अमेरिकी टैरिफ डेडलाइन पर नजर बनाए हुए हैं और किसी बड़े फैसले से पहले 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपना रहे हैं.

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Stock Market News Updates: पिछले हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लगभग 0.7 प्रतिशत तक गिरे थे.
नई दिल्ली:

आज यानी सोमवार, 7 जुलाई 2025 को भारत के शेयर बाजारों की शुरुआत सुस्त रही.  निवेशक इस हफ्ते अमेरिका की टैरिफ डेडलाइन को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं. हफ्ते के पहले कारोबारी दिन प्री-ओपनिंग के दौरान बीएसई सेंसेक्स 34.81 अंक की हल्की गिरावट के साथ 83,398.08 पर जबकि निफ्टी 50 10.55 अंक गिरकर 25,450.45 पर नजर आया.

वहीं शुरुआती कारोबार में सुबह 9:18 बजे सेंसेक्स 123.33 अंक (0.15%) गिरकर 83,309.56 पर और निफ्टी 43.20 अंक (0.17%) फिसलकर  25,417.80 पर ट्रेड कर रहा था.

निफ्टी बैंक सहित  मिडकैप-स्मॉलकैप में भी गिरावट

शुरुआती कारोबार में निफ्टी बैंक 50.95 अंक या 0.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 56,980.95 पर था.निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 8.20 अंक या 0.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,669.55 पर कारोबार कर रहा था. निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 7.60 अंक या 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,025.45 पर था.

BSE के टॉप लूजर्स और गेनर्स

इस बीच, सेंसेक्स के शेयरों  में बीईएल, टेक महिंद्रा, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, एसबीआई, टाटा स्टील और आईसीआईसीआई बैंक टॉप लूजर्स रहे. ट्रेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स और एचडीएफसी बैंक टॉप गेनर्स रहे.

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अमेरिकी  टैरिफ पॉलिसी के चलते बना दबाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उनका प्रशासन कुछ देशों के साथ ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने के करीब है और बाकी देशों को 9 जुलाई तक टैरिफ रेट के बारे में सूचित किया जाएगा. ये नई दरें 1 अगस्त 2025 से लागू होंगी. हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई स्पष्ट दिशानिर्देश या आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आया है, जिससे बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.

ट्रंप ने अप्रैल में 10 प्रतिशत बेस टैरिफ की घोषणा की थी, जिसे बाद में जुलाई 9 तक के लिए टाल दिया गया था. अब यह तय माना जा रहा है कि 1 अगस्त से प्रभावित देशों पर टैरिफ लागू हो जाएंगे, जिनमें भारत का नाम भी शामिल है, क्योंकि अब तक भारत और अमेरिका के बीच कोई नया ट्रेड एग्रीमेंट नहीं हुआ है.

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बीते हफ्ते सेंसेक्स-निफ्टी लगभग 0.7% गिरे 

पिछले हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लगभग 0.7 प्रतिशत तक गिरे थे. सेंसेक्स में 626.01 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी. इसी दौरान एफआईआई  यानी विदेशी निवेशक लगातार पांचवें दिन भारतीय शेयरों में बिकवाली करते नजर आए. वहीं, शुक्रवार को शेयर बाजार हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ था. सेंसेक्स 193.42 अंक की तेजी के साथ 83,432.89 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 55.70 अंक चढ़कर 25,461 पर बंद हुआ.

अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर भी चिंताएं

अमेरिका में महंगाई और टैरिफ बढ़ने की आशंका के चलते यह उम्मीद की जा रही है कि फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा. इस साल अब सिर्फ दो बार छोटी कटौती की संभावना जताई जा रही है. बीते हफ्ते राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ा टैक्स और खर्च से जुड़ा बिल साइन किया है, जिससे अमेरिका का कुल कर्ज 36.2 ट्रिलियन डॉलर हो चुका है और इसमें 3 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा होने का अनुमान है.

ग्लोबल मार्केट्स में भी कमजोरी

एशिया-पैसिफिक मार्केट में भी मंदी का माहौल है. जापान का निक्केई 225 0.26 प्रतिशत गिरा, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.48 प्रतिशत नीचे रहा, और ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 सपाट खुला.वहीं, अमेरिका के स्टॉक फ्यूचर्स भी गिरावट में ट्रेड कर रहे हैं. डाउ जोंस फ्यूचर्स 146 पॉइंट नीचे हैं, जबकि S&P 500 और Nasdaq 100 फ्यूचर्स में भी  0.39 और 0.42 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है.

अमेरिकी बाजारों में आखिरी कारोबारी सत्र गुरुवार को डाउ जोंस 344.11 अंक या 0.77 प्रतिशत की बढ़त के साथ 44,828.53 पर बंद हुआ. एसएंडपी 500 इंडेक्स 51.93 अंक या 0.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ 6,279.35 पर बंद हुआ और नैस्डैक 207.97 अंक या 1.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 20,601.10 पर बंद हुआ.

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सोना-चांदी की कीमतों में भी गिरावट

आज सोने की कीमतों में भी गिरावट देखी गई क्योंकि अमेरिका की टैरिफ डेडलाइन को लेकर राहत की उम्मीद ने सुरक्षित निवेश की मांग को कमजोर किया है.स्पॉट गोल्ड 0.6 प्रतिशत गिरकर 3,314.21 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3,322 डॉलर पर ट्रेंड कर रहे हैं. वहीं, स्पॉट सिल्वर 0.8 प्रतिशत गिरकर 36.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गई.

आगे कैसे रहेगी बाजार की चाल?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका की ओर से कोई फेवर करने वाला ट्रेड डील होता है और कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे अच्छे आते हैं, तो बाजार फिर से रिकॉर्ड ऊंचाई छू सकता है. लेकिन अगर इन दोनों में कोई भी उम्मीद पूरी नहीं हुई, तो बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है.

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फिलहाल शेयर बाजार के निवेशक 9 जुलाई की अमेरिकी टैरिफ डेडलाइन पर नजर बनाए हुए हैं और किसी बड़े फैसले से पहले 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपना रहे हैं.

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