ट्रंप की एक धमकी और 6 घंटे में डूब गए 13.65 लाख करोड़ रुपये, शेयर मार्केट की सुनामी को आसान भाषा में समझिए

ट्रंप की सिर्फ एक 'धमकी' ने भारतीय निवेशकों के 13.65 लाख करोड़ रुपये स्वाहा कर दिए. शेयर बाजार में आई इस 'सुनामी' को आसान भाषा में समझिए. आखिर क्यों लाल निशान पर डूबा सेंसेक्स और निफ्टी?

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Share Market Crash: शेयर मार्केट में आज की बड़ी गिरावट को समझें

सोमवार का दिन भारतीय शेयर बाजार (Share Market) के लिए किसी 'ब्लैक मंडे' से कम नहीं रहा. महज 6 घंटे के कारोबार में निवेशकों के 13.65 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. बाजार में आई इस सुनामी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की वह धमकी रही, जिसने पूरी दुनिया के निवेशकों को डरा दिया. भारतीय समयानुसार, सोमवार शाम 4:30 बजे के बाद उनका एक और बयान आया. वो ये कि ईरान के साथ सकारात्‍मक बातचीत जारी है, जो अगले 5 दिन तक जारी रहेगी और इसलिए अगले 5 दिन अमेरिका, ईरान के एनर्जी प्‍लांट्स पर हमले नहीं करेगा. ये बयान, बाजार के लिए सकारात्‍मक तो है, लेकिन मार्केट क्‍लोज होने के बाद ये बयान सामने आया. इसका असर अमेरिकी मार्केट पर दिख सकता है और मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भी रिकवरी दिख सकती है. आज निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए. इस गिरावट को आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं. 

क्यों क्रैश हुआ बाजार?

शेयर बाजार भावनाओं और भविष्य के अनुमानों पर चलता है. वीकेंड पर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि या तो 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (समुद्री रास्ता) खोलो वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहो. ईरान ने भी पलटवार की धमकी दे दी. इसका असर मार्केट पर पड़ना ही था.

इसका असर ऐसे हुआ

  • कच्चे तेल का डर: भारत अपनी जरूरत का 80% तेल विदेशों से मंगाता है. युद्ध की आहट से तेल महंगा होने का डर बढ़ा. तेल महंगा मतलब, पेट्रोल-डीजल महंगा, माल ढुलाई महंगी और अंत में हर चीज की महंगाई.
  • मुनाफावसूली (Profit Booking): जब युद्ध या जियो-पॉलिटिकल तनाव का माहौल होता है, तो बड़े निवेशक (FIIs) जोखिम नहीं लेना चाहते. वे अपना पैसा बाजार से निकालकर सुरक्षित जगहों (जैसे सोना या डॉलर) में लगाने लगते हैं. जब हर कोई बेचने दौड़ता है, तो शेयर के दाम गिर जाते हैं.

आंकड़ों में तबाही का मंजर

सोमवार को बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दौर चला कि सेंसेक्स और निफ्टी संभल ही नहीं पाए. सेंसेक्स करीब 1,836 अंक (2.46%) गिरकर 72,696 पर बंद हुआ. निफ्टी, 601 अंक (2.60%) टूटकर 22,512 पर आ गया. मिडकैप और स्मॉलकैप में गिरावट और भी भयानक (करीब 4%) रही, यानी छोटे निवेशकों को ज्यादा चोट लगी.

कैसे डूबे 13.65 लाख करोड़ रुपये?

कई लोग सोचते हैं कि पैसा डूबने का मतलब क्या है? इसे ऐसे समझिए कि शुक्रवार को बीएसई (BSE) में लिस्टेड सभी कंपनियों की कुल वैल्यू (मार्केट कैप) करीब 428.76 लाख करोड़ थी. सोमवार शाम को ये गिरकर 415.11 लाख करोड़ रह गई. यानी कागजों पर कंपनियों की वैल्यू 13.65 लाख करोड़ कम हो गई. इसे ही 'निवेशकों की संपत्ति का डूबना' कहा जाता है.

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एक्सपर्ट की राय

मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह के मुताबिक, बाजार फिलहाल 'बेयरिश' (मंदी की गिरफ्त में) है. जब तक मिडिल ईस्ट का तनाव कम नहीं होता और तेल की सप्लाई सुनिश्चित नहीं होती, तब तक बाजार में ऐसी ही अस्थिरता बनी रह सकती है. निवेशकों के लिए फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति है. हालांकि ट्रंप के हालिया बयान का असर, मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है. उम्‍मीद है कि मंगलवार बाजार के लिए 'मंगल' लेकर आएगा.

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