Anthropic AI से IT सेक्टर में भूचाल! क्या है ‘SaaSpocalypse’ और क्यों धड़ाम गिरे टेक दिग्गजों के शेयर,₹24 लाख करोड़ स्वाहा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आईटी सेक्टर की कंपनियों के पास खुद को बदलने के लिए 10 साल का समय है. इंडस्ट्री को अब मैनपावर के बजाय 'आउटकम-बेस्ड' AI प्लेटफॉर्म मॉडल पर शिफ्ट होना होगा.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
Jefferies का मानना है कि भारतीय IT सेक्टर अब AI के खतरों से सुरक्षित नहीं रहा.
नई दिल्ली:

दुनिया के टेक मार्केट में इस वक्त एक ऐसी हलचल मची है जिसे एक्सपर्ट्स 'SaaSpocalypse' यानी सॉफ्टवेयर कंपनियों पर आया संकट कह रहे हैं. यह शब्द उस भयावह पल को दर्शाता है जब ग्लोबल मार्केट को यह एहसास हुआ कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ एक हेल्प टूल नहीं, बल्कि इंसानों का सीधा विकल्प बनता जा रहा है. निवेशकों ने अब यह मान लिया है कि AI सिर्फ एक फीचर नहीं है, बल्कि यह पूरा बिजनेस मॉडल बदलने वाली ताकत बन चुका है.

3 फरवरी 2026 को ग्लोबल मार्केट ने एक ऐसा ' क्रैश' देखा, जिसने दिग्गज आईटी कंपनियों के करीब 285 बिलियन डॉलर (लगभग ₹24 लाख करोड़) रातों-रात स्वाहा कर दिए. इस गिरावट की आंच से भारतीय आईटी दिग्गज भी नहीं बच पाए.

क्या है इस तबाही की वजह?

इस पूरे बाजार क्रैश के पीछे Anthropic कंपनी का नया AI प्रोडक्ट 'Claude Cowork' है. अब तक हम जिस AI जैसे ChatGPT को जानते थे, वह सिर्फ हमारे सवालों के जवाब देता था. लेकिन 'Claude Cowork' एक कदम आगे निकल गया है; यह पूरे प्रोफेशनल वर्कफ्लो को कंपनी के सिस्टम के भीतर खुद चला सकता है. आसान शब्दों में कहें तो AI अब सिर्फ एक चैट असिस्टेंट नहीं रहा, बल्कि वह ऑफिस का एक एक्टिव 'डिजिटल एग्जीक्यूटिव' बन गया है.

11 प्लगइन्स और 'डिजिटल वर्कफोर्स' लॉन्च

एन्थ्रोपिक ने 11 ऐसे ओपन-सोर्स प्लगइन्स लॉन्च किए हैं जो कानूनी, फाइनेंस, सेल्स और कस्टमर सपोर्ट जैसे विभागों में इंसानों की जगह लेने के लिए तैयार हैं. ये सिर्फ टूल्स नहीं, बल्कि 'ऑटोनॉमस एजेंट्स' हैं. उदाहरण के लिए, इनका 'लीगल प्लगइन' उन जटिल कॉन्ट्रैक्ट्स को मिनटों में सुलझा रहा है जिनके लिए अब तक बड़ी-बड़ी लीगल-टेक कंपनियों और इंसानी दिमाग की जरूरत होती थी.

यह टूल उन कामों को बिना किसी इंसानी मदद के कर सकता है जिनके लिए अब तक मोटी सैलरी वाले प्रोफेशनल रखे जाते थे. यह अकेले ही कॉन्ट्रैक्ट रिव्यू करना, रिस्क पहचानना,जांच करना और सरकारी नियमों (Compliance) को ट्रैक करने जैसे जटिल काम करने में सक्षम है. इसी काबिलियत ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या भविष्य में इन नौकरियों की जरूरत बचेगी?

वॉल स्ट्रीट में घबराहट और वैल्युएशन का संकट

दुनिया की बड़ी ब्रोकरेज फर्म्स जैसे मॉर्गन स्टेनली और जेफरीज ने चेतावनी दी है कि आईटी कंपनियों का 'सुरक्षा घेरा' (Moat) टूट चुका है. वहीं Jefferies का मानना है कि भारतीय IT सेक्टर अब AI के खतरों से सुरक्षित नहीं रहा.  कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने इसे एक 'Permanent Reset' कहा है, क्योंकि AI-ड्रिवन दुनिया में किसी कंपनी की भविष्य की कमाई का सटीक अंदाजा लगाना अब लगभग नामुमकिन हो गया है.

Advertisement

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह आईटी सेक्टर का अंत नहीं, बल्कि खुद को बदलने का 10 साल का रास्ता है.इंडस्ट्री को अब मैनपावर के बजाय 'आउटकम-बेस्ड' AI प्लेटफॉर्म मॉडल पर शिफ्ट होना होगा.

  • 2026-27 तक कंपनियां इस 'ऑटोमेशन शॉक' से बचने की कोशिश करेंगी.
  • 2029 तक इंडस्ट्री को अपना बिजनेस मॉडल बदलना होगा, जहाँ क्लाइंट इंजीनियरों के लिए नहीं, बल्कि हल किए गए 'इंसिडेंट्स' के आधार पर पैसे देंगे.
  • 2036 तक भारतीय आईटी कंपनियां 'बॉडी शॉप'  के बजाय 'ग्लोबल एआई इंफ्रास्ट्रक्चर' की रीढ़ बनेंगी, जो दुनिया भर के एआई एजेंट बेड़े को मैनेज करेंगी.

Featured Video Of The Day
Mumbai से AIMIM नेता गिरफ्तार, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने का शक | BREAKING NEWS