Share Market Crash: शेयर बाजार के लिए सोमवार का दिन 'ब्लैक मंडे' साबित हुआ. मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच छिड़ी जंग के चलते घरेलू शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया. इस गिरावट में निवेशकों के करीब 11 लाख करोड़ रुपये देखते ही देखते स्वाहा हो गए. दिन के कारोबार के दौरान BSE सेंसेक्स 1,800 अंकों से ज्यादा फिसलकर 79,500 के स्तर से नीचे आ गया. वहीं, NSE निफ्टी भी 2% से अधिक की गिरावट के साथ 24,650 के स्तर के नीचे ट्रेड करता नजर आया. बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दबाव था कि एक समय सेंसेक्स 2,743 अंक तक गोता लगा गया था.
निवेशकों के 10 लाख करोड़ साफ
सोमवार को एक समय तक बाजार ने ऐसा गोता लगाया कि मार्केट कैप से करीब 10 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए. शुक्रवार को मार्केट क्लोजिंग के समय BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,63,25,200 करोड़ रुपये था, जो सोमवार की दोपहर घटकर एक समय 4,52,10,871 करोड़ रुपये रह गया. यानी कुल मार्केट कप में करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट आ गई. हालांकि बाद में स्थिति सुधरी.
बाजार में गिरावट की 4 बड़ी वजहें
- ईरान-इजरायल युद्ध: वीकेंड पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की एक कथित मिसाइल हमले में मौत के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है. अमेरिका और इजरायल के इस कदम के बाद ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे तेल के मामले में समृद्ध इस इलाके में अनिश्चितता बढ़ गई है.
- कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग: युद्ध के चलते सप्लाई रुकने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 6% उछलकर 77 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं. जानकारों का मानना है कि हालात नहीं सुधरे तो तेल 100 डॉलर तक पहुंच सकता है.
- रुपये में बड़ी गिरावट: विदेशी निवेशकों की बिकवाली और महंगे तेल के कारण भारतीय रुपया पहली बार एक महीने के निचले स्तर यानी 91 रुपये प्रति डॉलर के पार निकल गया.
- विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ गया है.
बड़ी गिरावट के बावजूद डिफेंस शेयर चमके
बाजार में मारुति सुजुकी, इंडिगो और एलएंडटी (L&T) जैसे दिग्गज शेयरों में 4 से 7% तक की भारी गिरावट देखी गई. ऑटो और ऑयल एंड गैस सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे. हालांकि, युद्ध की खबरों के बीच डिफेंस सेक्टर के शेयरों में खरीदारी दिखी और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए.
निवेशक अब क्या करें?
बाजार में मची इस अफरातफरी के बीच विशेषज्ञों ने निवेशकों को धैर्य रखने की सलाह दी है. मार्केट एक्सपर्ट्स संकट के समय घबराहट में शेयर बेचने को गलत रणनीति बताते रहे हैं. उन्होंने कहा, 'इतिहास गवाह है कि युद्ध या महामारी जैसे संकटों का असर 6 महीने बाद बाजार पर नहीं रहता.' विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बाजार और गिरता है, तो अच्छे क्वालिटी वाले बैंकिंग, डिफेंस और ऑटो शेयरों को धीरे-धीरे खरीदने का ये एक मौका हो सकता है.
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