रुपये की टेंशन दूर, 690 बिलियन डॉलर का भंडार है न! खुश कर देगी SBI की रिपोर्ट, जानिए RBI ने इसे कैसे किया मजबूत

रुपये की इस मजबूती के पीछे रिजर्व बैंक की 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसे कड़े कदम हैं. RBI ने मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी (Speculation) को रोकने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं. आगे और क्‍या करना होगा, यहां जानें विस्‍तार से.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
SBI Research रिपोर्ट ने बताया है कि क्‍यों भारतीय करेंसी रुपये के लिए फिलहाल टेंशन नहीं है, RBI ने क्‍या-क्‍या कदम उठाए हैं.

जब से मिडिल ईस्‍ट में जंग शुरू हुई, तब से मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी है. इसके बुरे असर से भारतीय करेंसी भी अछूती नहीं रही. रुपये ने गिरावट का रिकॉर्ड बनाया और फिर RBI के हस्‍तक्षेप से रुपया 13 साल की सबसे बड़ी वन-डे बढ़त का रिकॉर्ड बनाने तक भी पहुंचा. वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध के हालातों के बीच भारतीय रुपये के उतार-चढ़ाव को लेकर मची ऊहापोह पर अब विराम लगता दिख रहा है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की ताजा रिसर्च रिपोर्ट ने न केवल रुपये की स्थिति को स्पष्ट किया है, बल्कि निवेशकों और आम जनता को आश्वस्त भी किया है.

रिपोर्ट का सीधा संदेश है- घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रिजर्व बैंक (RBI) के पास $690 बिलियन (करीब ₹57 लाख करोड़) का सुरक्षा कवच मौजूद है.

केवल रुपया ही अकेले नहीं गिरा!

SBI रिसर्च के अनुसार, 27 फरवरी के बाद रुपये में जो गिरावट देखी गई, वह अन्य वैश्विक मुद्राओं के रुख के बिल्कुल अनुरूप है. दिलचस्प आंकड़ा यह है कि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच जब रुपया 6.4% गिरा, तब डॉलर इंडेक्स में भी 6% की कमी आई थी. सामान्यतः डॉलर गिरने पर दूसरी मुद्राएं बढ़ती हैं, लेकिन भारतीय बाजार में 'शॉक एब्जॉर्बर' की रणनीति के तहत रुपये को एक सीमा तक गिरने दिया गया ताकि अर्थव्यवस्था पर बाहरी झटकों का असर कम हो.

13 साल की सबसे बड़ी 'छलांग'

गुरुवार का दिन भारतीय मुद्रा के लिए ऐतिहासिक रहा. रुपये ने पिछले 13 वर्षों की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त दर्ज की और डॉलर के मुकाबले 93.10 के स्तर पर बंद हुआ. दिन के दौरान इसमें 1.7% तक का उछाल देखा गया, जो सितंबर 2013 के बाद की सबसे बड़ी मजबूती है. यह तेजी तब आई जब एशियाई बाजारों (निक्केई, हैंग सेंग) में 3% तक की गिरावट थी और कच्चा तेल (ब्रेंट क्रूड) $106 के पार पहुंच गया था.

Advertisement

RBI ने कैसे कसा सट्टेबाजों पर शिकंजा?

रुपये की इस मजबूती के पीछे रिजर्व बैंक की 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसे कड़े कदम हैं. RBI ने मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी (Speculation) को रोकने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं-

  1. नॉन-डिलीवरी फॉरवर्ड पर रोक: बैंकों को निवासी और अनिवासी ग्राहकों के लिए ऐसे कॉन्ट्रैक्ट जारी करने से रोक दिया गया है.
  2. कॉन्ट्रैक्ट री-बुकिंग पर प्रतिबंध: कंपनियों को रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को फिर से बुक करने की अनुमति नहीं दी जा रही है.
  3. ओपन पोजीशन की सीमा: बैंकों की नेट ओपन पोजीशन को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया गया है.

$700 बिलियन का 'सुरक्षा कवच'

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब $700 बिलियन के पार है, जिसकी चाबी पूरी तरह RBI के पास है. समझिए, ये भंडार क्यों महत्वपूर्ण है- 

Advertisement
  1. आयात की क्षमता: यह भंडार 10 महीने से अधिक के आयात बिल का भुगतान करने के लिए पर्याप्त है.
  2. कर्ज का कम दबाव: भारत का अल्पकालिक विदेशी कर्ज कुल भंडार के 20% से भी कम है.
  3. बाजार में हस्तक्षेप: जब भी रुपया ज्यादा गिरता है, RBI इसी भंडार से डॉलर निकालकर बाजार में बेचता है, जिससे रुपये को तत्काल मजबूती मिलती है.
  4. सुरक्षित निवेश: यह पैसा केवल डॉलर में नहीं, बल्कि सोने (Gold) और विदेशी सरकारी बॉन्ड्स में सुरक्षित रखा गया है.

SBI रिसर्च के अहम सुझाव

भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए SBI ने सुझाव दिया है कि सरकार को तेल कंपनियों (OMCs) के लिए एक 'स्पेशल डॉलर विंडो' खोलनी चाहिए. चूंकि तेल कंपनियों को रोज $250-300 मिलियन की जरूरत होती है, इस विंडो से बाजार में डॉलर की वास्तविक मांग और आपूर्ति का सही पता चल सकेगा और बेवजह की अस्थिरता कम होगी.

कुल मिलाकर, ट्रंप के भाषण के बाद सुधरे 'रिस्क सेंटीमेंट' और RBI की सख्त निगरानी ने रुपये को नई जान दी है. $700 बिलियन का यह भंडार भारत के लिए वह 'आर्थिक ढाल' है, जो किसी भी वैश्विक संकट में देश की साख को गिरने नहीं देगा.

ये भी पढ़ें:  विदेशी हो जाएगा ये देसी बैंक! RBI ने दी मंजूरी, दुबई की दूसरी सबसे बड़ी बैंकिंग कंपनी थामेगी कमान 

Featured Video Of The Day
Black Marketing of Cylinders: जंग के बीच ऐसे हुआ काले कारोबार का भंडाफोड़! | Operation Munafakhor