Ramadan 2026: इस्लामी कैलेंडर के सबसे पाक महीने रमजान का आगाज हो चुका है. इस समय मुस्लिम संप्रदाय के लोग दुआएं कुबूल करने की मन्नतें मांगते हैं और रोजा रखते हैं. रमजान के समय भारतीय बाजार भी गुलजार रहते हैं, खासतौर पर हलाल मार्केट. देश में हलाल सर्टिफाइड फूड की डिमांड में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है. रिसर्च एंड मार्केट्स की रिपोर्ट के अनुसार हलाल फूड मार्केट ने 2025 में 297.66 मिलियन डॉलर का आंकड़ा छुआ है, जिसके 2031 तक 554.35 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.
रिसर्च एंड मार्केट्स की रिपोर्ट से पता चल रहा है कि भारत का हलाल फूड मार्केट 10.6% की सलाना ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ रही है.
क्यों बढ़ रही हलाल प्रोडक्ट्स की डिमांड
- सिर्फ धर्म नहीं, क्वालिटी पर फोकस
इस जबरदस्त तेजी के पीछे कई अहम वजह हैं. सबसे बड़ी बात भारत की मुस्लिम आबादी है, जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी में से एक है. साथ ही लोग अब अपने खान-पान को लेकर जागरूक हो गए हैं और वो धर्म के साथ-साथ सेहत का ध्यान रखते हुए इन हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स को चुन रहे हैं. ग्राहकों का मानना है कि हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स ज्यादा सेफ और बिना मिलावट के होते हैं. खासतौर पर प्रोसेस्ड फूड, डेयरी और स्नैक्स में हलाल प्रोडक्ट्स की डिमांड में उछाल देखा गया है.
- डिजिटल क्रांति और ई-कॉमर्स का इस्तेमाल
आजकल अमेजन, बिग बास्केट और दूसरे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने हलाल प्रोडक्टस की पहुंच को आसान बना दिया है. साथ ही शहर में रहे रहे युवा अब लेबल पढ़कर खरीदारी करते हैं. वो जानना चाहते हैं कि जो वो खा रहे हैं, उसका सोर्स क्या है और इसे कैसे तैयार किया गया.
- तकनीक का हो रहा इस्तेमाल
ब्लॉकचेन जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल अब हलाल सर्टिफिकेशन मे हो रहा है, जिससे कंज्यूमर का भरोसा और बढ़ा है.
भारतीय कंपनियों के लिए मौका
हलाल मार्केट की यह ग्रोथ देसी फूड मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए एक सुनहरा मौका है. मेक इन इंडिया अभियान के तहत भारत अब वैश्विक स्तर पर हलाल मीट और प्रोसेस्ड फूड का एक बड़ा एक्सपोर्टर बनकर सामने आ रहा है. वहीं, मिडिल ईस्ट देशों में देश के हलाल प्रोडक्ट्स की बड़ी डिमांड है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हो रही है.














