Petrol, Diesel Prices On August 3: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है और ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ा है? आइए जानते हैं 3 अगस्त को आपके शहर में पेट्रोल-डीजल का ताजा रेट क्या है और ऑयल मार्केट म में आखिर ऐसा क्या हुआ जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई.
Petrol-Diesel Price Today: आज आपके शहर में कितना है पेट्रोल-डीजल का रेट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश के ज्यादातर बड़े शहरों में 3 अगस्त को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. कुछ शहरों में मामूली पैसे की बढ़ोतरी या कमी देखने को मिली, लेकिन दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे प्रमुख शहरों में दाम पहले जैसे ही बने हुए हैं.
3 अगस्त को पेट्रोल का रेट
- दिल्ली: 102.12 रुपये प्रति लीटर
- मुंबई: 111.12 रुपये प्रति लीटर
- कोलकाता: 113.43 रुपये प्रति लीटर
- चेन्नई: 107.75 रुपये प्रति लीटर
- हैदराबाद: 115.74 रुपये प्रति लीटर
- बेंगलुरु: 110.93 रुपये प्रति लीटर
3 अगस्त को डीजल का रेट
- दिल्ली: 95.20 रुपये प्रति लीटर
- मुंबई: 97.78 रुपये प्रति लीटर
- कोलकाता: 99.78 रुपये प्रति लीटर
- चेन्नई: 99.57 रुपये प्रति लीटर
- हैदराबाद: 103.90 रुपये प्रति लीटर
- बेंगलुरु: 98.79 रुपये प्रति लीटर
ट्रंप के बयान के बाद कच्चे तेल में आई नरमी
सोमवार को इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. इसकी बड़ी वजह OPEC+ का सितंबर महीने से रोजाना करीब 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने का फैसला रहा. इसके साथ ही 2023 में लागू किए गए स्वैच्छिक उत्पादन कटौती के एक बड़े चरण की वापसी पूरी हो गई है.हालांकि, एक्सपर्ट का मानना है कि इस फैसले का ग्लोबल सप्लाई पर तुरंत बड़ा असर देखने को नहीं मिलेगा. इसकी वजह यह है कि ईरान और यूक्रेन से जुड़े तनाव के चलते खाड़ी क्षेत्र, रूस और कजाकिस्तान से होने वाली तेल आपूर्ति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है.
बाजार को उम्मीद थी कि OPEC+ चौथी तिमाही में उत्पादन बढ़ाने की रफ्तार पर रोक लगा सकता है. हालांकि, संगठन की ओर से सितंबर के बाद की इसको लेकर कोई नई घोषणा नहीं की गई.
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव सीधे देश के आयात बिल पर असर डालता है.अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे आयात खर्च बढ़ सकता है. साथ ही महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की हर हलचल पर भारत की नजर बनी रहती है.
जुलाई में पेट्रोल-डीजल की मांग क्यों बढ़ी?
जुलाई में देश की तीन सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की पेट्रोल और डीजल बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
आमतौर पर मानसून के दौरान पेट्रोल और डीजल की मांग कुछ कम हो जाती है, क्योंकि सिंचाई के लिए पंपों का इस्तेमाल घटता है और सड़क पर वाहनों की आवाजाही भी कम रहती है.लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार धीमी रहने की वजह से किसानों को बुवाई के दौरान लंबे समय तक डीजल पंप चलाने पड़े. यही कारण रहा कि जुलाई में फ्यूल की खपत सामान्य से ज्यादा रही.जून के मुकाबले जुलाई में आई हल्की गिरावट की एक वजह यह भी मानी जा रही है कि जून में स्कूल और कॉलेज की छुट्टियों के चलते लोगों ने ज्यादा यात्रा की थी, जिससे फ्यूल की मांग बढ़ गई थी.
पेट्रोल की बिक्री में करीब 10% की बढ़ोतरी, डीजल की मांग में भी तेजी
जुलाई में पेट्रोल की बिक्री सालाना आधार पर 9.7% बढ़कर 34.5 लाख टन रही. पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 31.4 लाख टन था.अगर पिछले वर्षों से तुलना करें तो जुलाई 2024 के मुकाबले बिक्री 15.1% और जुलाई 2023 के मुकाबले 36.1% ज्यादा रही. हालांकि, जून के मुकाबले इसमें 1.1% की हल्की गिरावट दर्ज की गई.
डीजल की बिक्री जुलाई में 10.7% बढ़कर 71.2 लाख टन पहुंच गई, जबकि पिछले साल जुलाई में यह 64.3 लाख टन थी.डीजल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल माल ढुलाई, खेती-किसानी, सिंचाई और भारी वाहनों में होता है.जुलाई 2024 की तुलना में डीजल की बिक्री 11.5% और 2023 की तुलना में 12.7% ज्यादा रही. हालांकि जून के मुकाबले इसमें 9.2% की कमी आई.
क्या आगे सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल?
कच्चे तेल की कीमतों में आई ताजा गिरावट से फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर नहीं करतीं. इसमें टैक्स, रिफाइनिंग लागत भी अहम भूमिका निभाती है. ऐसे में फिलहाल देश के ज्यादातर शहरों में तेल के दाम स्थिर बने हुए हैं और आगे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के फैसले पर नजर रहेगी.