मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव ने एक बार फिर दुनिया भर के तेल बाजार में हलचल मचा दी है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है, जिससे भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.आज यानी शुक्रवार, 24 अप्रैल की सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी तेजी देखी गई. मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (Brent Crude Futures) 1.17% उछलकर $106.3 प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी 1.12% बढ़कर $96.92 पर ट्रेड कर रहा है.
ईरान द्वारा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में एक मालवाहक जहाज पर कमांडो भेजने के वीडियो सामने आने के बाद बाजार में डर का माहौल है.
भारत में आज पेट्रोल-डीजल का भाव (Petrol-Diesel Rates in India)
अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 2022 से लगभग स्थिर हैं. दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर बना हुआ है. सरकार ने पिछले महीने ही एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती की थी ताकि तेल की ऊंची कीमतों का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर न पड़े. साथ ही, घरेलू बिक्री को प्राथमिकता देने के लिए फ्यूल एक्सपोर्ट पर भी टैक्स लगाया गया है.
क्या पेट्रोल-डीजल बढ़ेंगे दाम? सरकार ने दिया जवाब
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स जैसे कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज में दावा किया जा रहा था कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम ₹25 से ₹28 प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन खबरों को 'फेक और भ्रामक' बताते हुए साफ किया है कि सरकार के पास फिलहाल कीमतों को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. सरकार का कहना है कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पिछले चार सालों से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बावजूद कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.
कच्चा तेल महंगा होने से तेल कंपनियां झेल रही हैं भारी घाटा
मंत्रालय के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने की वजह से सरकारी तेल कंपनियां (PSUs) भारी घाटा उठा रही हैं. आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹20 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹100 प्रति लीटर का घाटा हो रहा है. इसके बावजूद, आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए सरकार ने पंप कीमतों को स्थिर रखा है. पिछले साल जो कच्चा तेल $70 पर था, वह इस महीने औसतन $113 के पार पहुंच गया है.
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20% हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है. ईरान द्वारा इस रास्ते पर नियंत्रण की कोशिशों और अमेरिका के साथ शांति वार्ता विफल होने से सप्लाई का जोखिम बढ़ गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अप्रैल के अंत तक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल नहीं हुई, तो तेल की कीमतें इस साल के नए रिकॉर्ड स्तर को छू सकती हैं.














