2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR चार्ज के विरोध में व्यापारी-कारोबारी संगठन ने एक बड़ा फैसला लिया है. 2 अक्टूबर को व्यापारी No UPI Day मनाएंगे. यानी उस दिन वे यूपीआई से पेमेंट नहीं लेंगे. 2 अक्टूबर को दुकानों, प्रतिष्ठानों, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में व्यापारी मर्चेंट वाले QR कोड को काले कपड़े से ढक कर रखेंगे. खरीदारी के बाद ग्राहकों से वे कैश में पेमेंट लेंगे या फिर डेबिट-क्रेडिट कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग के दूसरे तरीके से पेमेंट लेंगे.
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) और कुछ अन्य संगठनों ने ये प्रस्ताव रखा है. हालांकि CAIT यानी कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने ऐसे किसी विरोध प्रस्ताव से इनकार किया है. इधर, सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, UPI-MDR चार्ज को लेकर CAIT के सदस्यों से मिलेंगी.
MACCIA का क्या कहना है?
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के प्रेसिडेंट रवींद्र मंगवे का कहना है कि 2 अक्टूबर को No UPI Day के इस फैसले में अन्य संगठन भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर के 500 से ज्यादा प्रमुख व्यापारी संगठन इसमें भागीदार होंगे और वे UPI से पेमेंट नहीं लेंगे. ऐसा UPI ट्रांजैक्शन पर MDR चार्ज के विरोध में किया जा रहा है.
CAIT इसमें शामिल नहीं, NDTV से बोले चेयरमैन
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कहा है कि संगठन, इस विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं है. CAIT के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने NDTV से बातचीत में कहा कि No UPI Day का कॉल CAIT ने नहीं लिया है. अधिकारिक रूप से न तो कोई ऐसा फैसला लिया गया है और न ही देशभर के संगठन इसमें शामिल होने वाले हैं.
MACCIA के फैसले और CAIT से संबंध के सवाल पर उन्होंने कहा कि सैकड़ों व्यापारिक संगठन CAIT से जुड़े हैं, CAIT से संबद्ध हैं और MACCIA भी उन्हीं में से एक है, लेकिन उनके फैसले को CAIT का समर्थन नहीं है. उन्होंने कहा, 'कुछ संगठनों ने राजनीतिक हित साधने के लिए इस तरह विरोध जताने का फैसला लिया है.'
UPI पर MDR चार्ज के विरोध पर व्यापारियों का तर्क
व्यापारियों का तर्क है कि इस फैसले से करोड़ों कारोबारी प्रभावित हैं. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) भी इस फैसले के विरोध में है. CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने NDTV से बातचीत में कहा है कि सरकार के इस फैसले से देश के 6 करोड़ दुकानदारों, व्यापारियों और उद्यमियों में भारी निराशा है, क्योंकि ये उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ की तरह होगा.
उनका कहना है कि 3000 रुपये के पेमेंट पर 12 रुपये और 50,000 रुपये के पेमेंट पर 200 रुपये तक का चार्ज दुकानदार को देना होगा. इससे अंदेशा है कि 2000 से अधिक के UPI पेमेंट में 50% तक की गिरावट आ सकती है, जिससे सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान को झटका लग सकता है. इससे ग्राहक और दुकानदार फिर से कैश ट्रांजैक्शन की ओर लौटने लगेंगे. उनका कहना है कि सरकार ने इस फैसले पर फिर विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
तो क्या 2 अक्टूबर को UPI नहीं चलेगा?
यूपीआई पेमेंट का विरोध किस हद तक होगा, ये पक्के तौर इस विरोध में शामिल होने वाले संगठनों और व्यापारियों की संख्या पर निर्भर करता है. एक व्यापारिक संगठन के ही अधिकारी ने कहा कि ऐसा जरूरी नहीं है कि सारे व्यापारी-कारोबारी इस विरोध में शामिल होंगे. ऐसे में ये कहना सही नहीं होगा कि 2 अक्टूबर को यूपीआई पेमेंट नहीं चलेगा. 2,000 रुपये से कम के पेमेंट लेने में वैसे भी व्यापारियों को कोई परेशानी नहीं होनी है.