Strait of Hormuz Crisis: मिडिल ईस्ट में करीब 53 दिनों से चल रहे टकराव का असर अब पूरी दुनिया पर दिखने लगा है. इस टेंशन की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है. इस रास्ते पर लगभग 800 जहाज फंसे हुए हैं, जिससे पूरी दुनिया में सामान पहुंचने में दिक्कत हो रही है. खासतौर पर तेल, गैस, खाद, कीटनाशक जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई पर असर पड़ा है. अगर यही स्थिति ज्यादा दिन तक रही, तो दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं की रफ्तार धीमी हो सकती है. यानी महंगाई बढ़ने की आशंका है.
ग्रामीण विकास पर सरकार का खास ध्यान
सरकार का फोकस गांवों में रोजगार बढ़ाने, समय पर पैसा मिलने, घर बनाने, सड़कों को बनाने से जुड़ी योजनाओं को ठीक से लागू करने पर है.
रोजगार और मजदूरी से जुड़ी बातें
- मनरेगा पहले की तरह चलती रहेगी, जब तक नया VB–G RAM G Act, 2025 लागू नहीं हो जाता.
- मनरेगा में काम मांगने पर रोजगार मिलेगा और मजदूरी समय पर दी जाएगी. मजदूरों के सभी कानूनी अधिकार पहले जैसे ही रहेंगे.
- केंद्र सरकार की तय की गई मौजूदा मजदूरी दरें ही लागू रहेंगी.
- मजदूरी का भुगतान समय पर हो, इसके लिए सरकार करीब ₹17,744 करोड़ की पहली किस्त जारी कर रही है.
ग्रामीण विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमित शुक्ला ने बताया कि नया कानून लागू होने पर 125 दिनों का रोजगार देने की गारंटी का प्रस्ताव है. नई मजदूरी दरों का ऐलान बाद में अलग से किया जाएगा.
ग्रामीण आवास योजना पर जोर
गांवों में सभी को पक्का घर देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के तहत मार्च 2029 तक 4.95 करोड़ घर बनाने का टारगेट रखा गया है. घर बनाने के समान की कीमतों में बदलाव या सप्लाई की समस्या को ध्यान में रखते हुए लाभार्थियों को DBT के ज़रिए समय पर पैसा दिया जाएगा. AwaasSoft से काम की निगरानी होगी. घरों की जियो-टैगिंग होगी. अधूरे घरों को जल्दी पूरा करने पर ध्यान दिया जाएगा.
ग्रामीण सड़कों का काम जारी
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के जरिए राज्यों के भेजे गए प्रस्तावों को मौजूदा दरों पर मंजूरी दी जा रही है. PMGSY-I, II, III और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों की ज्यादातर सड़क योजनाएं मंजूर हो चुकी हैं और टेंडर प्रोसेस में हैं. PMGSY-IV के जरिए करीब 12,100 किलोमीटर सड़क निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है और इनके लिए भी टेंडर जारी हैं. उर्वरक प्लांट्स में गैस की सप्लाई बढ़ाने में जुटी सरकार ने दावा किया है कि जून से शुरू हो रहे खरीफ सीजन 2026 के दौरान देश में जरूरत के अनुसार उर्वरक का स्टॉक मौजूद है.
उर्वरक की जरूरत और स्टॉक
खरीफ 2026 की फसल के लिए अनुमान लगाया है कि देश को करीब 390 लाख टन उर्वरक की जरूरत होगी. अच्छी बात ये है कि अप्रैल की शुरुआत तक ही 180 लाख टन उर्वरक पहले से मौजूद है. ये मात्रा सामान्य तौर पर जो सीजन से पहले रहती है, उससे करीब 33% ज्यादा है. पिछले साल इसी समय पर उर्वरक का स्टॉक 147 लाख टन था, जबकि इस साल 180 लाख टन है. यानी इस बार स्थिति पहले से बेहतर है.
खाड़ी देशों पर निर्भरता
भारत उर्वरक के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है. भारत में इस्तेमाल होने वाले यूरिया का 20–30% और डीएपी (DAP) का करीब 30% खाड़ी देशों से आयात किया जाता है. साथ ही, भारत जिन गैसों से यूरिया बनाता है, उनका करीब 50% भी खाड़ी क्षेत्र से आता है. एलएनजी यूरिया बनाने का बहुत जरूरी कच्चा माल है.
उर्वरक विभाग के अनुसार, उर्वरक बनाने में इस्तेमाल होने वाले जरूरी पदार्थ जैसे अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड की सप्लाई पर असर पड़ा है. दुनिया भर में एलएनजी, अमोनिया और सल्फर की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. इसके अलावा माल ढुलाई और परिवहन खर्च भी महंगा हो गया है.
यूरिया के प्रोडक्शन पर पड़ा असर
इन वजहों से देश में यूरिया के उत्पादन पर असर पड़ा है. हालांकि, उर्वरक विभाग का कहना है कि वह इस असर को कम करने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है, जिससे किसानों को उर्वरक की कमी न हो.
रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, नई सप्लाई व्यवस्था के जरिए रूस से लगभग 28 लाख टन उर्वरक केप ऑफ गुड होप रास्ते से भारत लाया जा रहा है. इसके अलावा भारत कई देशों से उर्वरक मंगा रहा है, जिनमें रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र, फिनलैंड और टोगो शामिल हैं. सऊदी अरब से करीब 30 लाख टन डीएपी खाद की सप्लाई भी लगातार जारी है और अब तक इसमें कोई रोक नहीं आई है. साथ ही, उर्वरक बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल जैसे सल्फर और एलएनजी की सप्लई को भी स्टेबल रखने की कोशिश की जा रही है.
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