युद्ध के बीच महाराष्ट्र के अंगूरों ने थामी यूरोप-US की राह, दोगुने दाम ने बढ़ाई किसानों की चमक

खाड़ी देशों में युद्ध की वजह से महाराष्ट्र के अंगूर उत्पादकों ने यूरोप और अमेरिका का रुख किया है, जहां उन्हें 80 रुपये के बजाय 165 रुपये प्रति किलो तक का दोगुना दाम मिल रहा है.

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इजरायल-ईरान के बीच जंग और जियोपॉलिटिकल टेंशन ने जहां कई व्यापारिक रास्तों को रोका, वहीं महाराष्ट्र के अंगूर उत्पादकों के लिए समृद्धि के नए द्वार खोल दिए हैं. खाड़ी देशों में जारी अस्थिरता को देखते हुए महाराष्ट्र के अंगूरों ने अब पश्चिमी देशों के बाजारों में अपनी धाक जमानी शुरू कर दी है. खास बात ये है कि किसानों को यहां पहले के मुकाबले दोगुना दाम मिल रहा है.

maharashtra grapes export boom in europe usa market

मुनाफे की बड़ी रफ्तार

सोलापुर और नासिक जैसे बड़े अंगूर उत्पादक क्षेत्रों के किसान इस समय खुश हैं. जहां कुछ समय पहले तक यूरोप और खाड़ी देशों के लिए अंगूर ₹80 प्रति किलो के आसपास बिक रहे थे, वहीं अब बाजार की दिशा बदलते ही ये भाव ₹160 से ₹165 प्रति किलो के पार पहुंच गया है. यूके और यूएस के मार्केट में भारतीय अंगूरों की डिमांड काफी बढ़ गई है। खाड़ी देशों की तुलना में पश्चिमी देशों से मिल रहे बेहतर दामों की वजह से किसान और निर्यातक दोनों ही संतुष्ट हैं.

तानाजी पवार, जो अंगूर उत्पादक किसान हैं, कहते हैं, "हम पहले खाड़ी देशों में माल भेजते थे, लेकिन अब हमारा माल यूरोप जा रहा है. रेट्स में भारी अंतर है, जिससे हमें काफी लाभ हो रहा है."

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आमतौर पर महाराष्ट्र के अंगूरों का एक बड़ा हिस्सा दुबई, कतर और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों में जाता था. लेकिन अभी के युद्ध संकट और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं ने निर्यातकों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया. अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो भविष्य में खाड़ी देशों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी और भारतीय किसान सीधे तौर पर प्रीमियम मार्केट्स से जुड़ सकेंगे.

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