महाराष्ट्र में 96 हजार करोड़ का पेमेंट बकाया, 3 लाख ठेकेदारों का हड़ताल का ऐलान, रुक सकते हैं सारे काम

Maharashtra Contractors Strike: महाराष्ट्र के करीब 3 लाख ठेकेदारों ने 96 हजार करोड़ रुपये के बकाया भुगतान की मांग को लेकर 7 अप्रैल को हड़ताल की चेतावनी दी है.

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Maharashtra Contractors Strike: महाराष्ट्र में सड़कों, पुलों और दूसरे सरकारी कामों के रुकने का डर है. दरअसल प्रदेश के करीब 3 लाख ठेकेदारों ने सरकार से कहा है कि अगर उनका बकाया पैसा जल्दी नहीं मिला तो वो 7 अप्रैल से पूरे प्रदेश में सरकारी काम बंद कर देंगे. ठेकेदारों के अनुसार सरकार पर उनका करीब 96,000 से 96,400 करोड़ रुपये बकाया है. और अगर काम बंद हुआ, तो आम लोगों से जुड़े कई जरूरी कामों पर इसका असर दिखाई दे सकता है.

कैश की कमी और बढ़ता प्रेशर

ठेकेदार संघों ने सरकार को बताया है कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई है. काफी समय से पेमेंट ना मिलने की वजह से उनके पास नकद पैसे की बड़ी कमी हो गई है. इस वजह से उन्हें बैंकों का कर्ज चुकाने में परेशानी हो रही है और मजदूरों की मजदूरी देना भी मुश्किल हो गया है. ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने कई बार सरकार से बात की और शिकायतें दीं, लेकिन अब तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.

किस विभागों में कितना बकाया?

बकाया राशि का बड़ा हिस्सा जरूरी सरकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में फंसा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार,

  • जल आपूर्ति और जल जीवन मिशन में लगभग 35 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं.
  • लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़ी परियोजनाओं में करीब 29 हजार करोड़ अटके हुए हैं.
  • जिला विकास योजनाओं में लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है.
  • जल संसाधन विभाग की योजनाओं में 9 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं.

इन सभी के अलावा, ग्रामीण विकास और नगर पालिकाओं से जुड़ी कई परियोजनाओं में भी करोड़ों रुपये का पेमेंट अभी तक नहीं हुआ है.

पहले भी हुई थीं कोशिशें

ये पहली बार नहीं है कि महाराष्ट्र में ठेकेदारों ने प्रदर्शन किया हो. पिछले साल भी उन्होंने बड़े पैमाने पर आंदोलन किया था. तब सरकार ने करीब 20 हजार करोड़ रुपये जारी किए थे. लेकिन ठेकेदारों का कहना है कि इसके बाद भी नए कामों के बिल बनते रहे और पुराने पैसे नहीं मिले. इसी वजह से अब फिर से सरकार पर बकाया राशि बढ़कर 96 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है.

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अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर

अगर 7 अप्रैल से काम बंद हो जाता है, तो इसका असर सिर्फ सड़कों और इमारतों पर नहीं पड़ेगा. इससे आसपास की पूरी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर होगा. इन कामों से लाखों मजदूर, सामान सप्लाई करने वाले लोग और छोटे कारोबार जुड़े हुए हैं. काम रुकने से इन सभी की कमाई रुक जाएगी और उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ा हो जाएगी. इसके साथ ही दूसरे विकास के कामों में भी देरी होगी और उनकी डेडलाइन आगे खिसक सकती है.

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