LPG सप्लाई रुकने से क्या बंद हो सकते हैं मोबाइल टावर? जानें आपकी कॉलिंग और डेटा पर क्या होगा असर

LPG Supply Shortage: टेलीकॉम टावर बनाने वाली कंपनियों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें LPG की सप्लाई जल्द बहाल नहीं की गई, तो देश भर में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.

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Lpg shortages: कंपनियों का कहना है कि बिजली कटने पर टावर चलाने के लिए उन्हें डीजल जनरेटरों पर निर्भर रहना पड़ता है और अब टावर मैन्युफैक्चरिंग के लिए गैस भी नहीं मिल रही.
नई दिल्ली:

LPG Cylinder Shortage impact: देश में एक तरफ रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) की सप्लाई रुकने की खबरें आ रही हैं, तो दूसरी तरफ इसका एक ऐसा असर सामने आया है जिसके बारे में शायद ही किसी ने सोचा होगा. आपकी जेब में रखा मोबाइल और घर का इंटरनेट कनेक्शन अब खतरे में है. वजह जानकर आप हैरान रह जाएंगे.दरअसल, मोबाइल टावर बनाने वाली कंपनियों के लिए गैस की सप्लाई रोक दी गई है. अगर यह संकट लंबा खिंचा, तो हो सकता है कि आपके फोन के सिग्नल भी गायब हो जाएं.

मोबाइल टावरों पर क्यों मंडरा रहा है खतरा?

यह हैरानी की बात लग सकती है कि मोबाइल टावर का LPG से क्या लेना-देना? दरअसल, टावर बनाने वाली फैक्ट्रियों में गैल्वेनाइजेशन (Galvanization) की प्रक्रिया के लिए भारी मात्रा में LPG या LNG का इस्तेमाल होता है. यह प्रक्रिया टावरों को मजबूत और जंग-मुक्त बनाने के लिए जरूरी है. 

पेट्रोलियम मंत्रालय ने आदेश दिया है कि फिलहाल सरकारी कंपनियां सिर्फ घरेलू ग्राहकों को घरों में इस्तेमाल होने वाली ही LPG गैस देंगी. इसके चलते 5 मार्च 2026 से टावर बनाने वाली कंपनियों की गैस सप्लाई काट दी गई है.

क्या बंद हो जाएंगे मोबाइल और इंटरनेट?

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स एसोसिएशन (DIPA), जिसमें इंडस टावर्स और वोडाफोन-आइडिया जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, ने सरकार को चेतावनी दी है. कंपनियों का कहना है कि गैस न मिलने से टावर बनाने के प्लांट बंद करने पड़ सकते हैं. एक बार ये प्लांट बंद हो गए, तो उन्हें दोबारा शुरू करने में काफी समय लगता है.

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इसका सीधा मतलब है कि नए टावर नहीं लगेंगे और पुराने मोबाइल टावरों का मेंटेनेंस नहीं होगा.इसका नतीजा ये होगा कि नेटवर्क जाम हो सकता है, कॉल ड्रॉप बढ़ सकते हैं और इंटरनेट की स्पीड सुस्त पड़ सकती है.

5G और इमरजेंसी सेवाओं पर भी असर

सिर्फ आपकी कॉलिंग ही नहीं, बल्कि देश का 5G नेटवर्क, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, ऑनलाइन पढ़ाई और यहां तक कि नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ी सेवाएं भी इसी नेटवर्क पर टिकी हैं. कंपनियों का कहना है कि बिजली कटने पर टावर चलाने के लिए उन्हें डीजल जनरेटरों पर निर्भर रहना पड़ता है और अब टावर मैन्युफैक्चरिंग के लिए गैस भी नहीं मिल रही. यह दोहरी मार देश की डिजिटल कनेक्टिविटी को पूरी तरह ठप कर सकती है.

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सरकार से मांगी गई इमरजेंसी मदद

DIPA ने टेलीकॉम सचिव अमित अग्रवाल को चिट्ठी लिखकर तुरंत दखल देने की मांग की है. उन्होंने अपील की है किटेलीकॉम सेक्टर को इस नए सरकारी आदेश से छूट दी जाए और गैस सप्लाई तुरंत बहाल हो.

इसके साथ ही उन्होंने अपील की है कि बिजली विभागों को निर्देश दिया जाए कि मोबाइल टावर साइट्स को प्रायोरिटी के आधार पर बिजली दी जाए ताकि वे डीजल या गैस पर कम निर्भर रहें.

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