LPG Price Hike: एलपीजी हुई महंगी, तेल कंपनियों का घाटा 62,000 करोड़ के पार, चुनौतियों के बीच जानिए क्‍या कर रही सरकार 

LPG Price Hike: Saudi CP बढ़ने से भारत की LPG आयात लागत बढ़ी है. OMCs की घरेलू LPG अंडर-रिकवरी बढ़ती जा रही है. इस बीच सरकार ने 3 बड़े कदम उठाए हैं. जानिए डिटेल में अंदर.

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LPG Price Hike: एलपीजी की कीमतें अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर बढ़ीं
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

LPG Price Hike: एलपीजी की कीमतें अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर बढ़ गई हैं. सऊदी  CP करीब 625 डॉलर से 660 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गई है. रसोई गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ने का ये एक अहम फैक्‍टर होता है. इसके लिए सिर्फ घरेलू मांग ही जिम्मेदार नहीं है. इसके पीछे पश्चिम एशिया से लेकर भारत के किचन तक फैली पूरी सप्लाई चेन काम करती है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG के प्रमुख बेंचमार्क Saudi CP यानी सऊदी कॉन्‍ट्रैक्‍ट प्राइस में बढ़ोतरी से भारत के लिए LPG आयात महंगा हुआ है. इसका सीधा असर तेल कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है.

31 अगस्त 2026 तक घरेलू LPG पर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्‍तान पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी 62,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है.

सरकार ने तेल कंपनियों को राहत देने के लिए 30,000 करोड़ रुपये के मुआवजे का प्रावधान किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों ने दबाव कम नहीं होने दिया है. हालांकि आशंका जताई जा रही है कि गैस सप्‍लाई का संकट बना रहा तो आगे घरेलू बाजार में भी कीमतें बढ़ सकती हैं. 

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Saudi CP बढ़ा तो भारत पर क्या असर पड़ा?

भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 60% आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने का असर सीधे भारत की खरीद लागत पर पड़ता है.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में LPG के आयात सौदों के लिए Saudi Aramco का Saudi CP एक अहम बेंचमार्क है. इसमें प्रोपेन और ब्यूटेन की कीमतें तय होती हैं. ये दोनों घरेलू रसोई गैस के प्रमुख घटक हैं.

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सितंबर में Saudi Aramco ने प्रोपेन का CP 5 डॉलर बढ़ाकर 625 डॉलर प्रति मीट्रिक टन और ब्यूटेन का CP 20 डॉलर बढ़ाकर 660 डॉलर प्रति मीट्रिक टन कर दिया.

सीधी भाषा में समझें तो Saudi CP बढ़ा और भारत के लिए LPG कार्गो महंगे हुए. ऐसे में तेल कंपनियों की खरीद लागत बढ़ी. फिर घरेलू बिक्री मूल्य और वास्तविक लागत के बीच अंतर बढ़ गया. सरकार के मुताबिक, Saudi CP में करीब 41% की बढ़ोतरी हो चुकी है.

पश्चिम एशिया में तनाव, समुद्री मार्गों की अनिश्चितता और सप्लाई में कमी ने LPG बाजार को अस्थिर बनाया है. भारत के LPG आयात का बड़ा हिस्सा सामान्य तौर पर होर्मूज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है. इसलिए इस इलाके में तनाव बढ़ने पर भारत की LPG लागत और सप्लाई, दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

LPG महंगी हुई तो OMCs का घाटा क्यों बढ़ा?

घरेलू LPG के दाम आम उपभोक्ताओं के लिए अचानक बहुत ज्यादा न बढ़ें, इसके लिए सरकार कीमतों को नियंत्रित रखती है और तेल कंपनियों को कुछ हद तक मुआवजा देती है.

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लेकिन जब आयातित LPG की लागत तेजी से बढ़ती है, तो IOCL, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों के लिए घरेलू सिलेंडर को मौजूदा कीमत पर बेचना महंगा पड़ता है. घरेलू LPG की वास्तविक लागत और बिक्री कीमत के बीच के इस अंतर को अंडर-रिकवरी कहा जाता है.

सरकार ने घरेलू LPG को किफायती बनाए रखने के लिए वित्त वर्ष 2022-23 में OMCs को 22,000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया था.

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वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान करीब 30,000 करोड़ रुपये का भुगतान या प्रावधान किया जा रहा है.

इसके बावजूद 31 अगस्त 2026 तक घरेलू LPG पर तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी 62,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है.

यहां एक बात समझना जरूरी है. 62,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा कंपनियों का पूरा तत्काल नकद घाटा नहीं है. ये घरेलू LPG की वास्तविक लागत और नियंत्रित बिक्री कीमत के बीच जमा हुए अंतर को दिखाता है.

अब सरकार के सामने सवाल है कि इस बढ़ते अंतर का कितना हिस्सा बजट के जरिए भरा जाए, कितना बोझ तेल कंपनियां उठाएं और कितना खुदरा कीमतों के जरिए एडजस्ट किया जाए.

LPG सिलेंडर की कीमतें

दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 942 रुपये हो गई है. वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना यानी PMUY के लाभार्थियों के लिए सिलेंडर की कीमत 642 रुपये रखी गई है.

सरकार का कहना है कि Saudi CP में करीब 41% की बढ़ोतरी के बावजूद PMUY परिवारों के लिए सिलेंडर का प्रभावी मूल्य इस अवधि में करीब 32% कम हुआ है. सरकार के मुताबिक, हालिया 60 रुपये की बढ़ोतरी का PMUY परिवार पर औसत असर 80 पैसे प्रतिदिन से कम है.

हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों में बढ़ोतरी लंबे समय तक जारी रहती है तो सरकार के सब्सिडी बिल और OMCs की अंडर-रिकवरी, दोनों पर दबाव बढ़ सकता है.

LPG की सप्लाई बढ़ाने के लिए उत्पादन में इजाफा

सरकार सिर्फ कीमत और सब्सिडी के मोर्चे पर ही काम नहीं कर रही है. LPG की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने की कोशिश भी की गई है.

सरकार ने 8 मार्च 2026 को रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल परिसरों को LPG उत्पादन अधिकतम करने का निर्देश दिया था.

इसके तहत प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपिलीन और ब्यूटीन की कुछ धाराओं को LPG पूल में मोड़ा गया. सरकार के मुताबिक, इससे घरेलू LPG उत्पादन में करीब 25% की बढ़ोतरी हुई है.

पूरे घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता के आधार पर घरेलू इस्तेमाल वाले LPG के लिए आवंटित किया जा रहा है.

गैर-घरेलू LPG में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे जरूरी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है. वहीं होटल, रेस्तरां और दूसरे व्यावसायिक ग्राहकों के आवंटन की समीक्षा के लिए IOCL, BPCL और HPCL के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है.

पैनिक बुकिंग रोकने के लिए 25 दिन का अंतर

सरकार ने LPG की पैनिक बुकिंग और जमाखोरी से बचने की भी अपील की है.

सरकार के मुताबिक, घरेलू LPG की सामान्य डिलीवरी अवधि करीब ढाई दिन है. मांग को नियंत्रित रखने के लिए दो LPG बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतर को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन किया गया है.

LPG सब्सिडी के लिए बायोमीट्रिक आधार भी जरूरी

सरकार के सामने दूसरी बड़ी चुनौती सब्सिडी को सही उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है.

इसके लिए 1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी वाले घरेलू LPG रिफिल के लिए BAA यानी बायोमीट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी कर दिया गया है.

19 सितंबर 2026 तक देश में कुल 30.51 करोड़ सक्रिय घरेलू LPG ग्राहक थे. इनमें से 27.43 करोड़ यानी 89.9% उपभोक्ता अपना बायोमीट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन करा चुके थे.

इस हिसाब से करीब 3.08 करोड़ ग्राहक अभी BAA से बाकी थे.

जो उपभोक्ता तय समय तक बायोमीट्रिक ऑथेंटिकेशन नहीं कराते हैं, वो LPG सिलेंडर खरीदना जारी रख सकेंगे, लेकिन उन्हें बाजार मूल्य पर सिलेंडर लेना होगा और सब्सिडी नहीं मिलेगी.

BAA डिलीवरी के समय, LPG डिस्ट्रीब्यूटर के शोरूम पर और तेल कंपनियों के मोबाइल ऐप के जरिए किया जा सकता है.

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सरकार के सामने तीन मोर्चे

LPG की मौजूदा स्थिति ने सरकार के सामने एक साथ कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगी LPG के बीच सप्लाई बनाए रखनी है, आम परिवारों और PMUY लाभार्थियों को राहत देनी है और तेल कंपनियों की बढ़ती अंडर-रिकवरी को भी संभालना है.

अगर Saudi CP में और बढ़ोतरी होती है या होर्मूज के आसपास सप्लाई बाधित रहती है तो भारत का LPG आयात बिल बढ़ सकता है.

इसका असर पहले तेल कंपनियों की लागत पर पड़ेगा. इसके बाद सरकार की सब्सिडी जरूरत बढ़ सकती है और लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊंची रहने पर घरेलू LPG कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है.

फिलहाल सरकार की रणनीति घरेलू उत्पादन बढ़ाने, सप्लाई को प्राथमिकता देने, OMCs को मुआवजा देने और BAA के जरिए सब्सिडी को लक्षित करने पर केंद्रित है. 

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Saudi CP Benchmark LPG
Hormuz Strait Blockade
Domestic Gas Crisis
LPG Price Hike Fear