इंडक्शन कुकर, हीटर का बंपर प्रोडक्शन, मिडिल-ईस्ट संकट के बीच सरकार का 'मास्टर प्लान', LPG की किल्लत से मिलेगी राहत

Middle East crisis: ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण गैस सप्लाई पर मंडराते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने इंडक्शन कुकर और पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है. जानें क्या है सरकार का 'प्लान B'.

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Us Iran War News: ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से गैस सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ने की आशंका है.
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  • भारत सरकार ने मिडिल-ईस्ट जंग के बीच सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए मास्टर प्लान बनाया है.
  • सरकार इंडक्शन कुकर, जूट बैग्स और पेट्रोकेमिकल्स का उत्पादन बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने में जुटी है.
  • सप्लाई से जुड़ी संभावित खतरों को देखते हुए कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आयात शुल्क पहले ही घटाया गया है.
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Middle East Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब थमती नहीं दिख रही है. जैसे-जैसे यह तनाव बढ़ रहा है, भारत सरकार ने भी अपनी कमर कस ली है. मिडिल-ईस्ट तनाव बढ़ने पर सरकार अलर्ट मोड में नजर आ रही है.मिडिल-ईस्ट से आने वाली गैस और तेल की सप्लाई में किसी भी बड़ी रुकावट से निपटने के लिए सरकार ने अब अपना 'मास्टर प्लान' तैयार किया है. सरकार देश में इंडक्शन कुकर, वेसल हीटर, पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स और जूट के बैग जैसे जरूरी सामान का घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़ाने पर काम कर रही है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके.

लंबे समय तक युद्ध की स्थिति के लिए अलग-अलग प्लान तैयार

शुक्रवार को सरकार ने एक अहम बैठक की, जिसमें सप्लाई से जुड़े संभावित जोखिम और जरूरी सामानों की उपलब्धता की समीक्षा की गई.इस बैठक में DPIIT, पावर मंत्रालय और DGFT के अधिकारी शामिल हुए. इस बैठक का मकसद यह था कि अगर युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो जरूरी चीजों की कमी न हो. ईरान-अमेरिका तनाव और मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध अगर अगले कुछ महीनों तक और खिंचता है तो उस परिस्थिति से निपटने के लिए है, भारत सरकार जरूरी सामान की सप्लाई सुरक्षित रखने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है.

गैस संकट का समाधान, घर-घर पहुंचेंगे इंडक्शन कुकर!

ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से गैस सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ने की आशंका है. इसी को देखते हुए सरकार अब घरेलू स्तर पर इंडक्शन कुकर और वेसल हीटर (Vessel Heaters) के उत्पादन को रफ्तार देने पर विचार कर रही है. मकसद साफ है कि अगर रसोई गैस (LPG) महंगी होती है या उसकी किल्लत होती है, तो आम लोगों के पास बिजली से चलने वाले इलेक्ट्रिक चूल्हों का ऑप्शन मौजूद रहे.

पेट्रोकेमिकल्स और बोरियों के प्रोडक्शन पर जोर

सरकार सिर्फ रसोई तक ही सीमित नहीं है. सप्लाई चेन को दुरुस्त रखने के लिए पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स और गनी बैग्स के प्रोडक्शन बढ़ाने पर भी काम शुरू हो गया है. सरकार ने पहले ही कई अहम पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर आयात शुल्क (Import Duty) कम कर दिया है ताकि लागत कम रहे और इंडस्ट्रीज को कच्चे माल की कमी न हो. 

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सूत्रों के मुताबिक सरकार आने वाले महीनों तक युद्ध जारी रहने की संभावना को देखते हुए अलग-अलग परिस्थितियों के लिए तैयारी कर रही है.सरकार का फोकस अब आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर बनने पर है.

अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद बढ़ा तनाव

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ा. इसके जवाब में ईरान की कार्रवाई से हालात और गंभीर हो गए.कतर के एक बड़े LNG प्लांट को नुकसान पहुंचने से ऊर्जा सप्लाई पर लंबे समय तक असर पड़ने की आशंका है.

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'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' बंद होने से क्यों बना है खतरा? भारत पर सीधा असर

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और हमारी LPG सप्लाई का बड़ा हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) के रास्ते से आता है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का अहम तेल सप्लाई रूट है. युद्ध की वजह से यह रास्ता लगभग बंद होने की कगार पर है. कतर में एक बड़ी गैस फैसिलिटी को नुकसान पहुंचने से खतरा और बढ़ गया है. इसके लगभग बंद होने जैसी स्थिति से सप्लाई प्रभावित हो रही है. अगर संकट लंबा चला तो भारत में महंगाई बढ़ सकती है.पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं. इससे महंगाई बढ़ने और रुपये पर दबाव आने की आशंका भी है.

ट्रंप की धमकी और ईरान का कड़ा जवाब

हालत तब और बिगड़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा किने कहा है कि अगले दो-तीन हफ्तों तक ईरान पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी .उन्होंने यहां तक कहा कि जब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य साफ नहीं होता, वे ईरान को नेस्तनाबूद कर देंगे. इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि उस जमाने में मिडिल-ईस्ट में कोई तेल या गैस नहीं निकाली जाती थी. ईरान ने फिलहाल किसी भी युद्धविराम (Ceasefire) की संभावना को खारिज कर दिया है. ऐसे में भारत सरकार की कोशिश है कि अगर मिडिल-ईस्ट संकट लंबा चलता है, तब भी देश में जरूरी सामान की सप्लाई और कीमतों पर ज्यादा असर न पड़े.
 

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