रुपया अब तक के सबसे निचले स्‍तर पर, डॉलर के मुकाबले 92.63 के रिकॉर्ड लो पर पहुंचा, ये हैं 3 कारण

Rupee at record Low: शेयर बाजार में आज तेजी रही और सेंसेक्स 633 अंक चढ़कर 76,704 पर बंद हुआ, लेकिन यह रुपये को रिकॉर्ड गिरावट से बचाने में नाकाम रहा.

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Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड स्‍तर तक गिरा

भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा. रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 23 पैसे टूटकर अब तक के ऐतिहासिक निचले स्‍तर 92.63 पर बंद हुआ. विदेशी बाजारों में डॉलर की मजबूती और भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकालने (FII outflows) की वजह से रुपये पर भारी दबाव देखा गया.

रुपये की गिरावट की 3 मुख्‍य वजहें 

सीनियर कमोडिटी एक्सपर्ट और केडिया एडवाइजरी के MD अजय केडिया के मुताबिक, रुपये में गिरावट की संभावना अभी भी बनी हुई है. उनका कहना है कि इस समय करेंसी मार्केट काफी उथल पुथल जैसी स्थिति से गुजर रहा है, जहां कई फैक्टर एक साथ रुपये पर दबाव डाल रहे हैं.

  1. कच्चे तेल की कीमतें: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं. ब्रेंट क्रूड फिलहाल 103.4 डॉलर प्रति बैरल पर है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ रहा है.
  2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार से करीब 4,741 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिसका सीधा असर रुपये की सेहत पर पड़ा.
  3. डॉलर की मजबूती: दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापने वाला 'डॉलर इंडेक्स' बढ़कर 99.62 पर पहुंच गया है.

शेयर बाजार में तेजी से भी नहीं संभला रुपया 

कारोबार के दौरान रुपया एक समय 92.65 के स्तर तक गिर गया था, जो इसका अब तक का सबसे निचला इंट्रा-डे स्तर है. हालांकि, शेयर बाजार में आज तेजी रही और सेंसेक्स 633 अंक चढ़कर 76,704 पर बंद हुआ, लेकिन यह रुपये को रिकॉर्ड गिरावट से बचाने में नाकाम रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की बैठकों से पहले रुपये में यह अस्थिरता देखी जा रही है.

क्‍या आपकी जेब पर चलेगा 'महंगाई का चाबुक'?

अजय केडिया के मुताबिक, भारतीय रुपये का रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरना सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, इसका सीधा असर आपकी रसोई से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक पर पड़ता है. भारत अपनी जरूरत का ज्‍यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. रुपया कमजोर होने से तेल का आयात महंगा हो सकता है, जिससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं. जब ईंधन महंगा होता है, तो फल, सब्जी और अनाज की ढुलाई महंगी हो जाती है और अंततः खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं. अगर आपके घर में कोई विदेश में पढ़ रहा है या आप विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको कॉलेज की फीस या होटल बुकिंग के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा भारतीय रुपये देने पड़ सकते हैं. 

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