भारत 2030 तक 500 गीगावाट स्वच्छ बिजली लक्ष्य हासिल करने की राह पर अग्रसर : केंद्र

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव संतोष सारंगी ने एनडीटीवी प्रॉफिट से बात करते हुए कहा कि इस समय भारत में लगभग 260 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता मौजूद है. इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में देश को अतिरिक्त करीब 240 गीगावाट बिजली की आवश्यकता होगी यानी एक ऐसा लक्ष्य, जिसे आसानी से हासिल किया जा सकता है.

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भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन से बिजली उत्पादन का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. देश में पहले से ही बड़ी संख्या में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं मौजूद हैं. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव संतोष सारंगी ने एनडीटीवी प्रॉफिट से बात करते हुए कहा कि इस समय भारत में लगभग 260 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता मौजूद है. इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में देश को अतिरिक्त करीब 240 गीगावाट बिजली की आवश्यकता होगी यानी एक ऐसा लक्ष्य, जिसे आसानी से हासिल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि आगे जो नई बिजली क्षमता जुड़ेगी, उसमें सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी सबसे अधिक होगी, जो लगभग 160 गीगावाट का योगदान देगा.

इसके अलावा पवन ऊर्जा से करीब 30 गीगावाट और जलविद्युत परियोजनाओं तथा परमाणु ऊर्जा से बाकी बिजली प्राप्त होगी। परमाणु ऊर्जा से वर्ष 2030 तक लगभग 8 से 10 गीगावाट बिजली जुड़ने की उम्मीद है. संतोष सारंगी ने यह भी कहा कि यदि बड़े स्तर पर डेटा सेंटर्स की परियोजनाएं आगे बढ़ती हैं, तो भारत 500 गीगावाट के लक्ष्य से भी आगे निकल सकता है.

उन्होंने बताया कि डेटा सेंटर्स से बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है और कई ऐसे उद्योग, जो पहले ज्यादा प्रदूषण फैलाते थे, अब स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे देश में हरित ऊर्जा की मांग और भी बढ़ रही है. सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 में अब तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है. नवंबर 2025 तक 44.51 गीगावाट नई क्षमता जोड़ी गई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान हुई 24.72 गीगावाट की तुलना में लगभग दोगुनी है.नवंबर 2025 में देश की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़कर 253.96 गीगावाट हो गई, जो नवंबर 2024 की तुलना में 23 प्रतिशत से अधिक है. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 29 दिसंबर को कहा कि क्षमता वृद्धि 34.98 गीगावाट है, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान यह 20.85 गीगावाट थी। यह दिखाता है कि भारत तेजी से स्वच्छ और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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