भारतीय इकोनॉमी ने दिखाई ताकत, फरवरी में 4 महीने के हाई पर पहुंचा मैन्युफैक्चरिंग PMI, मजबूत डिमांड का असर

Manufacturing PMI February 2026: घरेलू बाजार में भारतीय सामानों की मांग में आए बड़े सुधार की वजह से कंपनियों को भारी मात्रा में नए ऑर्डर मिले हैं, जिससे प्रोडक्शन  की रफ्तार पिछले चार महीनों में सबसे तेज रही है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
Manufacturing Sector Growth: भारत का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जनवरी के 55.4 से बढ़कर फरवरी में 56.9 पर पहुंच गया है
नई दिल्ली:

दुनियाभर में मची हलचल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक बहुत अच्छी खबर आई है. जहां एक तरफ शेयर बाजार और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत की फैक्ट्रियों में काम की रफ्तार बढ़ गई है. फरवरी के महीने में भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (Manufacturing Sector) ने पिछले चार महीनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिसका मुख्य कारण देश के भीतर सामानों की बढ़ती जबरदस्त डिमांड है.

फरवरी में दिखा दम, बढ़ गया PMI का आंकड़ा

सोमवार को जारी हुए एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, भारत का मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जनवरी के 55.4 से बढ़कर फरवरी में 56.9 पर पहुंच गया है जो चार महीने का उच्चतम स्तर है. आसान भाषा में समझें तो 50 से ऊपर का स्कोर बताता है कि सेक्टर में सुधार हो रहा है और कामकाज बढ़ रहा है. घरेलू बाजार में भारतीय सामानों की मांग में आए बड़े सुधार की वजह से कंपनियों को भारी मात्रा में नए ऑर्डर मिले हैं, जिससे प्रोडक्शन  की रफ्तार पिछले चार महीनों में सबसे तेज रही है.

नए ऑर्डर और टेक्नोलॉजी ने बदला गेम

कंपनियों का कहना है कि मार्केट में ग्राहकों की बढ़ती जरूरतों और बेहतरीन मार्केटिंग की वजह से उनके पास नए काम की कमी नहीं है. 

एचएसबीसी (HSBC) की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, फैक्ट्रियों में काम करने के तरीके में सुधार और नई टेक्नोलॉजी में निवेश करने से भी प्रोडक्शन को काफी मजबूती मिली है. यही वजह है कि अक्टूबर के बाद से अब तक का यह सबसे शानदार प्रदर्शन रहा है.

Advertisement

एक्सपोर्ट में थोड़ी सुस्ती, उम्मीदें बरकरार

एक तरफ जहां देश के भीतर डिमांड मजबूत है, वहीं विदेशी बाजार से मिलने वाले ऑर्डरों (Export Orders) में थोड़ी सुस्ती देखी गई है. पिछले 17 महीनों में विदेशी मांग की रफ्तार सबसे धीमी रही है, जिसका असर फैक्ट्रियों में नई नौकरियों पर भी पड़ा है. 

अमेरिका के साथ हुए ट्रेड डील के बावजूद टैरिफ को लेकर चल रही अनिश्चितता ने एक्सपोर्ट की रफ्तार को थोड़ा धीमा किया है. हालांकि, एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट से अभी भी भारतीय सामानों की मांग बनी हुई है.

Advertisement

महंगाई का दबाव कम, लेकिन सामान हो सकते हैं महंगे

राहत की बात यह है कि कंपनियों के लिए कच्चा माल खरीदने की लागत (Input Cost) में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है. हालांकि, बाजार में सामान की जबरदस्त मांग होने के कारण मैन्युफैक्चरर्स ने अपने सामानों की कीमतें थोड़ी बढ़ाई हैं. 

7.6% की रफ्तार से बढ़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था 

अच्छी बात यह है कि आने वाले साल को लेकर भारतीय कंपनियों का भरोसा बहुत मजबूत है. उन्हें उम्मीद है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था 7.6% की रफ्तार से बढ़ती रहेगी.

Featured Video Of The Day
Iran Israel War Breaking News: ईरानी नेताओं की हत्या पर भड़का रूस, युद्ध के बीच कही ये बात |