भारत के करोड़ों घरों की रसोई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल की बढ़ती जंग ने ऊर्जा सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर फारस की खाड़ी में जारी टेंशन जल्द खत्म नहीं हुई, तो आने वाले हफ्तों में भारतीय परिवारों को रसोई गैस की बड़ी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है.
India LPG shortage
क्यों गहराया संकट?
डेटा इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के अनुसार भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी खरीदार है और अपनी जरूरत का 90% से अधिक हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों से खरीदता है. अभी जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होने वाली सप्लाई भी रुक गई है. कुकिंग गैस से लदे जहाज युद्ध क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे भारत तक समय पर डिलीवरी पहुंचना मुश्किल हो गया है.
मार्च का महीने में असली चुनौती
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर मार्च के पहले हफ्ते में सप्लाई फिर से शुरू नहीं हुई, तो देश में एलपीजी की कमी हो सकती है. हालांकि भारत अमेरिका से भी गैस खरीदने के ऑप्शन पर काम कर रहा है, लेकिन वहां से माल आने में लंबा समय लगता है और इसकी ढुलाई का खर्च भी बहुत ज्यादा है. व्यापारियों ने बताया कि अमेरिका से खरीदा गया गैस स्टॉक अप्रैल से पहले भारत नहीं पहुंच पाएगा.
सरकार की क्या है तैयारी?
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत के पास अभी के समय में लगभग 30 दिनों का एलपीजी स्टॉक मौजूद है. तैयारी की बात करें तो तेल रिफाइनरियों और सरकारी अधिकारियों के बीच बैठकों का दौर लगातार जारी हैं जिससे इस बड़ी समस्या से निपटा जा सके. वहीं दूसरी तरफ सरकार रूस से भी कच्चे तेल और गैस के स्टॉक को लेकर बातचीत कर रही है, जो फिलहाल भारतीय समुद्री क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं.
आम आदमी पर क्या होगा असर?
अगर सप्लाई चेन में रुकावट नहीं हटी तो ना केवल गैस की किल्लत होगी बल्कि इसकी कीमतों में भी उछाल आ सकता है. इससे घरेलू बजट बिगड़ेगा और महंगाई दर ऊपर चढ़ेगी. केवल एलपीजी ही नहीं बल्कि सीएनजी और पीएनजी की सप्लाई पर भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है.
भारत के तेल मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि रिजर्व के मामले में बहुत परेशान होने की जरूरत नहीं है और उम्मीद है कि संकट को कम करने के लिए कुछ ना कुछ उपाय जाएंगे.














